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गैस पाइपलाइन के लिए एकीकृत शुल्क 1 अप्रैल से

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Last Updated- March 15, 2023 | 11:25 PM IST
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एक दर्जन से अधिक गैस पाइपलाइन से मिलकर बने राष्ट्रीय गैस ग्रिड की पाइपलाइन 1 अप्रैल से एकीकृत शुल्क ढांचे के तहत आएंगी। यह जानकारी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) के अधिकारी ने मंगलवार को दी।

यह एकीकृत शुल्क ‘एक देश, एक ग्रिड और एक टैरिफ’ के सिद्धांत पर कार्य करेगा। पीएनजीआरबी के बोर्ड के सदस्य एके तिवारी ने पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री के अंतरराष्ट्रीय एलएनजी कॉन्क्लेव में कहा कि लंबी दूरी तक और कई पाइपलाइनों के जरिये ईंधन को लेकर जाने वाले ग्राहकों को एकीकृत शुल्क से फायदा होगा।

वर्तमान समय में उपभोक्ताओं को कई पाइपलाइनों और परस्पर जुड़ी पाइपलाइनों का इस्तेमाल करने पर अतिरिक्त शुल्क अदा करना पड़ता है। इसका परिणाम यह होता है कि तट से अधिक दूरी पर लेकर जाने पर उपभोक्ताओं को अधिक शुल्क अदा करना पड़ता है जबकि कम दूरी पर लेकर जाने पर कम शुल्क अदा करना पड़ता है। लिहाजा इस क्षेत्र के नियामक ने एकीकृत शुल्क को आसान बनाने के लिए इकाई स्तर पर समन्वित प्राकृतिक गैस पाइपलाइन के शुल्क की शुरुआत की।

शुल्क के इस नए तरीके में खरीदार को तीन क्षेत्रों तक गैस लेकर जाने पर निर्धारित शुल्क वसूला जाएगा जबकि पहले यह दो क्षेत्रों तक ही सीमित था। तिवारी ने बताया कि इसके तहत स्रोत (गैस फील्ड या एलएनजी आयात टर्मिनल) से 300 किलोमीटर, 300 -1200 किलोमीटर और 1200 किलोमीटर हैं। उन्होंने बताया, ‘‘पहले क्षेत्र में वर्तमान शुल्क के करीब बराबर ही शुल्क रहेगा।

दूसरे क्षेत्र में शुल्क जोड़े जाने वाले शुल्क से कम होगा और तीसरे क्षेत्र में जोड़े जाने वाले शुल्क से कहीं कम शुल्क होगा।’’ हालांकि पहले पीएनजीआरबी ने कहा था कि पहले क्षेत्र का शुल्क दूसरे क्षेत्र के शुल्क का 40 फीसदी होगा। हालांकि इसमें सरकार ने कई संशोधनों को शामिल किया जैसे कितनी भी गैस को अनुमति, मोराटोरियम अवधि और कंपनी की अधिकतम क्षमता के उपयोग को शामिल किया गया।

एकीकृत शुल्क योजना का हिस्सा पाइलपाइन होंगी। इस योजना में राज्य संचालित गेल इंडिया संचालित हजीरा-बिजयपुर-जगदीशपुर (एचबीजे) और उसकी सहायक दहेज- विजयपुर लाइन और दहेज (गुजरात) से उरण-दाभोल-पनवेल (महाराष्ट्र) पाइपलाइन हैं।

इस योजना में रिलायंस इंडस्ट्रीज की आनुषांगिक द्वारा संचालित शहडोल –फूलपुर लाइन होगी। यह लाइन सीबीएम ब्लॉक में है। यह लाइन मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश तक है। इसी तरह रिलायंस इंडस्ट्रीज के पूर्व स्वामित्व वाली पूर्व-पूर्व पाइपलाइन भी होगी जो आंध्र प्रदेश के काकीनाड़ा से गुजरात के भरूच तक है।

वर्तमान समय में देश में 35,000 किलोमीटर की प्राकृतिक गैस पाइपलाइन पर काम जारी है जबकि उपयोग में 23,000 किलोमीटर पाइपलाइन है। लिहाजा अगले चार-पांच साल में प्राकृतिक गैस मिशन साकार हो पाएगा। प्राकृतिक गैस की मात्रा में कमी और पाइपलाइन की कम उपयोगिता एक चुनौती बरकरार रहेगी। तिवारी के मुताबिक, ‘‘देश में किसी भी पाइपलाइन का उपयोग करीब 40 फीसदी है। कुछ मामलों में पाइपलाइन का इस्तेमाल 10 फीसदी है।’’

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First Published - March 15, 2023 | 11:25 PM IST

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