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अपनी शर्तों पर अमेरिका से बात करे भारत: एस महेंद्र देव

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देव ने उम्मीद जताई कि मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर हस्ताक्षर होने के बाद, भारत को शुल्क के मामले में अन्य देशों की तुलना में बढ़त मिलेगा और इससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।

Last Updated- July 17, 2025 | 11:00 PM IST
India US Trade Deal

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के चेयरमैन एस महेंद्र देव ने कहा है कि भारत को राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए, अपनी शर्तों पर अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर बातचीत करनी चाहिए। देव ने उम्मीद जताई कि मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर हस्ताक्षर होने के बाद, भारत को शुल्क के मामले में अन्य देशों की तुलना में बढ़त मिलेगा और इससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।

देव ने कहा, ‘भारत का दृष्टिकोण अपनी शर्तों पर और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए देशों के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत करना है। बातचीत जारी है और अंतिम निर्णय दोनों देशों के आपसी हितों पर निर्भर करता है।’

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौता उसी तर्ज पर होगा जैसा अमेरिका ने मंगलवार को इंडोनेशिया के साथ किया है। अमेरिका-इंडोनेशिया व्यापार समझौते के तहत, दक्षिण पूर्व एशियाई देश अमेरिकी उत्पादों को अपने बाजार में पूरी पहुंच प्रदान करेगा, जबकि इंडोनेशियाई वस्तुओं पर अमेरिका में 19 प्रतिशत शुल्क लगेगा। इसके अलावा, इंडोनेशिया ने 15 अरब डॉलर की अमेरिकी ऊर्जा, 4.5 अरब डॉलर के अमेरिकी कृषि उत्पाद और 50 बोइंग जेट खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है।

प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर पांचवें दौर की वार्ता के लिए भारतीय दल वाशिंगटन में है। यह पूछे जाने पर कि क्या भारत को एक विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए मुद्रास्फीति लक्ष्य को थोड़ा अधिक रखना चाहिए, देव ने कहा, ‘जब मौजूदा ढांचा मुद्रास्फीति और वृद्धि के लक्ष्यों को लेकर अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, तो महंगाई का लक्ष्य बढ़ाने की कोई आवश्यकता नहीं है।’ उन्होंने कहा कि कुछ सुझाव हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को मुद्रास्फीति लक्ष्य के लिए खाद्य महंगाई को छोड़कर, मुख्य मुद्रास्फीति (कोर) का उपयोग करना चाहिए।

ईएसी-पीएम के चेयरमैन ने कहा, ‘आधार वर्ष को संशोधित कर 2024 करने के बाद हमें उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से बेहतर मुद्रास्फीति के आंकड़े मिलेंगे।’ देव ने कहा कि पिछले 10 साल में महंगाई दर के लक्ष्य के अनुभव से पता चलता है कि महंगाई दर कुछ अपवादों को छोड़कर 2 से 6 प्रतिशत के दायरे में रही है। उन्होंने कहा, ‘यह ध्यान देने वाली बात है कि उच्च महंगाई दर मुख्यतः गरीब और मध्यम वर्ग को प्रभावित करती है। कम महंगाई दर भी सतत वृद्धि के लिए महत्त्वपूर्ण है।’

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First Published - July 17, 2025 | 11:00 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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