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मार्जिन में सुधार से बैंकों को बेहतर मुनाफे की आस

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सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शुद्ध लाभ में सालाना आधार पर 84.7 फीसदी की वृद्धि के साथ उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।

Last Updated- April 09, 2023 | 7:29 PM IST
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बैंकों से उम्मीद की जा रही है कि आर्थिक सुधार का लाभ उठाते हुए वे मार्च 2023 को समाप्त होने वाली तिमाह (वित्त वर्ष 23 की चौथी तिमाही) में अच्छा लाभ और परिसंपत्ति गुणवत्ता प्रोफाइल दर्ज करेंगे।

बेहतर शुद्ध ब्याज मार्जिन (NIM) और क्रेडिट लागत में गिरावट के बीच सूचीबद्ध वाणिज्यिक बैंकों का शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 23 की चौथी तिमाही में सालाना आधार पर औसतन 43.6 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान जताया गया है। यह ब्लूमबर्ग के डेटाबेस पर 17 बैंकों के विश्लेषक अनुमानों के संयुक्त आकलन पर आधारित है।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शुद्ध लाभ में सालाना आधार पर 84.7 फीसदी की वृद्धि के साथ उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है। घरेलू ब्रोकर मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि अच्छे मार्जिन और क्रेडिट लागत में लगातार कमी से सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों की कमाई में इजाफा दमदार रहने के आसार हैं। निजी क्षेत्र के बैंकों के मामले में भी अच्छी कारोबारी वृद्धि, जोरदार मार्जिन और नरम ऋण लागत के वजह से कमाई अच्छी रहनी चाहिए।

लेकिन वेतन संशोधन के कारण सरकारी स्वामित्व वाले ऋणदाताओं के मामले में तथा कारोबारों में लगातार निवेश की वजह से निजी बैंकों के मामले में परिचालन व्यय अ​धिक रहने के आसार हैं।

विश्लेषकों के अनुमानों के अनुसार बढ़ती उधार दर और अग्रिमों पर अ​धिक प्रतिफल की वजह से मार्च 2023 की तिमाही में बैंक शुद्ध ब्याज आय (NII) में सालाना आधार पर 21.1 फीसदी की वृद्धि दर्ज कर सकते हैं।

बैंकों के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी से लाभ के संबंध में केयर रेटिंग्स ने कहा कि निजी क्षेत्र के बैंकों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने उधार दर और जमा दरों के बीच अ​धिक अंतर बनाए रखा है।

यह भी पढ़ें : रिटर्न देने के मामले में अब बैंक एफडी का मुकाबला कर रही हैं डाकघर बचत योजनाएं

ब्याज दर बढ़ोतरी उसके बाद जमा दरों के मुकाबले उधार दरों में तीव्र बदलाव से निकट अवधि में NIM में विस्तार हुआ है। यह प्रवृत्ति दिसंबर 2022 की तिमाही में भी देखी गई थी, जब NIM सालाना आधार पर 17 आधार अंक तक बढ़कर 3.3 फीसदी हो गई। वित्त वर्ष 22 की चौथी तिमाही में NIM 2.8 फीसदी स्तर पर थी।

बैंकों ने मई 2022-मार्च 2023 के दौरान नीतिगत रीपो दर में वृद्धि के साथ अपने बाहरी बेंचमार्क आधारित उधार दरों (EBLR) को 250 आधार अंक तक बढ़ाते हुए संशोधित किया है। खुदरा और एमएसएमई के ऋण का मूल्य निर्धारण EBLR से जुड़ा हुआ है।

परिसंपत्ति की बेहतर गुणवत्ता तथा अ​धिक प्रावधान से ऋण लागत कम करने और लाभ में मदद की है।

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First Published - April 9, 2023 | 7:29 PM IST

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