भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मासिक आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार निकट अवधि में देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है और महंगाई का दबाव भी फिलहाल नियंत्रित है। ऐसे में भारत ऊंची वृद्धि दर बनाए को रखने की स्थिति में है। यह रिपोर्ट शुक्रवार को जारी की गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल ही में यूरोप और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते वास्तव में आने वाले वर्षों में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इन समझौतों से भारतीय उत्पादों को विदेशी बाजारों में बेहतर पहुंच मिलेगी। साथ ही, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की वापसी भी शुरू हुई है जो अर्थव्यवस्था में सुधार के शुरुआती संकेत माने जा रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इसी महीने पेश किए गए केंद्रीय बजट में सरकार ने राजकोषीय घाटा कम करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। साथ ही, दीर्घकालिक वृद्धि पर जोर देते हुए पूंजीगत व्यय के लिए अधिक पूंजी आवंटित की गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि निकट अवधि में देश की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है और खपत, निवेश तथा उत्पादकता बढ़ाने वाले आर्थिक सुधारों के कारण ऊंची वृद्धि दर बनाए रखने की अच्छी स्थिति में है।
रिपोर्ट के अनुसार, संशोधित उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) श्रृंखला के पहले आंकड़ों के आधार पर समग्र महंगाई दर अब भी नियंत्रित स्तर पर है। इसमें कहा गया है, ‘महंगाई दर लक्ष्य के आसपास और संतुलित रहने की उम्मीद है, जिससे वृद्धि और महंगाई के बीच सकारात्मक संतुलन बना रहेगा।’ सीपीआई के 2024 आधार वर्ष के अनुसार, जनवरी में सालाना आधार पर समग्र महंगाई दर 2.8 प्रतिशत रही।
रिपोर्ट में भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) व्यापार समझौते और भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का जिक्र करते हुए कहा गया है कि भारत ने एक महीने के भीतर अपने दो बड़े व्यापारिक साझेदारों के साथ महत्वपूर्ण समझौते किए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इन व्यापार समझौतों के लागू होने से भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों और निर्यात आधारित उद्योगों को बड़ा समर्थन मिलने की उम्मीद है।’ रिपोर्ट के अनुसार, इन समझौतों से भारतीय उत्पादों को विदेशी बाजारों में बेहतर पहुंच मिलेगी, निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और भारतीय कंपनियां वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से और मजबूती से जुड़ सकेंगी।