facebookmetapixel
Advertisement
कच्चे तेल की महंगाई से पेट्रोल-डीजल फिर महंगे, बंगाल चुनाव बाद चौथी बार बढ़े तेल के दामMSMEs के लिए कारोबारी जरूरतों के मुताबिक बने कर्ज मॉडल: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमणरिकॉर्ड बिक्री और मजबूत मांग से आयशर मोटर्स के नतीजे अनुमान से बेहतरलिस्टेड रीट्स ने चौथी तिमाही में 2,566 करोड़ रुपये से ज्यादा बांटेAI की चुनौती से दबाव में आईटी शेयर, गिरावट के बाद भी सुधार की राह लंबीपश्चिम एशिया संकट की चौतरफा मार: भारतीय कंपनियों की बढ़ी लागत, महंगे होंगे ऑटो, फार्मा और राशनकमोडिटी बाजार पर फिर बढ़ेगा सेबी का फोकस, अहम विभाग फिर से शुरू करने की योजनानेपाल बॉर्डर से बुंदेलखंड तक बनेगा मेगा कॉरिडोर, UP में कनेक्टिविटी सुधारने को CM योगी का बड़ा प्लाननीट पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा: NTA ने अतीत से नहीं सीखा सबक, केंद्र और CBI से मांगा जवाबभारत और कनाडा के बीच ऊर्जा के लिए अपार संभावनाएं, व्यापार वार्ता भी तेज 

रिपोर्ट में दावा: आजीविका के लिए चाहिए अब एक नया मॉडल, सब्सिडी से आगे बढ़ने की जरूरत

Advertisement

इसके कहा गया है कि 2023-25 के साक्ष्यों से पुष्टि होती है कि भारत की आजीविका नीति के ढांचे से संरक्षण और प्रोत्साहन के बीच बुनियादी तनाव की समस्या का समाधान नहीं हुआ है

Last Updated- December 02, 2025 | 10:57 PM IST
livelihood policy
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत में कोविड के दौरान शुरू की गई गई सब्सिडी और अन्य संबंधित सुविधाएं संकट के दौरान राजनीतिक रूप से आवश्यक और सामाजिक रूप से महत्त्वपूर्ण थीं, लेकिन उत्पादकता से जुड़े बुनियादी ढांचे, उद्यमिता के वातावरण और रोजगार के लिए कौशल विकसित करने पर निवेश किया जाना ढांचागत हिसाब से महत्त्वपूर्ण है।  

एक्सेस डेवलपमेंट सर्विसेस की स्टेट ऑफ इंडियाज लाइवलीहुड  रिपोर्ट 2025 के नवीनतम संस्करण में यह कहा गया है। इस रिपोर्ट में 10 से ज्यादा अध्याय हैं, जिसे देश के जाने माने शिक्षाविदों, अर्थशास्त्रियों व अन्य ने मिलकर तैयार किया है।

इसके एक अध्याय में कहा गया है कि 2023-25 के साक्ष्यों से पुष्टि होती है कि भारत की आजीविका नीति के ढांचे से संरक्षण और प्रोत्साहन के बीच बुनियादी तनाव की समस्या का समाधान नहीं हुआ है।   यह रिपोर्ट 3 दिसंबर को जारी की जाएगी।

रमेश श्रीवास्तव अरुणाचलम द्वारा लिखित आजीविका को पुनर्जीवित करने के लिए नीति और कार्यक्रम का असर 2023-2025: रिकवरी से लचीलेपन तक? नामक अध्याय में कहा गया है कि पीएम-किसान हस्तांतरण सिमटकर सीमांत किसान खेती लागत के केवल 8 प्रतिशत तक रह गया है और सिंचाई व्यवस्था, फसल कटाई के बाद के इन्फ्रा या बाजार तक पहुंच में निवेश इसका पूरक नहीं बन सका है, जिससे किसानों का मुनाफा कई गुना बढ़ सकता था। जलवायु संबंधी संकटों के बावजूद मनरेगा में कार्यदिवस घटे हैं और सिर्फ 12 प्रतिशत कामगार ही कृषि उत्पादकता में सुधार से जुड़़े हैं, जबकि 73 प्रतिशत कामगार कृषि पर निर्भर हैं।

Advertisement
First Published - December 2, 2025 | 10:29 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement