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सितंबर में तेज रफ्तार के बाद उधारी की रफ्तार थमी; जमा में भी कमी, जबकि वार्षिक ऋण वृद्धि मामूली बढ़कर 11.5% हुई

Last Updated- November 03, 2025 | 9:16 AM IST
Bank Loan
Representational Image

सितंबर के अंत तक वितरण में मजबूत वृद्धि के बाद अक्टूबर के पहले पखवाड़े में बैंक ऋणों में कमी आई है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों से पता चला है कि 11 जुलाई को समाप्त पखवाड़े के बाद ऐसा पहली बार हुआ है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक 17 अक्टूबर 2025 को समाप्त पखवाड़े में बैंक ऋणों में 49,468 करोड़ रुपये की कमी आई है, हालांकि सालाना आधार पर वृद्धि मामूली बढ़कर 11.5 प्रतिशत हो गई, जबकि एक पखवाड़ा पहले यह 11.4 प्रतिशत थी।

जमा में भी कमी आई है और यह 2.15 लाख करोड़ रुपये रह गया। इसमें भी सालाना आधार पर 9.5 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि एक पखवाड़ा पहले वृद्धि दर 9.9 प्रतिशत थी। इसके पहले के तीन पखवाड़ों में बैंक ऋण 6 लाख करोड़ रुपये बढ़ा है, जिससे त्योहारों के दौरान मजबूत मांग का पता चलता है। बैंकों द्वारा उधारी दर कम किए जाने और 22 सितंबर से जीएसटी में कमी किए जाने का असर पड़ा है।

उद्योगों को ऋण 7.3 प्रतिशत बढ़ा

भारतीय रिजर्व बैंक ने ऋण की मांग को बढ़ावा देने के लिए इस साल फरवरी से नीतिगत रीपो रीपो दर में 100 आधार अंक की कमी करके 5.5 प्रतिशत कर दिया है। क्षेत्रवार दिए गए ऋण के भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक सिंतबर के अंत में समाप्त पखवाड़े में उद्योगों को ऋण सालाना आधार पर 7.3 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों की ऋण वृद्धि 2 अंकों में बनी रही।

खुदरा ऋण में 11.7 प्रतिशत वृद्धि

खुदरा ऋण में सालाना आधार पर 11.7 प्रतिशत वृद्धि हुई है, जबकि एक साल पहले 13.4 प्रतिशत वृद्धि हुई थी। वाहन ऋण और क्रेडिट कार्ड पर बकाया व अन्य खुदरा ऋण बढ़ने के कारण ऐसा हुआ है। सामान्यतया कारोबारी लक्ष्य पूरा करने के लिए बैंक किसी भी तिमाही के अंतिम पखवाड़े में अपनी बैलेंस शीट बढ़ाते हैं। एक निजी बैंक के ट्रेजरी प्रमुख ने कहा, ‘तिमाही या आधे साल के आखिर में सामान्यतया बैंक अपनी बैलेंस शीट में वृद्धि दिखाना चाहते हैं। यही वजह है कि इस वक्त जमा और ऋण में उल्लेखनीय वृद्धि नजर आती है। तिमाही के आखिर में वृद्धि धीमी हो जाती है।’

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First Published - November 3, 2025 | 9:16 AM IST

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