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वक्त के मुताबिक कदम उठा सकती है समीति

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Last Updated- December 11, 2022 | 7:35 PM IST

बीएस बातचीत

भारतीय रिजर्व बैंक की 6 सदस्यों वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के एक सदस्य जयंत आर वर्मा का कहना है कि समिति के हाथ बंधे हुए नहीं हैं क्योंकि मौद्रिक नीति को लेकर आगे के लिए कोई दिशानिर्देश नहीं है। मनोजित साहा के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि बाजार को किसी भी दिशा में होने वाली कार्रवाई को लेकर तैयार रहने की जरूरत है, यह वृद्धि को समर्थन देने वाला भी हो सकता है और महंगाई पर काबू पाने वाला भी हो सकता है, क्योंकि यह बहुत अनिश्चितताओं वाला दौर है। संपादित अंश…
मौद्रिक नीति समिति के ब्योरों से पता चलता है कि रूस-यूक्रेन संकट के बाद कच्चे तेल में तेज बढ़ोतरी से महंगाई को लेकर चिंता रही है, वहीं ज्यादातर एमपीसी के सदस्य वृद्धि के मोर्चे पर भी सावधानी बरत रहे थे। क्या इसका मतलब यह है कि भविष्य में दरों में होने वाली बढ़ोतरी उतनी आक्रामक नहीं होगी, बाजार जितनी उम्मीद कर रहा है, यानी अगले एक साल में दरों में 4 से 6 बढ़ोतरी?
मुझे लगता है कि इस मसले में हम आंकड़ों पर निर्भर होंगे। वृद्धि और महंगाई दर दोनों में बड़ी अनिश्चितताएं हैं। मुझे लगता है कि सबसे अहम यह है कि हम अभी कोई दिशानिर्देश नहीं दे रहे हैं। आगे के कोई दिशानिर्देश नहीं हैं, हम जरूरत के मुताबिक काम करने के लिए स्वतंत्र हैं। हम वह कर सकते हैं, जिसकी जरूरत होगी।

एमपीसी के ब्योरे में आपने कहा है, ‘मुझे लगता है कि रुख पर आते है, शब्द को प्रस्ताव से हटाया जाना पूरी तरह उचित होगा।’ क्या आप इसके असर पर कुछ प्रकाश डाल सकते हैं? क्या इसका मतलब यह है कि एमपीसी के पास आगे चलकर चकित कर देने वाले कुछ
तत्व हैं?

मुझे नहीं लगता है कि यह चकित करने वाला मामला है। मैं फैसले लेने के गति और फुर्ती के रूप में इस शब्द को देखता हूं। हमें निश्चित रूप से तेजी से काम करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। हम नहीं जानते कि आगे क्या झटका लगने वाला है। हमें महंगाई के झटके झेलने पड़ सकते हैं, वृद्धि संबंधी झटके झेलने पड़ सकते हैं। हमें नहीं पता कि हमारी राह में आगे क्या आने वाला है। इसलिए हमें तेजी से काम करने में सक्षम होना चाहिए। यही मेरा मुख्य मकसद था कि मैंने भविष्य के दिशानिर्देश से छुटकारा पाना बेहतर विचार समझा, जिसके बारे में हम अनुमान नहीं लगा सकते कि हम क्या करेंगे। ऐसे में हमारे हाथ बंधे हुए नहीं होने चाहिए। हमें कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता बरकरार रखनी चाहिए। अगर आंकड़े चकित करते हैं तो मौद्रिक नीति को भी उस चकित करने वाले आंकड़ों के मुताबिक प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

 
लेकिन एमपीसी के प्रस्ताव में कहा गया है कि रिजर्व बैंक समावेशी है…
निश्चित रूप से हम समावेशी हैं।  नकारात्मक वास्तविक ब्याज दर समावेशी है। तटस्थ ब्याज दर 5-6 प्रतिशत या ज्यादा होनी चाहिए। हम तटस्थ दरों से बहुत नीचे हैं। ऐसे में समावेशी इस समय वर्तमान के बारे में बात है, हम भविष्य के बारे में बात नहीं कर रहे हैं। हम वह बता रहे हैं, जो आज है। हम बहुत ज्यादा समावेशी बने हुए हैं। समावेशी इस बात का संकेत नहीं है कि हम अगली बैठक में क्या करेंगे। अगली बैठक में हम वह कर सकते हैं, जो हमें उचित लगेगा।

 क्या आपको लगता है कि निकट भविष्य में वास्तविक ब्याज दर सकारात्मक होती जा रही है?
ऐसा होगा, सवाल यह है कि कब होगा। क्योंकि नकारात्मक वास्तविक ब्याज दर असामान्य स्थिति है। यह कोविड-19 को लेकर प्रतिक्रिया थी। लेकिन यह स्थायी और सतत स्थिति नहीं है। ऐसे में हम वास्तविक ब्याज दर को थोड़ा सकारात्मक करेंगे, जिसकी जरूरत है। सवाल यह है कि कितनी तेजी से हम यह कर सकते हैं।

मार्च में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई दर 7 प्रतिशत के करीब थी। महंगाई के आंकड़े आने के बहुत पहले एमपीसी की बैठक हुई थी, क्या इससे महंगाई के अनुमान के बारे में आपकी धारणा बदलेगी?
मुझे ऐसा नहीं लगता। कम से कम मैं उच्च दरों के बारे में तैयार था। मेरा मतलब यह है कि कोई भी 7 प्रतिशत का अनुमान नहीं लगा रहा था। लोग 6 प्रतिशत से ज्यादा का अनुमान लगा रहे थे, यह भी बहुत ज्यादा है, क्योंकि यह तय अधिकतम सीमा से ऊपर है। मुझे स्पष्ट है कि अनिश्चितता बहुत ज्यादा है। अगर आप 6 प्रतिशत का अनुमान लगाते हैं, तो यह 5 प्रतिशत या 7 प्रतिशत हो सकता है। ऐसी स्थिति में 7 प्रतिशत मुझे आश्चर्यचकित नहीं करता क्योंकि यह अनिश्चितता की सीमा में है।

 जनवरी-मार्च तिमाही में महंगाई दर 6 प्रतिशत से ऊपर रही है। उम्मीद की जा रही है कि अप्रैल-जून में भी यह 6 प्रतिशत से ऊपर बनी रहेगी, जैसा कि रिजर्व बैंक ने अनुमान लगाया है। जुलाई सितंबर के लिए 5.8 प्रतिशत का अनुमान है। क्या आप यह संभावना देखते हैं कि रिजर्व बैंक लगातार 3 तिमाहियों में महंगाई को 2-6 प्रतिशत की सीमा में रखने असफल रहेगा?
हां, ऐसा हो सकता है। हम उम्मीद करते हैं कि ऐसा न हो। हम कदम उठाना चाहते हैं, जिससे कि ऐसा न हो। लेकिन निश्चित रूप से इसकी संभावना है। इस समय वैश्विक अनिश्चितता है।

ऐसी स्थिति से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
यह भविष्य का मामला है। अप्रैल की बैठक में मैंने अपने बयान में कहा है कि आगे के दिशानिर्देश से हमारे हाथ बंधे थे, जो फरवरी में दिया गया। हम अप्रैल में कोई कार्रवाई नहीं कर सके, क्योंकि हम बाजार पर निर्भर थे, जिसने कमोबेश काम नहीं किया, जैसा हमने कहा था। अप्रैल के बयान में कहा गया है कि हमारे हाथ बंधे नहीं हैं। बाजार को यह संकेत लेना चाहिए कि एमपीसी अब मुक्त है। एमपीसी वह कर सकती है, जो उचित होगा।

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First Published - April 25, 2022 | 12:48 AM IST

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