facebookmetapixel
वेनेजुएला संकट: भारत के व्यापार व तेल आयात पर भू-राजनीतिक उथल-पुथल से फिलहाल कोई असर नहींसोमनाथ मंदिर: 1026 से 2026 तक 1000 वर्षों की अटूट आस्था और गौरव की गाथाT20 World Cup: भारत क्रिकेट खेलने नहीं आएगी बांग्लादेश की टीम, ICC से बाहर मैच कराने की मांगसमान अवसर का मैदान: VI को मिलने वाली मदद सिर्फ उसी तक सीमित नहीं होनी चाहिए1985–95 क्यों आज भी भारत का सबसे निर्णायक दशक माना जाता हैमनरेगा भ्रष्टाचार का पर्याय बना, विकसित भारत-जी राम-जी मजदूरों के लिए बेहतर: शिवराज सिंह चौहानLNG मार्केट 2025 में उम्मीदों से रहा पीछे! चीन ने भरी उड़ान पर भारत में खुदरा बाजार अब भी सुस्त क्यों?उत्पाद शुल्क बढ़ते ही ITC पर ब्रोकरेज का हमला, शेयर डाउनग्रेड और कमाई अनुमान में भारी कटौतीमझोले और भारी वाहनों की बिक्री में लौटी रफ्तार, वर्षों की मंदी के बाद M&HCV सेक्टर में तेजीदक्षिण भारत के आसमान में नई उड़ान: अल हिंद से लेकर एयर केरल तक कई नई एयरलाइंस कतार में

Thali cost: अब सिर्फ ₹27 में भरपेट खाना, जून में क्यों सस्ती हुई आपकी थाली, जानिए वजह

Crisil की रिपोर्ट के मुताबिक जून में वेज और नॉन-वेज थाली 6-8% तक सस्ती हुई

Last Updated- July 08, 2025 | 1:22 PM IST
Veg thali cost rises 11%, non-veg thali falls 2% in Sept 2024: Crisil

Crisil इंटेलिजेंस की नई रिपोर्ट ‘रोटी-चावल रेट’ के मुताबिक, जून 2025 में घर पर बनने वाली वेज और नॉन-वेज थालियों की कीमत पिछले साल की तुलना में कम हो गई। इसकी सबसे बड़ी वजह टमाटर, आलू और प्याज जैसे ज़रूरी सब्जियों के दामों में भारी गिरावट रही।

जून 2024 की तुलना में इस बार जून में एक वेजिटेरियन थाली की कीमत औसतन 8 फीसदी कम रही। टमाटर के दाम में 24%, आलू में 20% और प्याज में 27% की गिरावट दर्ज की गई। पिछले साल फसल में बीमारी, खराब मौसम और रबी सीज़न में प्याज की खेती कम होने से दाम चढ़ गए थे। लेकिन इस साल सप्लाई सुधरने और अच्छी पैदावार से कीमतें नीचे आईं।

नॉन-वेज थाली भी 6% सस्ती, चिकन के दाम गिरे

नॉन-वेज थाली की कीमत में भी करीब 6 फीसदी की गिरावट आई है। इसका मुख्य कारण ब्रॉयलर चिकन के दामों में 3 फीसदी की कमी है। नॉन-वेज थाली में चिकन का हिस्सा करीब आधा होता है, इसलिए इसकी कीमत गिरने से थाली सस्ती हो गई। हालांकि खाने में इस्तेमाल होने वाला तेल और रसोई गैस महंगी हुई है। एक साल में खाने के तेल के दाम 19% बढ़े हैं, जबकि सरकार ने इम्पोर्ट ड्यूटी घटाई थी। लेकिन इसका फायदा ग्राहकों तक पूरी तरह नहीं पहुंचा। साथ ही एलपीजी सिलेंडर की कीमत भी 6% बढ़ गई, जिससे खाना बनाने का खर्च बढ़ा और थाली की कुल बचत कुछ हद तक कम हुई।

ALSO READ | बांग्लादेश को झटका: भारत ने घटाया जूट का आयात, अब घरेलू बाजार को मिलेगी प्राथमिकता

महीने भर में थाली फिर हुई थोड़ी महंगी

हालांकि सालाना तुलना में कीमतें घटी हैं, लेकिन मई से जून के बीच हल्का उलटा रुझान दिखा। जून में एक वेज थाली की औसत कीमत ₹26.3 से बढ़कर ₹27.1 हो गई यानी 3% की बढ़त। इसकी वजह टमाटर के दामों में 36% की उछाल रही, जो मंडियों में आवक 8% घटने के कारण हुआ। आलू के दाम भी 4% बढ़े, जबकि प्याज की कीमत स्थिर रही।

नॉन-वेज थाली जून में 4% महंगी

इसी दौरान नॉन-वेज थाली की कीमत में 4% की बढ़ोतरी हुई। इसका कारण गर्मी के कारण चिकन की सप्लाई कम होना है, जिससे ब्रॉयलर के दाम 5% चढ़ गए।

ALSO READ | भारत बनेगा बड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स हब! सरकार को मिला हजारों करोड़ का निवेश प्रस्ताव, मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगी रफ्तार

क्या है ‘रोटी-चावल रेट’?

रोटी-चावल रेट एक ऐसा इंडेक्स है जो देश के चारों हिस्सों – उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम – में घर की थाली के खर्च को ट्रैक करता है। इसमें अनाज, दालें, सब्जियां, मसाले, तेल और एलपीजी जैसे मुख्य सामानों की कीमत शामिल होती है। इससे थाली की लागत में होने वाले क्षेत्रीय बदलावों को समझा जा सकता है। एक वेज थाली में रोटी, चावल, दाल, सब्जी, दही और सलाद होता है। जबकि नॉन-वेज थाली में दाल की जगह चिकन शामिल होता है।

First Published - July 8, 2025 | 1:22 PM IST

संबंधित पोस्ट