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RBI का निर्णय उम्मीदों की अनुरूप, ब्याज दरों को यथावत रखना निरंतर ग्रोथ के लिए फायदेमंद: एक्सपर्ट्स

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RBI ने शुक्रवार को उम्मीद के अनुरूप लगातार पांचवीं बार नीतिगत दर रेपो में कोई बदलाव नहीं किया और इसे 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा।

Last Updated- December 08, 2023 | 6:37 PM IST
RBI

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का नीतिगत दर को यथावत रखने का फैसला उम्मीद के अनुरूप है और इसे लंबे समय तक यथावत रखना कॉरपोरेट इंडिया के साथ-साथ सतत वृद्धि के लिए अच्छा है। एक्सपर्ट्स ने यह बात कही है।

आरबीआई ने शुक्रवार को उम्मीद के अनुरूप लगातार पांचवीं बार नीतिगत दर रेपो में कोई बदलाव नहीं किया और इसे 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा। साथ ही अगले साल होने वाले आम चुनावों से पहले मुद्रास्फीति को लेकर अनिश्चित परिदृश्य के बीच चालू वित्त वर्ष के लिये आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया।

उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा कि आरबीआई का ध्यान महंगाई को काबू में लाने पर है। इसी को ध्यान में रखकर रेपो दर को 6.50 प्रतिशत पर कायम रखा गया है। यह सतत वृद्धि को लेकर अनुकूल परिवेश के मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के इरादे अनुरूप है।

एसोचैम के महासचिव दीपक सूद ने कहा, ‘‘हालांकि, पिछले कुछ महीनों से मुद्रास्फीति में गिरावट आ रही है लेकिन ऐसा लगता है कि आरबीआई इसे चार प्रतिशत के लक्ष्य पर लाने को लेकर दृढ़ है। इसने अबतक रुख को लेकर वैश्विक और घरेलू दोनों गतिविधियों पर सतर्क नजर रखी है। इससे निवेशकों, कर्ज लेने वाले और उपभोक्ताओं के बीच भरोसा बढ़ेगा। इसका कारण मौद्रिक नीति का ध्यान कीमत और वित्तीय स्थिरता पर है।’’

कोटक महिंद्रा बैंक की अध्यक्ष और कॉरपोरेट बैंक मामलों प्रमुख अनु अग्रवाल ने कहा कि सरकार के देश में निवेश को बढ़ावा देने, कंपनियों के बेहतर मुनाफे और बैंकों के गैर-निष्पादित संपत्तियों में कमी लाने को लेकर निरंतर प्रयासों से कच्चे माल की लागत के बावजूद निवेश में तेजी बनी रहेगी।

अग्रवाल ने कहा, ‘‘हमें यह भी उम्मीद है कि सेवा निर्यात में प्रदर्शन के दम पर भारत का निर्यात अच्छा रहेगा। वैश्विक स्तर पर चुनौतियों के कारण बढ़ती तेल की कीमतों और मुद्रास्फीति से निपटना चिंता का कारण बना हुआ है। हालांकि, रेपो दर पर लंबे समय तक रोक कंपनी जगत के लिए अच्छा रहेगी।’’

सीआईआई दिल्ली राज्य परिषद के अध्यक्ष और सैमटेल एवियोनिक्स के प्रबंध निदेशक तथा मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) पुनीत कौरा ने कहा कि नीतिगत दर को यथावत बनाए रखने का आरबीआई का निर्णय भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा है।

उन्होंने कहा, ‘‘इस कदम से, रियल एस्टेट और वाहन जैसे ब्याज से संबद्ध क्षेत्रों के अलावा, विनिर्माण और एमएसएमई क्षेत्र को भी काफी लाभ होगा। मुद्रास्फीति अब आरबीआई के लक्ष्य के दायरे में है। ऐसे में भविष्य में नीतिगत दर में कटौती की संभावना बन रही है।’’

एयू स्माल फाइनेंस बैंक (AU Small Finance Bank) के संस्थापक, प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी संजय अग्रवाल ने कहा, “मौद्रिक नीति समति (एमपीसी) के नीतिगत दर को अपरिवर्तित रखने का निर्णय हमारी उम्मीद के अनुरूप है और हम उसका स्वागत करते हैं। एमपीसी का ध्यान निश्चित ही लंबी अवधि में मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत पर लाने के लक्ष्य पर केंद्रित है। इससे सतत वृद्धि और वित्तीय स्थिरता के प्रति आरबीआई की प्रतिबद्धता का पता चलता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वैश्विक अस्थिरताओं के बावजूद, आरबीआई ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए जीडीपी का अनुमान 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया है, जोकि घरेलू वृद्धि के प्रति भरोसे को बताता है…।’’

श्रीराम फाइनेंस के कार्यकारी उपाध्यक्ष उमेश रेवनकर ने कहा, ‘‘हालांकि, सकल (हेडलाइन) मुद्रास्फीति पिछली तिमाही में कम हुई है… उम्मीद के अनुरूप एमपीसी ने एक बार फिर नीतिगत दर को पहले के स्तर पर बनाए रखने का निर्णय लिया है और उदार रुख को वापस लेने पर ध्यान देने का फैसला बरकरार रखा है।’’

उन्होंने कहा कि मौद्रिक समीक्षा में फिनटेक (वित्तीय प्रौद्योगिकी) के लिए रिपॉजिटरी और संबद्ध इकाइयों के बीच कर्ज (कनेक्टेड कर्ज)के लिए नियामकीय कदम जैसे उपाय प्रगतिशील कदम हैं।

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First Published - December 8, 2023 | 6:37 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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