राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक भारत की खुदरा महंगाई दर दिसंबर में बढ़कर 3 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। खाद्य वस्तुओं की अवस्फीति कम होने और आधार का असर खत्म होने के कारण नवंबर के 0.71 प्रतिशत की तुलना में दिसंबर में महंगाई दर 1.33 प्रतिशत पर रही। मौजूदा आधार वर्ष 2012 के तहत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के यह आखिरी आंकड़े हैं। जनवरी और उसके बाद के सीपीआई के आंकड़े नए आधार वर्ष 2024 के मुताबिक आएंगे।
खुदरा महंगाई दर लगातार 2 महीने तक एक प्रतिशत से नीचे रही, उसके बाद दिसंबर में इसमें थोड़ी वृद्धि हुई है, क्योंकि खाद्य वस्तुओं की अवस्फीति नवंबर के 3.91 प्रतिशत की तुलना में कम होकर दिसंबर में 2.71 प्रतिशत रह गई है।
ग्रामीण भारत में खुदरा मूल्य में वृद्धि हुई है। एनएसओ के आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर में सीपीआई (ग्रामीण) 0.76 प्रतिशत रही, जो नवंबर में 0.1 प्रतिशत थी। शहरी खुदरा महंगाई भी बढ़कर 2.03 प्रतिशत हो गई, जो नवंबर में 1.4 प्रतिशत थी। ग्रामीण खाद्य कीमतें 3.08 प्रतिशत नीचे थीं, जबकि शहरी इलाकों में 2.09 प्रतिशत गिरीं।
मुख्य महंगाई दर, जिसमें उपभोक्ता बॉस्केट की ज्यादा उतार चढ़ाव वाली वस्तुएं जैसे खाद्य और ऊल्जा शामिल नहीं होती हैं, बढ़कर 27 महीने के उच्च स्तर 4.45 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो नवंबर में 4.23 प्रतिशत थी। कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी के कारण ऐसा हुआ है।
मुख्य महंगाई दर इसके पहले सितंबर 2023 में इस उच्च स्तर पर पहुंची थी, जब यह 4.55 प्रतिशत पर थी। त्योहारों की मांग के कारण सोने की महंगाई दर 68.66 प्रतिशत बढ़ी है, जबकि चांदी 97.07 प्रतिशत बढ़ी है। कीमती धातुओं जैसे सोना और चांदी को छोड़कर मुख्य खुदरा महंगाई दर में कोई बदलाव नहीं हुआ और यह 2.4 प्रतिशत पर स्थिर रही।
दिसंबर में कीमतों में वृद्धि भी भारतीय रिजर्व बैंक के महंगाई दर के 4 प्रतिशत (2 प्रतिशत घट-बढ़) के लक्ष्य के नीचे बनी रही। दिसंबर के आंकड़ों के साथ तीसरी तिमाही में सीपीआई का औसत 0.76 प्रतिशत रहा, जबकि केंद्रीय बैंक ने 0.6 प्रतिशत का अनुमान लगाया था।
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की दिसंबर में हुई बैठक में रीपो रेट में 25 आधार अंक की कटौती की थी। खुदरा महंगाई दर जहां महंगाई के लक्ष्य के निचले स्तर से नीचे बनी हुई है, वहीं अर्थशास्त्री एमपीसी द्वारा दरों में आगामी 4 से 6 फरवरी को होने वाली बैठक में कटौती की संभावना को लेकर अलग-अलग राय रखते हैं।
आनंद राठी ग्रुप में मुख्य अर्थशास्त्री और कार्यकारी निदेशक सुजन हाजरा ने कहा , ‘आधार के प्रतिकूल असर की वजह से महंगाई दर के आंकड़े आने वाले महीनों में बढ़ेंगे और यह रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत के लक्ष्य की ओर पहुंचेंगे।’ उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में रिजर्व बैंक द्वारा रीपो दर में 25 आधार अंक की और कटौती की जा सकती है। हालांकि अधिक कटौती तभी संभव है, जब जीडीपी वृद्धि दर के आंकड़े आश्चर्यजनक रूप से नीचे आएंगे।
इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि दिसंबर 2025 की एमपीसी की बैठक में फरवरी 2026 में दर में एक कटौती की संभावना बनी थी, लेकिन मौजूदा मोड़ पर यथास्थिति रखे जाने की संभावना है। उन्होंने कहा, ‘अद्यतन सीपीआई (आधार वर्ष 2024) और जीडीपी (आधार वर्ष 2022-23) के आंकड़े का इंतजार करना सही होगा, जो फरवरी में जारी होने हैं। इससे वृद्धि और महंगाई दर की स्थिति देखने और नई राय बनाने में सहूलियत होगी।’
केयरएज रेटिंग में मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा कि महंगाई दर के आंकड़े आगे 25 आधार अंक कटौती की जगह पैदा कर रहे हैं, लेकिन हम उम्मीद कर रहे हैं कि रिजर्व बैंक अभी यथास्थिति बरकरार रखेगा और नीतिगत गुंजाइश बनाए रखेगा।