facebookmetapixel
Advertisement
वैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौतीपश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, रणनीतिक तेल भंडार विस्तार प्रक्रिया तेजGST कटौती से बढ़ी मांग, ऑटो और ट्रैक्टर बिक्री में उछाल: सीतारमणसरकार का बड़ा फैसला: पीएनजी नेटवर्क वाले इलाकों में नहीं मिलेगा एलपीजी सिलिंडरकोटक बैंक ने सावधि जमा धोखाधड़ी मामले में दर्ज की शिकायत

FY26 की दूसरी छमाही में RBI से और OMO की उम्मीद, नकदी प्रवाह और करेंसी लीकेज पर नजर

Advertisement

विशेषज्ञ बोले – जून के अंत से दिखेगा लाभांश का असर, मार्च 2026 तक रह सकता है 1% अधिशेष

Last Updated- May 26, 2025 | 8:37 AM IST
RBI

बॉन्ड बाजार चालू वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से अतिरिक्त ओपन मार्केट ऑपरेशंस (ओएमओ) की उम्मीद कर रहा है। बाजार को खासकर करेंसी लीकेज की अवधि के दौरान ऐसा किए जाने की उम्मीद है। रिजर्व बैंक द्वारा हाल में सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपये अधिशेष हस्तांतरण के बाद यह अनुमान लगाया जा रहा है क्योंकि यह हस्तांतरण 3 लाख करोड़ रुपये के कुछ बाजार अनुमानों से कम है।

रिजर्व बैंक का लाभांश व्यवस्था में नकदी के पर्याप्त एवं टिकाऊ प्रवाह को दिखाता है। बहरहाल व्यवस्था में नकदी पर इसका असर तभी दिखता है, जब सरकार का व्यय बढ़ना शुरू होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि वित्त वर्ष 2025 के व्यय के तरीके के आधार पर देखें तो लाभांश की बड़ी मात्रा को जून के अंत में खर्च किया जाएगा।

पिछले साल आम चुनाव के कारण सरकारी खर्च का समय और उसकी मात्रा विषम थी। इसकी वजह से इस साल लाभांश का व्यवस्था में नकदी पर असर धीरे-धीरे होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि संभवतः जून के अंत से अगस्त के अंत तक इसका असर दिख सकता है।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता ने कहा, ‘इससे वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में ओएमओ खरीद की आवश्यकता होगी। हम अनुमान लगा रहे हैं कि 1.6 लाख करोड़ रुपये की वृद्धिशील ओएमओ खरीद वित्त वर्ष 2026 के शेष महीनों में होगी। इससे मार्च 2026 तक व्यवस्था में नकदी अधिशेष एनडीटीएल का 1 प्रतिशत बना रहेगा। इस अनुमान में वित्त वर्ष 2026 में 2.7 लाख करोड़ रुपये की करेंसी लीकेज और विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप के माध्यम से तटस्थ रूप से मुद्रा डालना शामिल है। वित्त वर्ष 2025 के अंत से करेंसी लीकेज में तेजी आई है जो वित्त वर्ष 2026 में भी जारी है।’

Advertisement
First Published - May 26, 2025 | 8:37 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement