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मंदी की मार के बीच करेंट एकाउंट बैलेंस में भी लगा दीमक

Last Updated- December 07, 2022 | 8:43 AM IST

पूंजी की आवक में कमी और कच्चे तेल की आग लगाती कीमतों ने चौथे तिमाही में देश के करेंट एकाउंट बैलेंस को खासा प्रभावित किया है।


यह बैलेंस इस तिमाही में गिरकर 3.3 अरब डॉलर का हो गया है। इस प्रकार,इस वित्तीय वर्ष में 2007 के वित्त वर्ष के मुकाबले बैलेंस में 1 अरब डॉलर की कमी दर्ज हुई है। करेंट अकाउंट डेफिसिट की बात करें तो यह साल 2007-08 के लिए बढ़कर 17.4 अरब डॉलर हो गया है। इसके पीछे कारोबारी गिरावट है जिसकी वजह से इतनी कमी देखने को मिली है। इस बारे में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने रिपोर्ट जारी की है।

बैलेंस ऑफ पेमेंट के आधार पर मर्केंडाइज एक्सपोर्ट में पिछले संगत साल के 16.7 फीसदी के मुकाबले 20 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है। इसके अलावा आयातित वस्तुओं के दामों में कच्चे तेल की कीमतों में इजाफे के चलते खासी तेजी दर्ज की गई है। खासकर आयात भुगतान में खासी वृद्धि देखने को मिली है।

भुगतान के आधार पर यानि बीओपी के शब्दों में देखा जाए तो पिछले साल के 14.7 फीसदी के मुकाबले इस बार इसमें कुल 37.2 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया है। तेल के आयात में जबरदस्त वृद्धि का असर तेलजनित उत्पादों की कीमतों में भी देखा गया है जो पिछले संगत साल के चौथे तिमाही में 56.4 डॉलर प्रति बैरल से 93.9 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।

First Published - July 1, 2008 | 9:42 PM IST

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