नए ऑर्डर में तेज बढ़ोतरी और कारोबारी गतिविधियां बढ़ने से भारत का सेवा क्षेत्र अगस्त महीने में तेजी से बढ़ा है, जो जुलाई में 4 माह के निचले स्तर पर था। इस क्षेत्र में पिछले 14 साल में नौकरियों का सृजन सबसे तेज रहा है।
सर्विस पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) अगस्त महीने में बढ़कर 57.2 पर पहुंच गया, जो जुलाई में 55.5 पर था। 50 से ऊपर सूचकांक गतिविधियों में तेजी और इससे नीचे संकुचन को दिखाता है।
एसऐंडपी ग्लोबल ने अपने सर्वे में कहा है कि नए कारोबार में मजबूत बढ़ोतरी, मांग में जारी सुधार, नौकरियों के सृजन, ओवरटाइम की वजह से मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। एसऐंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस में इकनॉमिक्स एसोसिएट डायरेक्टर पॉलियाना डी लीमा ने कहा, ‘दूसरी वित्तीय तिमाही में भारत में सेवा गतिविधियों में मजबूत वृद्धि हुई और जुलाई में खोई कुछ जमीन हासिल हुई है।’
लीमा ने कहा कि वृद्धि में तेजी नए कारोबार मिलने की वजह से आई है क्योंकि फर्मों को कोविड-19 के प्रतिबंध हटने से लाभ मिला है।
सर्वे से पता चलता है कि मांग की स्थिति बेहतर रहने और विज्ञापन की वजह से नए कारोबार में और वृद्धि हुई है, जिससे अगस्त में सेवा फर्मों का कारोबार बढ़ा है। लीमा ने मांग वापसी से सेवा प्रदातों की क्रय शक्ति बढ़ी है और बढ़ी लागत को वे बिक्री मूल्य में डालने में सफल हुई हैं। लीमा ने कहा, ‘महंगाई की दर व्यापक रूप से जुलाई के समान ही थी, लेकिन इनपुट लागत में तेजी कम हुई है।’
खाद्य, ईंधन और श्रम लागत बढ़ने के कारण आंकड़ों से सेवा कंपनियों के परिचालन व्यय में एक और बढ़ोतरी का पता चलता है, भले ही महंगाई दर 11 महीने के निचले स्तर पर आ गई है। कीमतों में बढ़ोतरी के असर से मुनाफे को बचाने के लिए कंपनियों ने अगस्त में विक्रय मूल्य में बढ़ोतरी की है, जिसे समावेशी मांग की स्थितियों से लाभ मिला है। बिक्री तेज रहने और वृद्धि के बेहतर अनुमानों के कारण पेरोल के आंकड़ों में सेवा क्षेत्र में तेजी आई है।
सर्वे में पाया गया है कि नौकरियों के सृजन की दर 14 साल में सबसे तेज रही है। परिवहन, सूचना एवं संचार, वित्त एवं बीमा क्षेत्र में नए कारोबार में तेज बढ़ोतरी हुई है। उपभोक्ता और रियल एस्टेट और बिजनेस सर्विसेज में तेज दर से बढ़ोतरी हुई है, लेकिन वित्त एवं बीमा, परिवहन, सूचना और संचार शुल्क में मंदी आई है।