facebookmetapixel
दिसंबर में बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर 4 महीने की ऊंचाई पर, महंगाई भी बढ़ीBudget 2026: बीमा उद्योग ने कर लाभ और प्रीमियम सीमा बढ़ाने की मांग की, सुरक्षा और स्वास्थ्य पॉलिसियों पर फोकसभारत में बागवानी फसलें अनाज को पछाड़ रही, फल व सब्जियों की खेती में तेजीअमेरिकी सीनेटर ने व्यापार वार्ता में तेजी लाने का आह्वान किया और दाल आयात पर जोर दियाभारत है निवेश के लिए अमेरिका के बाद सबसे पसंदीदा ठिकाना, विदेशी और घरेलू CEO आर्थिक वृद्धि में आशावादीफिक्की का तिमाही विनिर्माण सूचकांक उच्चतम स्तर पर, 91% फर्मों ने उत्पादन वृद्धि या स्थिरता की उम्मीद जताईसेंट्रल रजिस्ट्री पर केंद्र को मिलेगा नियंत्रण! सरफेसी ऐक्ट 2002 में संशोधनों पर विचार कर रही सरकारभारत में निवेश का भरोसा बढ़ा, महाराष्ट्र और आंध्र में बड़ी कंपनियों ने किए करोड़ों के समझौतेभारत-ईयू अगले सप्ताह ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते की घोषणा के करीब: उर्सुलाराजमार्ग भूमि मुआवजे में कमियां, NH अधिनियम ढांचे पर फिर से विचार करे केंद्र सरकार

Urban cooperative banks: सहकारी बैकों के चल रहे बुरे दिन, RBI की रेटिंग में भी जा रहे नीचे

Urban cooperative banks in India: 2013-14 में शहरी सहकारी बैंकों के पोर्टफोलियो (GNPA या NPA) में bad loans की हिस्सेदारी 5.7 फीसदी थी। 2022-23 में यह बढ़कर 8.8 फीसदी हो गई।

Last Updated- April 19, 2024 | 11:05 PM IST
Tough times for urban cooperative banks as bad loans build, ranking dips Urban cooperative banks: सहकारी बैकों के चल रहे बुरे दिन, RBI की रेटिंग में भी जा रहे नीचे

Urban cooperative banks in India: भारत में शहरी सहकारी बैंकों (Urban cooperative banks) का इतिहास 19वीं शताब्दी से शुरू होता है। देश में इन बैंकों की स्थापना यूरोप में इसी तरह के बैंकों की सफलता के बाद की गई। मगर कोविड महामारी के बाद से इनके दिन अच्छे नहीं दिख रहे हैं। 5 लाख करोड़ से ज्यादा की जमा राशि रखने वाले बैंक RBI की रेटिंग में निचली दो श्रेणियों में अपनी जगह बना रहे हैं।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के ‘प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंकों के आउटलुक 2022-23’ के हिस्से के रूप में जारी आंकड़ों का बिजनेस स्टैंडर्ड ने विश्लेषण किया। विश्लेषण में पता चलता है कि पिछले कुछ साल इस सेगमेंट के लिए बहुत अच्छे नहीं रहे हैं, जिसके पास 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा जमा राशि है।

सहकारी बैंक इसलिए पापुलर हैं क्योंकि वे अक्सर अन्य बैंकों के मुकाबले ज्यादा ब्याज देते हैं। लेकिन उनमें से कई महामारी के बाद आर्थिक रूप से कमजोर हो गए हैं। RBI पूंजी पर्याप्तता (capital adequacy), एसेट क्वालिटी, मैनेजमेंट, कमाई, नकदी और सिस्टम एंड कंट्रोल जैसे कारकों के आधार पर बैंकों को रेटिंग देता है। 2018-19 में करीब 22 फीसदी शहरी सहकारी बैंकों को सबसे निचली दो श्रेणियों में रखा गया था। 2022-23 में यह संख्या बढ़कर 35 फीसदी हो गई ।

2013-14 में उनके पोर्टफोलियो (GNPA या NPA) में फंसे कर्ज (bad loans) की हिस्सेदारी 5.7 फीसदी थी। 2022-23 में यह बढ़कर 8.8 फीसदी हो गई। Bad loans का अनुपात, प्रोविजंस (नेट NPA) की ऑडिटिंग के बाद, 2022-23 में 2.1 फीसदी था या मोटे तौर पर कहें तो उस स्तर पर था जहां यह एक दशक पहले था।

अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (scheduled commercial banks), शहरी सहकारी समितियों के बड़े समकक्षों का सकल NPA अनुपात 3.9 फीसदी था, और उनका नेट NPA अनुपात 2022-23 में 1 फीसदी था।

सितंबर 2023 में RBI गवर्नर ने शहरी सहकारी बैंकों के bad loans पर चिंता जताई थी। उस वर्ष की शुरुआत में, केंद्रीय बैंक ने ऐसे बैंकों को मजबूत करने के उपायों को नोटिफाई किया था।

उनके द्वारा दिए गए लोन की वैल्यू 2013-14 के बाद से 65 फीसदी बढ़कर 3.3 लाख करोड़ रुपये हो गई है। जमा (deposits) की वैल्यू थोड़ा तेजी से बढ़ी। यह 68 फीसदी की दर से बढ़कर 5.3 लाख करोड़ रुपये हो गई है ।

एक साल पहले पंजाब और महाराष्ट्र सहकारी बैंक (Punjab and Maharashtra Co-operative Bank-PMC) की फेल होने के बाद 2020 से 5 लाख रुपये तक की जमा राशि का बीमा किया जाता है।

तब से जमा राशि में बढ़ोतरी हुई है। शहरी सहकारी बैंकों में बीमाकृत जमा (insured deposits) का परसेंटेज 2021-22 में 71.2 फीसदी से गिरकर 2022-23 में 69.5 फीसदी हो गया है।

First Published - April 19, 2024 | 7:30 PM IST

संबंधित पोस्ट