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रुपये के अवमूल्यन से राजकोषीय चूक नहीं

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Last Updated- December 11, 2022 | 3:06 PM IST

केंद्र सरकार की राजकोषीय स्थिति वित्त वर्ष 2023 में रूस से मिल रहे सस्ते कच्चे तेल और नॉमिनल जीडीपी के रूढ़िवादी अनुमान के कारण सुरक्षित बनी रह सकती है, भले ही गुरुवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 80.86 के निचले स्तर पर पहुंच गया है।
 सैद्धांतिक तौर पर देखें तो रुपये में गिरावट से कच्चे तेल और उर्वरक का आयात महंगा हो जाता है। सरकार अंतिम उपभोक्ताओं को रसोई गैस और उर्वरक सब्सिडी वाली दरों पर मुहैया कराती है, इसके कारण सरकार का सब्सिडी बिल बढ़ सकता है।

डॉ. बीआर आंबेडकर स्कूल आफ इकनॉमिक्स यूनिवर्सिटी में कुलपति एनआर भानुमूर्ति का कहना है कि रुपये में गिरावट के बावजूद सरकार का सब्सिडी बिल बहुत ज्यादा बढ़ने नहीं जा रहा है, क्योंकि तेल की कीमत में गिरावट हो रही है। उन्होंने कहा, ‘साथ ही भारत सस्ती कीमत पर रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है। मुझे नहीं लगता कि सब्सिडी बिल में कोई बदलाव होगा।’सस्ता कच्चा तेल मिलने की वजह से रूस इस समय भारत का पेट्रोलियम का तीसरा बड़ा स्रोत बन गया है।
अप्रैल जुलाई अवधि के दौरान इराक औऱ सऊदी अरब ही इससे आगे रहे हैं। बुधवार को जारी एक रिसर्च नोट में आईडीएफसी बैंक में भारत की अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार का व्यय बजट वित्त वर्ष 23 में 2.7 लाख करोड़ रुपये बढ़ सकता है। उन्होंने कहा, ‘गैस की कीमत (इनपुट लागत) बढ़ने और रूस-यूक्रेन युद्ध के संकट की वजह से आपूर्ति में बाधा होने से उर्वरक सब्सिडी बजट अनुमान की तुलना में 1.25 लाख करोड़ रुपये बढ़ सकती है। 

वहीं तेल विपणन कंपनियों को लागत से कम पैसे मिलने की वजह से एलपीजी सब्सिडी भी बजट अनुमान से 200 अरब डॉलर बढ़ सकती है। मनरेगा का व्यय भी बजट अनुमान से बढ़ने की संभावना है।’मुफ्त खाद्यान्न योजना बढ़ाए जाने को लेकर मीडिया में आ रही खबरों को लेकर सेन गुप्ता ने कहा कि पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना आगे 6 महीने और बढ़ाने से 800 अरब रुपये अतिरिक्त लागत पड़ सकती है।
इस तरह से खाद्य सब्सिडी बजट आवंटन की तुलना में वित्त वर्ष 23 में 980 अरब रुपये अधिक हो सकती है। सरकार ने वित्त वर्ष 23 में नॉमिनल जीडीपी का 11.1 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान लगाया है, वहीं आईडीएफसी बैंक ने इसे जीडीपी का 16.5 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान लगाया है।

बैंक ऑफ बड़ौदा में मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि अगर रुपया 80 से नीचे बना रहता है तो आयात की लागत बढ़ेगी और इससे सीमा शुल्क का संग्रह बढ़ेगा। उन्होंने कहा, ‘ईंधन की लागत बढ़ेगी। कच्चे तेल की कीमत कम हो रही है, इसलिए इसका बोझ घटने की उम्मीद है। उर्वरक सब्सिडी बढ़े स्तर पर रह सकती है।
कुल मिलाकर आयात का खर्च बढ़ने से जीएसटी संग्रह भी बढ़ेगा, क्योंकि इससे अंतिम उत्पाद की कीमत बढ़ेगी।’महिंद्रा समूह में मुख्य अर्थशास्त्री सच्चिदानंद शुक्ल ने कहा कि इसका कोई सीधा जवाब नहीं है कि रुपये के अवमूल्यन से राजकोषीय चूक बढ़ेगी। 

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First Published - September 23, 2022 | 10:58 PM IST

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