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आ गई Steel Sector पर बड़ी रिपोर्ट; बता दिया Trump Tariff का क्या होगा असर 

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वर्तमान में अमेरिका को लगभग USD 5 billion/ 43,000 करोड़ रुपये मूल्य के स्टील, एल्यूमिनियम और संबंधित उत्पाद निर्यात होता है।

Last Updated- June 02, 2025 | 6:15 PM IST
Steel sector
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा स्टील और एल्यूमिनियम आयात पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाने के प्रस्ताव से भारत के इंजीनियरिंग वस्तुओं के निर्यात पर गहरा असर पड़ सकता है। यह चेतावनी इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद (EEPC India) ने दी है।

EEPC के अनुसार, स्टील, एल्यूमिनियम और इनसे जुड़े उत्पाद अमेरिका को होने वाले भारत के कुल इंजीनियरिंग निर्यात का लगभग 25% हिस्सा हैं। वर्तमान में भारत अमेरिका को लगभग 5 अरब अमेरिकी डॉलर (USD 5 billion) मूल्य के स्टील, एल्यूमिनियम और संबंधित उत्पाद निर्यात करता है।

 

Steel Companies के लिए मुश्किल होता जा रहा US Market 

EEPC ने बताया कि अमेरिका द्वारा 18 मार्च 2025 को स्टील आयात पर 25% टैरिफ लागू किए जाने के बाद से ही भारतीय निर्यातकों के लिए वहां का बाजार कठिन होता जा रहा है। भले ही भारत का सीधा स्टील निर्यात अमेरिका को सीमित हो, लेकिन इन टैरिफ ने वैश्विक प्रतिस्पर्धा को तेज कर दिया है और व्यापार प्रवाह (Trade Flows) को प्रभावित किया है।

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इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद (EEPC India) Chief ने क्या कहा

EEPC इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा, “यदि अमेरिका स्टील, एल्यूमिनियम और इनसे जुड़े उत्पादों पर 50% आयात शुल्क लागू करता है, तो इन महत्वपूर्ण उत्पादों का निर्यात महंगा हो जाएगा, जिससे निर्यात में गिरावट आ सकती है।”

उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में यूके को अमेरिका से छूट (exemption) मिल गई है, जिससे वह 25% टैरिफ से मुक्त हो गया है। इसी प्रकार भारत को भी द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement – BTA) की वार्ताओं के दौरान छूट की मांग करनी चाहिए।

“इस समय ऐसे एकतरफा शुल्क लागू करना सही नहीं है, खासकर जब भारत-अमेरिका BTA वार्ता चल रही है। यह वार्ताओं को जटिल बना सकता है और भारत के लिए लगभग USD 5 अरब मूल्य के इंजीनियरिंग निर्यात को खतरे में डाल सकता है,” चड्ढा ने जोड़ा।

 

क्या हो भारत की Steel Sector के लिए रणनीति

  • अमेरिका के साथ चल रही BTA वार्ता में टैरिफ से छूट को शामिल करना।
  • राजनयिक स्तर पर प्रयास कर यह स्पष्ट करना कि भारत का व्यापार अमेरिका के हितों के अनुकूल है।
  • निर्यातकों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए वैकल्पिक बाजारों की खोज करना।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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First Published - June 2, 2025 | 6:06 PM IST

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