facebookmetapixel
Advertisement
क्या ईरान पर सबसे बड़े हमले की तैयारी में अमेरिका? ट्रंप बोले: हम ‘लॉक्ड एंड लोडेड’, पर बातचीत भी जारी‘उदारीकण के बाद अहसास हुआ कि हमें इनोवेशन करना होगा, न कि दिल्ली में इंतजार’, नारायण मूर्ति ने बयां की 1991 से पहले की दुश्वारियां1991 से अब तक का सफर: अविश्वास से निकलकर भरोसे पर आधारित आर्थिक नीति बनाने की जरूरत‘बंगाल को मिली तबाही और निराशा की विरासत’, बोले स्वप्न दासगुप्ता: निवेश लाने के लिए करेंगे अतिरिक्त प्रयासऑरिफ्लेम बेचेगी भारत में अपना विनिर्माण कारोबार, अकुम्स ड्रग्स की सहायक कंपनी प्योर एंड क्योर से हुआ समझौता₹9,200 करोड़ के IPO से कर्जमुक्त होगी मणिपाल हेल्थ, उत्तर भारत में विस्तार पर कंपनी का जोर: दिलीप जोसजून में लगातार दूसरे महीने क्रेडिट कार्ड खर्च ₹2 लाख करोड़ पार, HDFC Bank और SBI का दिखा दबदबाICICI Bank ने डॉलर बॉन्ड से जुटाए $1 अरब, 2017 के बाद पहला सबसे बड़ा सार्वजनिक बॉन्ड इश्यूओडिशा में बनेगा देश का पहला AI-ऑप्टिमाइज्ड डेटा सेंटर, HCLTech करेगी ₹14,257 करोड़ का निवेशबंगाल को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से जोड़ना होगा, केंद्र के साथ तालमेल और निवेश पर रहेगा हमारा जोर: स्वप्न दासगुप्ता

जापान और ब्रिटेन भी फंस सकते हैं संकट में

Advertisement
Last Updated- December 07, 2022 | 9:07 PM IST

सोमवार को लीमन बदर्स के कंगाली के कगार पर पहुंचने और निवेश बैंक मेरिल लिंच के बैंक ऑफ अमेरिका द्वारा खरीदे जाने के साथ ही अमेरिकी वित्तीय संकट और गहरा गया है।


अमेरिका में ताजा संकट और इसके परिणामों के बारे में स्टैंडर्ड एंड पुअर्स के मुख्य अर्थशास्त्री डेविड विस ने न्यू यॉर्क से शोभना सुब्रह्मण्यन को दिए गए साक्षात्कार में बताया कि अमेरिकी वित्तीय संकट फिलहाल समाप्त नहीं हुआ है और जापान तथा ब्रिटेन में समस्या और भी जटिल हो सकती है।

सब-प्राइम संकट से होने वाला घाटा लगता है बढ़ रहा है?

सब प्राइम संकट केबाद करीब 400 अरब डॉलर के घाटे का अनुमान लगाया गया था जो सही लग रहा है, लेकिन इसी के साथ खासे डेरिवेटिव नुकसान भी हो रहे हैं लिहाजा हमे लगता है कि कुल नुकसान एक खरब डॉलर तक पहुंच सकता है। निश्चित तौर पर अभी माहौल प्रतिकूल है और स्थिति के सामान्य होने में थोड़ा समय लगेगा।

वैश्विक स्तर पर विकास पर इसका कितना असर पड़ेगा?

अमेरिका से भी बुरी स्थिति ब्रिटेन की हो सकती है, क्योंकि वहां पर भी आवास ऋण का संकट ज्यादा बड़ा है , यही नहीं वहां की बैंकिंग प्रणाली भी उतनी मजबूत और पूंजीकृत नहीं है। जापानी अर्थव्यवस्था भी अमेरिका की तरह ही प्रभावित हो रही है।

अमेरिका में तरलता की मौजूदा स्थिति को आप कैसे देखते हैं?

छोटे बैंक  जिन्होंने छोटे कारोबार करने के लिए ऋण उपलब्ध कराया था वो बेहतर स्थिति में हैं और ऐसा आगे भी जारी रहना चाहिए। समस्या बड़े निवेश बैंकों केसाथ है। इस लिहाज से जो बड़े कारोबार हैं उनके लिए ऋण जुटाना और कारोबार जारी रखना मुश्किल भरा हो सकता है।

क्या फंड प्रबंधक एशिया में अपनी पोजीशन को लिक्विडेट करेंगे?

मुझे नहीं लगता कि एशियाई बाजार में फंड मैंनेजर लिक्विडेट करेंगे क्योंकि वहां जो परिसंपत्ति है वो अच्छी गुणवत्ता वाली हैं। भारत और चीन दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं और वहां परिसंपत्ति दीर्घावधि वाली है। हालांकि इस बात की संभावना है कि अमेरिकी बाजार से एशियाई और मध्य-पूर्व के कारोबारी अपने निवेश को निकाल ले।

Advertisement
First Published - September 16, 2008 | 10:53 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement