facebookmetapixel
Stock Market Today: एशियाई बाजार में तेजी, GIFT Nifty हरा; जानें कैसी होगी शेयर बाजार की शुरुआतTata Technologies Q3 रिजल्ट 2026: तारीख आ गई, इस दिन आएंगे तिमाही नतीजे2026 में भारतीय बैंकिंग पर आशावादी नजर, विदेशी निवेश और ऋण वृद्धि के संकेत2025 में म्युचुअल फंडों ने तोड़ा रिकॉर्ड, शुद्ध इक्विटी खरीद 4.9 लाख करोड़ तक पहुंचीभू-राजनीतिक चिंताओं के बीच आज रुपया और बॉन्ड खुल सकते हैं कमजोरDMart के शेयरों पर निगाह: पुराने स्टोर और प्रतिस्पर्धा से रेवेन्यू पर असरStocks To Watch Today: Q3 नंबर, ऑर्डर और IPO की खबरें, बाजार खुलते ही आज एक्शन में रहेंगे ये स्टॉक्सवेनेजुएला संकट: भारत के व्यापार व तेल आयात पर भू-राजनीतिक उथल-पुथल से फिलहाल कोई असर नहींसोमनाथ मंदिर: 1026 से 2026 तक 1000 वर्षों की अटूट आस्था और गौरव की गाथाT20 World Cup: भारत क्रिकेट खेलने नहीं आएगी बांग्लादेश की टीम, ICC से बाहर मैच कराने की मांग

उम्मीद से कम रह सकती है अर्थव्यवस्था की विकास दर : MPC सदस्य

Last Updated- December 23, 2022 | 1:39 PM IST
Increasing weightage of construction sector in Nifty

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्य जयंत आर वर्मा का मानना है कि भारत की आर्थिक वृद्धि ‘अत्यंत नाजुक’ स्थिति में है और इसे अभी पूरा समर्थन देने की जरूरत है।

वर्मा ने शुक्रवार को पीटीआई-भाषा से कहा कि निजी उपभोग और पूंजी निवेश ने अबतक रफ्तार नहीं पकड़ी है, ऐसे में अर्थव्यवस्था की आर्थिक वृद्धि कमजोर बनी हुई है। उन्होंने इस बात की आशंका जताई कि भारत की अर्थव्यवस्था अपनी आकांक्षाओं और जरूरत के हिसाब से वृद्धि दर्ज नहीं कर पाएगी। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवथा को आगे बढ़ाने के चार ‘इंजन’ हैं।

इनमें से दो इंजन निर्यात और सरकार के खर्च ने महामारी के दौरान अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ने में मदद की, लेकिन अब इसमें अन्य इंजनों को ‘बैटन’ अपने हाथ में लेने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं अर्थव्यवस्था की वृद्धि के चार इंजन के बारे में सोचता हूं। ये हैं—निर्यात, सरकारी खर्च, पूंजी निवेश और निजी उपभोग।’’ वर्मा ने कहा, ‘‘वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती की वजह से निर्यात वृद्धि का मुख्य कारक नहीं रह सकता।

वहीं सरकार का खर्च भी राजकोषीय दिक्कतों की वजह से सीमित है।’’ एमपीसी के सदस्य ने कहा कि विशेषज्ञ काफी समय से इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि निजी निवेश रफ्तार पकड़े।

हालांकि, भविष्य की वृद्धि संभावनाओं को लेकर चिंता की वजह से पूंजी निवेश प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या आगामी महीनों में दबी मांग ठंडी पड़ने के बाद चौथे इंजन यानी निजी उपभोग की तेजी जारी रहेगी।’’ वर्मा ने कहा, ‘‘इन स्थितियों को देखते हुए मुझे आशंका है कि आर्थिक वृद्धि अत्यंत नाजुक स्थिति में है और इसे पूरे समर्थन की जरूरत है।’’

इससे पहले इसी महीने भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष (2022-23) के लिए वृद्धि दर के अनुमान को सात से घटाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया है। दूसरी ओर विश्व बैंक ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया है। भारतीय प्रबंध संस्थान-अहमदाबाद (आईआईएम-अहमदाबाद) के प्रोफेसर वर्मा ने हालांकि भरोसा जताया कि दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत के समक्ष मंदी का जोखिम नहीं है। उन्होंने कहा कि वास्तव में भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन अन्य बड़े देशों से बेहतर है।

वर्मा ने कहा, ‘‘समस्या यह है कि भारत की आकांक्षा का स्तर ऊंचा है, विशेषरूप से यह देखते हुए कि हमने दो साल महामारी की वजह से गंवा दिए हैं।’’ उन्होंने कहा कि भारत के साथ जनसांख्यिकीय लाभ है। ऐसे में श्रमबल में शामिल होने वाले युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए ऊंची वृद्धि की जरूरत है। वर्मा ने कहा, ‘‘मुझे इस बात की आशंका नहीं है कि भारत शेष दुनिया से धीमी रफ्तार से बढ़ेगा। मुझे आशंका इस बात की है कि हम अपनी आकांक्षाओं और जरूरत के हिसाब से वृद्धि हासिल नहीं कर पाएंगे।’’

First Published - December 23, 2022 | 1:03 PM IST

संबंधित पोस्ट