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निर्यातकों की सहायता के लिए ज्यादा धन की जरूरत

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कई बार के सर्वे में यह पाया गया है कि 5 में से 4 एमएसएमई को गारंटी से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ा है।

Last Updated- February 18, 2025 | 10:58 PM IST
Export Import

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच वाणिज्य विभाग को सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के निर्यातकों को समर्थन देने की योजनाओं के लिए अतिरिक्त धन की जरूरत हो सकती है। इस मामले से जुड़े एक व्यक्ति ने कहा कि केंद्रीय बजट में घोषित निर्यात संवर्धन मिशन के तहत आवंटित धन संभवतः समर्थन योजनाओं की डिजाइन तैयार करने व लागू करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। मिशन के लिए 2,250 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में निर्यात को वृद्धि का प्रमुख इंजन बताया था। मिशन का मकसद एमएसएमई निर्यात को बढ़ावा देना है, जिसकी भारत के कुल निर्यात में 45 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

वाणिज्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि निर्यात संवर्धन के लिए चल रही तीन योजनाओं, ब्याज समतुल्यीकरण योजना (आईईएस) बाजार पहुंच की पहल (एमएआई) और प्रयोगशाला में तैयार हीरों को समर्थन की योजनाओं मिलाकर यह मिशन तैयार किया गया है।
इसके साथ ही यह भी व्यवस्था की गई है कि एमएसएमई, वाणिज्य और वित्त मंत्रालय मिलकर ज्यादा निर्यात ऋण, सीमा पार फैक्टरिंग के साथ विदेशी बाजार में गैर शुल्क बाधाओं से निपटने में एमएसएमई निर्यातकों की सहायता देने की दिशा में काम करेंगे। इस समय इस मसले पर अंतर मंत्रालयी परामर्श चल रहा है। उसके बाद योजना की रूपरेखा तैयार की जाएगी और केंद्रीय मंत्रिमंडल से इसके लिए मंजूरी की मांग की जाएगी।

उपरोक्त उल्लिखित व्यक्ति ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘इन सभी योजनाओं के लिए बजट में 2,250 रुपये का आवंटन किया गया है, जो संभवतः पर्याप्त नहीं होगा। अगर वित्त मंत्रालय को विश्वास हो जाता है कि निर्यातकों की सहायता के लिए ज्यादा धन की जरूरत है, आवंटन में बढ़ोतरी की जा सकती है।’उदाहरण के लिए, बजट अनुमान के मुताबिक सरकार को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान आईईएस पर 2,482 करोड़ रुपये और एमएआई योजनाओं पर 200 करोड़ रुपये खर्च होंगे। बहरहाल इन दोनों योजनाओं के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में कोई नया आवंटन नहीं किया गया है।

जहां तक नई समर्थन योजनाओं का सवाल है, सरकार नई समर्थन योजनाएं तैयार कर रही है। खासकर छोटे निर्यातकों के लिए योजना बनाई जा रही है, जिससे उन्हें गारंटी मुक्त ऋण मिल सके। कई बार के सर्वे में यह पाया गया है कि 5 में से 4 एमएसएमई को गारंटी से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ा है।

सरकार ने फैक्टरिंग सर्विसेज को बढ़ावा देने की भी योजना बनाई है। इससे निर्यातकों की बैंकों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। निर्यात फैक्टरिंग सेवाओं का इस्तेमाल वैश्विक रूप से वित्तपोषण के साधन के रूप में होता है। भारत में इसकी स्वीकार्यता कम है। उच्च लागत, उच्च ब्याज दर, उच्च जोखिम प्रीमियम और आर्थिक सहायता योजनाओं के साथ समानता की कमी के कारण फैक्टरिंग सेवाओं को कम अपनाया गया है।

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First Published - February 18, 2025 | 10:58 PM IST

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