वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि भारत और रूस के बीच व्यापार का ग्राफ असंतुलित बना हुआ है। व्यापार में विविधता लाकर इसे दुरुस्त किए जाने की जरूरत है। फिक्की द्वारा आयोजित भारत-रूस बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा, ‘व्यापार बास्केट में विविधता लाने और उसे अधिक संतुलित बनाने की आवश्यकता है। दोनों देशों के व्यापार में कई और चीजों को शामिल किया जाना चाहिए। कई अवसर मौजूद हैं, जिनका पता लगाया जा सकता है। इससे साझेदारी फलेगी-फूलेगी, असंतुलन की पहचान करेगी तथा यदि कोई व्यापार बाधा होगी, तो उसे दूर करने में सामूहिक रूप से काम करेगी।’
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत और रूस के बीच कुल व्यापार वित्त वर्ष 2022 में 8.73 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 68.7 अरब डॉलर हो गया। इसकी मुख्य वजह भारत द्वारा रूसी तेल की खरीदारी है। भारत के लिए रवाना होने वाला शिपमेंट वित्त वर्ष 2022 में 5.48 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 63.8 अरब डॉलर हो गया, जबकि निर्यात 3.5 अरब डॉलर से बढ़कर महज 4.88 अरब डॉलर हुआ। इससे व्यापार घाटा वित्त वर्ष 2022 में 1.98 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 58.92 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
मंत्री ने कहा कि भारत से रूस को निर्यात बढ़ाने की क्षमता वाले क्षेत्रों में उपभोक्ता वस्तुएं, खाद्य उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्टफोन, वाहन, भारी वाणिज्यिक वाहन आदि शामिल हैं। पिछले साल दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा था।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत वाहन, कपड़ा, चमड़ा, औषधि, आईटी, कृषि और समुद्री उत्पाद जैसे उन तमाम क्षेत्रों में निर्यात का विस्तार कर सकता है जहां रूस की मौजूदगी सीमित है।
अग्रवाल ने कहा, ‘हमें यह देखने की जरूरत है कि व्यापार को संतुलित बनाने के लिए क्या किया जा सकता है। आपसी व्यापार की वस्तुओं में बदलाव किए बिना हमारा व्यापार संतुलित नहीं हो सकता है। इसलिए हमें लगता है कि भारत के पास देने के लिए बहुत कुछ है।’ उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को व्यापार प्रक्रियाएं सरल बनानी चाहिए और मानक एवं प्रमाणन को सुगम बनाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘नियामकों को समस्याएं समझने और समाधान तलाशने की जरूरत है, न कि समस्याएं पैदा करने की। इसलिए नजरिये को बदला जा सकता है। हमें यह देखने की जरूरत है कि हम उन मानकों और प्रमाणन के दायरे में कैसे आएंगे जो एक-दूसरे से मेल खाते हैं।’
रूस के राष्ट्रपति कार्यालय के उप प्रमुख मैक्सिम ओरेस्किन ने कहा कि रूस भारतीय वस्तुओं की खरीद को कई गुना बढ़ाना चाहता है। उन्होंने कहा कि रूसी आयात में भारत की हिस्सेदारी अभी 2 फीसदी से भी कम है। भारत से कृषि, दूरसंचार आदि उत्पादों के आयात में रूस की दिलचस्पी है।