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बिज़नेस स्टैंडर्ड सर्वेक्षण में सीईओ ने जताई उम्मीद; बजट में पूंजीगत खर्च और रोजगार पर जोर

सर्वेक्षण में शामिल 75 फीसदी सीईओ ने कहा कि युवा पीढ़ी के लिए रोजगार के अवसर बेहतर करना आवश्यक है और इसलिए सरकार बजट में रोजगार सृजन पर भी ध्यान केंद्रित करेगी।

Last Updated- July 21, 2024 | 10:58 PM IST
बिज़नेस स्टैंडर्ड सर्वेक्षण में सीईओ ने जताई उम्मीद; बजट में व्यय, रोजगार पर जोर, CEOs expressed hope in Business Standard survey; Emphasis on expenditure, employment in the budget

भारतीय उद्योग जगत के अधिकतर मुख्य कार्या​धिकारियों (सीईओ) ने उम्मीद जताई है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार अपने पहले बजट में बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाने, आर्थिक सुधारों को बढ़ावा देने और ग्रामीणों/किसानों, खपत एवं रोजगार सृजन पर ध्यान केंद्रित करेगी। यह प्रधानमंत्री के रूप में मोदी के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट होगा।

पिछले सप्ताह भारतीय उद्योग जगत के 20 सीईओ के बीच किए गए एक सर्वेक्षण में 95 फीसदी प्रतिभागियों ने उम्मीद जताई कि इस केंद्रीय बजट में सरकारी खर्च से प्रेरित बुनियादी ढांचे के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसी साल फरवरी में अंतरिम बजट में नई सड़कों, एक्सप्रेसवे एवं अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए 11.11 लाख करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा की थी। यह रकम देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का करीब 3.4 फीसदी और एक साल पहले के मुकाबले करीब 11.1 अ​धिक है।

सीमेंट बनाने वाली कोलकाता की प्रमुख कंपनी श्री सीमेंट के प्रबंध निदेशक नीरज अखौरी ने कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि परियोजनाओं के लिए अ​धिक रकम के अलावा राजमार्गों, सड़कों, पुलों और शहरी विकास के लिए खर्च में वृद्धि होगी। अंतरिम बजट में सीमेंट कॉरिडोर की घोषणा काफी उत्साहजनक रही है और हम परिवहन के एकीकरण को बेहतर करने के लिए वि​भिन्न उपायों की उम्मीद करते हैं ताकि सीमेंट और संबंधित सामग्री की निर्बाध एवं सुगम आवाजाही सुनि​श्चित हो सके।’

इसी प्रकार 80 फीसदी प्रतिभागियों ने उम्मीद जताई कि सरकार आ​र्थिक सुधारों को जारी रखेगी। इससे वृद्धि को रफ्तार देने, निवेश को प्रोत्साहित करने, देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को आ​क​र्षित करने और कारोबारी सुगमता को बेहतर करने में मदद मिलेगी।

भारत हर साल 110 अरब डॉलर के एफडीआई निवेश आक​र्षित करने का लक्ष्य रख रहा है। हालांकि साल 2023 में देश में एफडीआई निवेश 43 फीसदी घटकर 28 अरब डॉलर रह गया था, जबकि वै​श्विक गिरावट 2 फीसदी रही थी। संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (अंकटाड) ने पिछले महीने जारी एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया है।

सर्वेक्षण में शामिल 70 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि उन्हें लगता है कि सरकार खपत को बढ़ावा देने के लिए आम लोगों के लिए कर प्रोत्साहन की पेशकश करेगी। इतनी ही तादाद में प्रतिभागियों ने यह भी कहा कि ग्रामीण बाजार और किसानों पर सरकार का फोकस जारी रहेगा।

केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा, ‘सरकार से उम्मीद है कि वह कृषि, कल्याणकारी योजनाओं, रोजगार सृजन और ग्रामीण आवास के लिए अधिक आवंटन करेगी। जिन प्रमुख योजनाओं/मंत्रालयों के लिए अधिक आवंटन हो सकता है, उनमें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, पीएम आवास योजना, पीएम ग्राम सड़क योजना, पीएम किसान सम्मान निधि और श्रम बहुल एमएसएमई क्षेत्र से संबंधित योजनाएं शामिल हैं।’

सीईओ ने कहा कि अंतरिम बजट की बुनियाद पर खड़ा पूर्ण बजट बुनियादी ढांचा और खास तौर पर मल्टी-मोडल परिवहन एवं उन्नत वेयरहाउसिंग में निवेश बढ़ाने पर जोर दे सकता है।

महिंद्रा लॉजिस्टिक्स के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ रामप्रवीण स्वामीनाथन ने कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि हरित ऊर्जा एवं ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) के लिए दमदार बुनियादी ढांचे पर लगातार जोर दिया जाएगा। इससे ग्रीन लॉजिस्टिक्स की ओर हमारी यात्रा में तेजी आएगी। बेहतर दक्षता हासिल करने और लागत घटाने के लिए लॉजिस्टिक्स मूल्य श्रृंखला में स्वचालन और डिजिटलीकरण पर ध्यान केंद्रित करना महत्त्वपूर्ण होगा। इसके अलावा एकीकृत लॉजिस्टिक्स ढांचा तैयार करने के लिए ओएनडीसी, यूलिप और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति में तेजी लाना आवश्यक है।’

सर्वेक्षण में शामिल 75 फीसदी सीईओ ने कहा कि युवा पीढ़ी के लिए रोजगार के अवसर बेहतर करना आवश्यक है और इसलिए सरकार बजट में रोजगार सृजन पर भी ध्यान केंद्रित करेगी।

कैटालिस्ट एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक केतन दलाल ने कहा, ‘गठबंधन सरकार की कुछ मजबूरियों के बीच बजट में निरंतरता के अनुभव में कुछ बदलाव दिख सकता है। इसी क्रम में सरकार रोजगार सृजन और पूंजीगत व्यय बढ़ाने पर प्रमुखता से ध्यान केंद्रित कर सकती है। बजट में विनिर्माण क्षेत्र में पीएलआई योजना में विस्तार, नई विनिर्माण इकाइयों को कर दरों में कमी का फायदा देने के लिए सनसेट क्लॉज में विस्तार जैसी रियायतें दिख सकती हैं, क्योंकि विनिर्माण के साथ रोजगार सृजन जुड़ा हुआ है।’

(मुंबई से देव चटर्जी, सोहिनी दास और प्राची पिसल, चेन्नई से शाइन जैकब और कोलकाता से ईशिता आयान दत्त)

First Published - July 21, 2024 | 10:05 PM IST

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