facebookmetapixel
Advertisement
1 अप्रैल 2026 से बदलेगा Gold-Silver ETF के कैलकुलेशन का फॉर्मूला, निवेशकों के लिए अहम अपडेट6 महीने में 50% चढ़ा प्राइवेट बैंक शेयर, एमके ग्लोबल ने अब टारगेट बढ़ाकर ₹390 कियाExplained: 2011-12 गया, 2022-23 आया… नई GDP सीरीज से क्या होगा असर?₹57,000 करोड़ के बाजार पर असर! बिहार के नए कानून से हिले स्मॉल फाइनेंस बैंकों के शेयरपेट्रोल से 43% सस्ती CNG का फायदा किसे? महानगर गैस या IGL… ब्रोकरेज के टारगेट जान लेंGaudium IVF IPO की बाजार में सकारात्मक शुरुआत, 5% प्रीमियम के साथ ₹83 पर लिस्ट हुए शेयरGold Silver Price Today: एमसीएक्स पर सोना ₹1.60 लाख और चांदी 2.66 लाख रुपये के करीब, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेजीडिजिटल युग का असर? भारतीय युवाओं की मानसिक सेहत पर बढ़ रहा दबावहवाई यात्रियों को बड़ी राहत, 48 घंटे तक फ्री कैंसलेशन; रिफंड की समयसीमा भी तयभारत-इजरायल ने 16 समझौतों पर किए हस्ताक्षर, AI-रक्षा समेत कई क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई

देश की दूसरी तिमाही में GDP ग्रोथ घटकर 6.5 प्रतिशत होने के आसार : ICRA

Advertisement

भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2024-25 के लिए आर्थिक वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जो 2023-24 के 8.2 प्रतिशत से कम है।

Last Updated- November 20, 2024 | 2:57 PM IST
GDP Growth Rate

भारी बारिश और कमजोर कॉर्पोरेट प्रदर्शन के कारण जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि घटकर 6.5 प्रतिशत रहने के आसार हैं। घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) ने हालांकि वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी छमाही (अक्टूबर 2024-मार्च 2025) में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद के बीच समूचे वित्त वर्ष के लिए वृद्धि दर का अनुमान सात प्रतिशत पर बरकरार रखा है। यह अनुमान और टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब शहरी मांग में कमी जैसे अनेक कारकों के कारण वृद्धि में मंदी की चिंताएं हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2024-25 के लिए आर्थिक वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जो 2023-24 के 8.2 प्रतिशत से कम है। दूसरी तिमाही की आर्थिक गतिविधि के आधिकारिक आंकड़े 30 नवंबर को जारी होने की उम्मीद है। पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में जीडीपी वृद्धि 6.7 प्रतिशत रही थी।

इक्रा ने कहा कि दूसरी तिमाही में गिरावट भारी बारिश और कमजोर कॉर्पोरेट प्रदर्शन जैसे कारकों के कारण होगी। उसने काह, ‘‘हालांकि सरकारी व्यय और खरीफ की बुवाई से सकारात्मक रुझान हैं, लेकिन औद्योगिक क्षेत्र खासकर खनन तथा बिजली में मंदी आने के आसार हैं।’’

Also read: कुछ जिंसों के कारण बढ़ी रिटेल महंगाई: CEA अनंत नागेश्वरन

रेटिंग एजेंसी की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ‘‘वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही में आम चुनाव के बाद पूंजीगत व्यय में वृद्धि के साथ-साथ प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई में भी अच्छी वृद्धि देखी गई। भारी वर्षा के कारण कई क्षेत्रों को प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जिससे खनन गतिविधि, बिजली की मांग और खुदरा ग्राहकों की संख्या प्रभावित हुई और व्यापारिक निर्यात में भी कमी आई।’’

उन्होंने कहा कि अच्छे मॉनसून का फायदा आगे मिलेगा तथा खरीफ उत्पादन में वृद्धि तथा जलाशयों के पुनः भरने से ग्रामीण मांग में निरंतर सुधार होने की संभावना है। मुख्य अर्थशास्त्री ने कहा, ‘‘हम निजी उपभोग पर व्यक्तिगत ऋण वृद्धि में मंदी के प्रभाव के साथ-साथ जिंस की कीमतों और बाह्य मांग पर भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रभाव पर भी नजर रख रहे हैं।’’

Advertisement
First Published - November 20, 2024 | 2:57 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement