facebookmetapixel
पान मसाला कंपनियों पर सख्ती: 1 फरवरी से रजिस्ट्रेशन, मशीन पर अलग टैक्स व फैक्ट्री में CCTV जरूरीघर में कितना सोना रखना लीगल? जानिए नियमनिर्यातकों को बड़ी राहत: MSME एक्सपोर्टर्स को सस्ता लोन और गारंटी सपोर्ट के लिए ₹7,295 करोड़ का पैकेजSIP Investment: ₹2,000 की मंथली एसआईपी से कितना पैसा बनेगा? 5 से 20 साल की पूरी कैलकुलेशन देखेंNCERT को मिलेगा ‘डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ का दर्जा, इसी महीने आ सकता है बड़ा फैसलाShare Market: शेयर बाजार में जोरदार तेजी, निफ्टी रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा; सेंसेक्स 573 अंक चढ़ाUpcoming NFO: नया साल, नया जोश; जनवरी में 12 नए फंड होंगे लॉन्च, ₹100 से निवेश शुरूसरकार एयर और वॉटर प्यूरीफायर पर GST 5% करने की तैयारी में, GST काउंसिल जल्द ले सकती है फैसलास्मोकिंग करने वाले दें ध्यान! 1 फरवरी से महंगी होगी सिगरेट, जानें अब कितना ज्यादा पैसा देना होगामुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की तारीख तय! रूट, स्पीड जान लीजिए

Repo rate में फिर से कटौती संभव, RBI के MPC सदस्य ने दिए संकेत

RBI की मौद्रिक नीति समिति के सदस्य भट्टाचार्य ने कहा है कि अगर महंगाई दर और घटती है तो नीतिगत रीपो रेट में और कटौती की जा सकती है।

Last Updated- June 27, 2025 | 6:55 AM IST
RBI
Representative Image

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के एक बाहरी सदस्य सौगत भट्टाचार्य ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में ब्याज दरों (repo rate) में कटौती की गुंजाइश बनी हुई है। भले ही 6 जून की नीति बैठक में रुख को ‘समर्थनकारी’ (accommodative) से बदलकर ‘तटस्थ’ (neutral) कर दिया गया हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अब दरों में कटौती नहीं हो सकती।

उन्होंने बुधवार को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “रुख में बदलाव का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आगे दरें कम नहीं की जा सकतीं। ऐसा बिल्कुल नहीं है।”

गौरतलब है कि भट्टाचार्य को मौद्रिक नीति समिति के अपेक्षाकृत सख्त रुख रखने वाले सदस्यों में गिना जाता है। इसके बावजूद उन्होंने माना कि आर्थिक हालात को देखते हुए ब्याज दरों में नरमी की संभावनाएं अभी भी बनी हुई हैं।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति के सदस्य भट्टाचार्य ने कहा है कि अगर महंगाई दर और घटती है तो नीतिगत रीपो रेट में और कटौती की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस समय अच्छी बारिश और सब्जियों के दाम में कमी आने से महंगाई पर काबू पाया गया है। साथ ही, वैश्विक स्तर पर खाने-पीने की चीजों की कीमतें स्थिर हैं और खाद्य तेल के दाम भी घटे हैं, जिससे महंगाई की स्थिति अनुकूल बनी हुई है।

पिछली मौद्रिक नीति बैठक में भट्टाचार्य अकेले ऐसे सदस्य थे जिन्होंने 0.25 फीसदी की ब्याज दर कटौती के पक्ष में वोट दिया था। उस बैठक में आरबीआई ने उम्मीद से ज्यादा ब्याज दर में कटौती की थी और बैंकों को नकदी बढ़ाने के लिए अतिरिक्त कदम भी उठाए थे ताकि आर्थिक विकास को रफ्तार दी जा सके।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की हालिया मौद्रिक नीति फैसलों को लेकर पिछले हफ्ते गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कुछ स्पष्टीकरण दिए थे। उसी सिलसिले में अब डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा भट्टाचार्य ने भी नकदी प्रबंधन को लेकर अहम बातें कही हैं।

हालांकि केंद्रीय बैंक ने हाल में सिस्टम में नकदी बढ़ाने के कुछ कदम उठाए थे, लेकिन मंगलवार को RBI ने एलान किया कि वह छोटी अवधि के उपायों के ज़रिए बाजार से 1 लाख करोड़ रुपये (करीब 11.7 अरब डॉलर) तक की नकदी वापस लेगा।

इस पर भट्टाचार्य ने कहा कि यह फैसला इसलिए जरूरी था क्योंकि रात भर के कर्ज पर ब्याज दरें RBI के तय दायरे से नीचे गिर गई थीं, जिससे नीति में कुछ बदलाव की जरूरत महसूस हुई।

उन्होंने कहा, “नकदी का प्रबंधन आखिरी रुपये तक करना हमेशा ही चुनौतीपूर्ण होता है।” इसके पीछे कई ऐसे कारण होते हैं जो लगातार बदलते रहते हैं—जैसे सरकार के पास मौजूद नकदी का स्तर, बाजार में चलन में मौजूद मुद्रा की मात्रा, वैश्विक पूंजी प्रवाह और खुद RBI का बाजार में दखल।

First Published - June 27, 2025 | 6:53 AM IST

संबंधित पोस्ट