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निर्मला सीतारमण बोलीं- AI तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए इसको लेकर नियम बनाने में तेजी लाने की जरूरत

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उन्होंने कहा कि नियामक तंत्र का रुख नरम होना चाहिए, जिससे तकनीक खत्म न हो और एआई के इस्तेमाल से शहरों व शहरी इलाकों को बेहतर बनाया जा सके

Last Updated- September 15, 2025 | 10:26 PM IST
Nirmala Sitharaman
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण | फाइल फोटो

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि विश्व में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) तेजी से बढ़ रहा है और ऐसे में विनियमन को तकनीक के साथ तालमेल बिठाने के साथ आम जनता की भलाई के लिए इसे नियंत्रण में रखना होगा। उन्होंने कहा कि नियामक तंत्र का रुख नरम होना चाहिए, जिससे तकनीक खत्म न हो और एआई के इस्तेमाल से शहरों व शहरी इलाकों को बेहतर बनाया जा सके।

नीति आयोग की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा, ‘अगर तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है, तो नियमन भी तेजी से होना चाहिए। हम ऐसा नियमन नहीं चाहते जो तकनीक को ही पूरी तरह से खत्म कर दे। हम नियमन इसलिए चाहते हैं क्योंकि हम जिम्मेदारी से इसका इस्तेमाल करना चाहते हैं।’

मानवता को लाभ पहुंचाने के लिए एआई की शक्ति की तुलना एक असुर को दिए गए वरदान से करते हुए सीतारमण ने कहा, ‘कोई भी अच्छाई कभी भी बिना किसी शर्त के नहीं होती, कोई भी अच्छाई कभी भी अपने आप में अच्छी नहीं होती। हम सभी को इसका उपयोग इस तरह से करना चाहिए कि इससे सबको लाभ मिल सके।’

वित्त मंत्री ने एआई  के बारे में कार्यबल को कुशल बनाने की आवश्यकता पर बल दिया, क्योंकि खतरा है कि इससे 80 प्रतिशत लोग नौकरी से बाहर हो जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि आप एआई से संचालित कौशल वृद्धि कार्यक्रमों की दिशा में सोचने को तैयार हैं, जिस पर मैं सरकार से और इनपुट चाहूंगी। सीतारमण ने कहा कि उद्योग द्वारा एआई को अपनाना बेहद जरूरी है और कई लोग ऐसा कर भी रहे हैं, लेकिन एआई के लिए तैयार मानव संसाधन की कमी है। वित्त मंत्री ने कहा, ‘आज उद्योग जगत कहता है कि ठीक है, आप बेरोजगारी की बात कर रहे हैं, लेकिन हमें ऐसे लोग तो दीजिए जो एआई के लिए तैयार हों।’

औद्योगिक प्रशिक्षण पहल को उन्नत बनाने की सरकार की पहल का उल्लेख करते हुए सीतारमण ने कहा कि जब तक ट्रेनिंग सेंटरों को पर्याप्त रूप से उपकरणों से समृद्ध नहीं किया जाता है, वहां प्रमाणपत्र लेने वाले वह प्रशिक्षण नहीं हासिल कर पाएंगे, जैसा रोजगार देने वाले चाहते हैं।

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First Published - September 15, 2025 | 10:26 PM IST

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