facebookmetapixel
सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स किसी रोलर-कोस्टर से कम नहीं, 2026 के लिए एक्सपर्ट्स ने बताई निवेश की स्ट्रैटेजीतरुण गर्ग बने ह्युंडै मोटर इंडिया के MD & CEO, पहली बार भारतीय को मिली कमानरुपये की कमजोरी, बाजार की गिरावट का असर; 2025 में सिमटा भारत के अरबपतियों का क्लबVodafone Idea Share: 50% टूट सकता है शेयर, ब्रोकरेज ने चेताया; AGR मामले में नहीं मिली ज्यादा राहत2026 में 1,00,000 के पार जाएगा सेंसेक्स ? एक्सपर्ट्स और चार्ट ये दे रहे संकेतसिगरेट पर एडिशनल एक्साइज ड्यूटी, 10% तक टूट ITC और गोडफ्रे फिलिप्स के शेयर; 1 फरवरी से लागू होंगे नियमहोटलों को एयरलाइंस की तरह अपनाना चाहिए डायनेमिक प्राइसिंग मॉडल: दीक्षा सूरीRBI की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट, क्रिप्टो पर सतर्कता; CBDC को बढ़ावाउभरते आर्थिक दबाव के बीच भारतीय परिवारों का ऋण बढ़ा, पांच साल के औसत से ऊपरनया साल 2026 लाया बड़े नीतिगत बदलाव, कर सुधार और नई आर्थिक व्यवस्थाएं

कुछ जिंसों के कारण बढ़ी रिटेल महंगाई: CEA अनंत नागेश्वरन

इस साल की आर्थिक समीक्षा में सुझाव दिया गया था कि भारत के महंगाई को लक्षित करने के ढांचे से खाद्य महंगाई को अलग किया जाना चाहिए।

Last Updated- November 19, 2024 | 10:20 PM IST
Chief Economic Advisor V. Anantha Nageswaran

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने मंगलवार को कहा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई दर में हाल में आई तेजी कुछ चुनिंदा जिंसों की वजह से है।

नागेश्वरन ने कहा कि टमाटर, प्याज, आलू (टॉप) और सोना, चांदी की कीमतों को गणना से निकाल दें तो समग्र खुदरा महंगाई दर अक्टूबर में महज 4.2 प्रतिशत है। सीपीआई बॉस्केट में इसका अधिभार महज 3.4 प्रतिशत है, जिसकी हिस्सेदारी 6.2 प्रतिशत महंगाई दर में एक तिहाई है।

भारतीय स्टेट बैंक के सालाना बिजनेस ऐंड इकनॉमिक कॉन्क्लेव में बोलते हुए मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा, ‘हमें पता है कि सीपीआई कुछ जिंसों से बहुत ज्यादा प्रभावित है। अगर आप टमाटर, प्याज, आलू, सोने और चांदी को इसमें से निकाल दें तो समग्र खुदरा महंगाई दर 4.2 प्रतिशत है। इनका कुल अधिभार 3.4 प्रतिशत है, लेकिन अक्टूबर की 6.2 प्रतिशत महंगाई दर में इनका हिस्सा एक तिहाई है।’

इस साल की आर्थिक समीक्षा में सुझाव दिया गया था कि भारत के महंगाई को लक्षित करने के ढांचे से खाद्य महंगाई को अलग किया जाना चाहिए।

भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने जोर दिया कि मौद्रिक नीति एक अल्पकालिक व्यापक समग्र मांग प्रबंधन का साधन है, जो आपूर्ति संबंधी झटकों का प्रबंधन नहीं कर सकता है और खाद्य से जुड़े झटके मुख्य रूप से आपूर्ति संबंधी झटके हैं।

First Published - November 19, 2024 | 10:03 PM IST

संबंधित पोस्ट