facebookmetapixel
Advertisement
New rules from July 1: पासपोर्ट महंगा, आधार अपडेट मुफ्त! 1 जुलाई से लागू होंगे ये बड़े बदलाव, जानिए किस पर कितना असरTata पर साइबर हमले के बाद iPhone 18 Pro की तस्वीरें और सप्लायर लिस्ट लीक, Apple की बढ़ी चिंताIOC शेयर रखने वालों के लिए जरूरी खबर! कंपनी ने फाइनल डिविडेंड की रिकॉर्ड डेट घोषित कीMSME, स्किल डेवलपमेंट और विदेशी निवेश पर फोकस, यूपी को बड़ा निवेश हब बनाने में जुटी सरकार: नितिन अग्रवालPFC-REC Merger: शेयरों में किया है निवेश, तो कैसे होगा फायदा? नए निवेशक क्या करें?Aarogya Setu 2.0: घर बैठे मिलेगा हेल्थ रिकॉर्ड, डॉक्टर, OPD और आयुष्मान का फायदा; जानें 10 बड़े फीचर्सभारत में वॉटर क्राइसेस बनेगा ₹20 लाख करोड़ निवेश का मौकाICICI Bank Dividend: ICICI Bank के निवेशकों की होगी कमाई! बैंक ने तय की डिविडेंड रिकॉर्ड डेटSIS Share Buyback: ₹478 में खरीदेगी शेयर, 2017 के बाद पांचवीं बार होगा बायबैकभारत के सबसे बड़े IPO के पीछे कैसे तैयार हुआ मुकेश अंबानी का ‘Project Jupiter’? जानें Jio IPO की पूरी कहानी

Services sector: मई में सेवा क्षेत्र रहा पांच महीने में सबसे सुस्त

Advertisement

घरेलू मांग में कमी, तीव्र प्रतिस्पर्धा और मूल्य दबाव ने वृद्धि को धीमा किया।

Last Updated- June 05, 2024 | 10:46 PM IST
पहली बार होगा सर्विस सेक्टर का सर्वेक्षण, जीडीपी आधार वर्ष में संशोधन की तैयारी, साल के अंत तक आएंगे नतीजे Survey of service sector will be done for the first time, preparation for amendment in GDP base year, results will come by the end of the year

भारत में सेवा क्षेत्र की वृद्धि मई में पांच महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई। यह गिरावट घरेलू मांग कम होने के कारण आई। हालांकि निर्यात में इजाफा हुआ और नौकरियों का सृजन बेहतर हुआ है। एचएसबीसी के बुधवार को जारी सेवा क्षेत्र का पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) मई में गिरकर 60.2 आ गया था जबकि यह अप्रैल में 60.8 था।

इस सर्वेक्षण में कहा गया है, ‘मई के आंकड़ों के मुताबिक नए कारोबार में जबरदस्त वृद्धि होने के कारण भारत की सेवा अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में वृद्धि जारी रही। लेकिन एक साल पहले की तुलना में वृद्धि की रफ्तार सबसे कमजोर रही। इसका कारण अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, मूल्य का दबाव और भीषण गर्मी थी।’

मई का आंकड़ा लगातार 34वें महीने 50 अंक से ऊपर रहा। यह आंकड़ा जुलाई 2021 के बाद से 50 से ऊपर है। दरअसल 50 से ऊपर का आंकड़ा विस्तार यानी बढ़त और इससे कम का आंकड़ा इस क्षेत्र में गिरावट का सूचक है।

सर्वेक्षण में बताया गया है कि करीब एक दशक पहले सर्वेक्षण शुरू किए जाने के बाद से अब तक अंतरराष्ट्रीय मार्केट में नए ऑर्डर का विस्तार सबसे तेज गति से हुआ और कारोबारी आत्मविश्वास भी आठ महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।

एचएसबीसी की वैश्विक अर्थशास्त्री मैत्रेयी दास के अनुसार भारत में सेवा क्षेत्र की गतिविधियां मई में सुस्त गति से बढ़ीं और घरेलू नए ऑर्डर कुछ सुस्त रहे। हालांकि मांग मजबूत बनी रही जो यह दिखाता है कि विज्ञापन सफल रहे। दास के मुताबिक, ‘दुनिया भर में व्यापक मांग के साथ नए निर्यात ऑर्डर रिकॉर्ड गति से बढ़े।’

सर्वेक्षण के अनुसार मई में नए निर्यात के ऑर्डर में काफी सुधार हुआ और इसमें सितंबर 2014 के बाद शुरू हुए इस सर्वेक्षण के बाद सबसे तेज गति से वृद्धि हुई। सर्वे के साझेदारों ने इंगित किया कि एशिया, अफ्रीका, यूरोप, पश्चिम एशिया और अमेरिका से मांग में मजबूत वृद्धि हुई।

सर्वेक्षण के अनुसार मई में लागत का दबाव बढ़ गया था। इसका कारण यह था कि मांस, पैकेजिंग और सब्जियों के दाम बढ़ने के कारण सामग्री और श्रम की लागत बढ़ गई थी।

उन्होंने कहा, ‘कीमतों के मोर्चे पर, मई में लागत मूल्य बढ़ गया। लागत में इजाफे का कारण कच्चे माल और मजदूरी का मूल्य बढ़ना था। कंपनियों ने बढ़ी हुई लागत का कुछ बोझ ही ग्राहकों पर डाला। अच्छी खबर यह है कि आगामी वर्ष के परिदृश्य के बारे में आशावाद का स्तर आठ महीनों में सबसे तेज गति से बढ़ा। इससे नामचीन सेवा कंपनियों को अपने कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि करनी पड़ी थी।’

सर्वेक्षण ने रोजगार के बारे में बताया कि मांग की मजबूती और अतिरिक्त श्रम लागत की वजह से कुछ कंपनियों की उत्पादकता लागत बढ़ी। इसका कारण ओवरटाइम का भुगतान और वेतन वृद्धि था।

कुछ कंपनियों ने संकेत दिया कि उन्हें अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत पड़ी। सर्वेक्षण के अनुसार, ‘रोजगार में न सिर्फ उल्लेखनीय वृद्धि हुई बल्कि अगस्त 2022 के बाद से सबसे ज्यादा द्धि हुई। कंपनियों ने मई में कनिष्ठ और मध्यम स्तर के श्रमिकों की नियुक्ति की सूचना दी।’

Advertisement
First Published - June 5, 2024 | 10:46 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement