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वित्त वर्ष 2023 में भी हासिल नहीं होगा मुद्रीकरण लक्ष्य!

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Last Updated- December 11, 2022 | 9:04 PM IST

केंद्र सरकार की महत्त्वाकांक्षी 6 लाख करोड़ रुपये की राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) योजना चालू वित्त वर्ष और अगले वित्त वर्ष में भी सालाना लक्ष्य से चूक सकती है। बिजनेस स्टैंडर्ड को वित्त और रेल मंत्रालय के सूत्रों से पता चला है कि आंशिक तौर पर ऐसा रेलवे के बड़े आकार वाले बुनियादी ढांचे के मुद्रीकरण में लगने वाले लंबे वक्त की वजह से है।
अधिकारी बताते हैं कि रेलवे मुद्रीकरण के बड़े हिस्से की शुरुआत वित्त वर्ष 2024 के बाद से होगी क्योंकि स्टेडियमों और समर्पित मालवहन गलियारा जैसे कुछ बुनियादी ढांचों को पट्टे पर देने का काम जल्दी पूरा होने वाला नहीं है। एनएमपी में रेल इन्फ्रा को दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता माना जा रहा है जिसमें करीब 1.52 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति का मुद्रीकरण किया जाना है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘रेल मंत्रालय ने हमें अवगत कराया है कि स्टेशन के पुनर्विकास के अलावा उनका अधिकांश मुद्रीकरण वित्त वर्ष 2024 से होगा। लिहाजा, इस बात की आशंका है कि वित्त वर्ष 2023 का लक्ष्य भी हासिल नहीं हो पाएगा।’ वित्त वर्ष 2022 के लिए एनएमपी का लक्ष्य 88,190 करोड़ रुपये है। अगस्त में एनएमपी की शुरुआत के बाद से सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों ने करीब 26,800 करोड़ रुपये हासिल किए हैं और सड़क मंत्रालय द्वारा शीघ्र ही 15,000-16,000 करोड़ रुपये और हासिल किया जाना है। वित्त वर्ष 2023 के लिए 1.62 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है।
एनएमपी योजना के मुताबिक उम्मीद है कि रेलवे करीब 400 स्टेशनों का मुद्रीकरण करेगा। लेकिन दिसंबर 2021 तक रेलवे सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (पीपीपीएसी) की मंजूरी के लिए कोई प्रस्ताव नहीं भेजा। करीब 250 गुड्स शेड के मुद्रीकरण की भी योजना थी।

रेलवे के एक प्रवक्ता ने बिजनेस स्टैंडर्ड के प्रश्नों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। दूसरी ओर, सूत्रों ने कहा कि विरासत मार्गों, संपत्तियों और स्टेडियम के मुद्रीकरण में भी अनुमान से कुछ अधिक वक्त लग सकता है। वित्त वर्ष 2022 में रेलवे ने मुद्रीकरण के लिए करीब 17,810 करोड़ रुपये की परियोजनाएं तैयार की थी। इनमें 12 स्टेशन शामिल थे लेकिन इस संबंध में कोई खास प्रगति नहीं हुई। उसने जुलाई 2020 में 109 मार्गों को टे्रनों के परिचालन के लिए निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी की थी लेकिन परियोजना बेपटरी हो गई क्योंकि इसमें उद्योग से जुड़ी कंपनियों ने बहुत कम रुचि दिखाई। यदि विरासत संपत्तियों का मुद्रीकरण किया जाता है तो रेलवे के लिए यह एक बड़ी बात होगी क्योंकि उसे इन संपत्तियों के रखरखाव पर सालाना 250 से 300 करोड़ रुपये खर्च करना पड़ता है।
एनएमपी का लक्ष्य निजी क्षेत्र के भागीदारों को शामिल कर पुरानी परियोजनाओं से धन अर्जित करना है। इसके तहत निजी भागीदारों को राजस्व के अधिकार हस्तांतरित किए जाएंगे जबकि उनका मालिकाना हक सरकार के पास ही रहेगा। यह व्यवस्था सार्वजनिक निजी भागीदारी जैसी हो जाएगी।

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First Published - February 23, 2022 | 11:32 PM IST

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