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IIP data : औद्योगिक उत्पादन 3 महीने के निचले स्तर पर, सितंबर में गिरकर 5.8 प्रतिशत पर

IIP data : औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) की वृद्धि दर सितंबर में गिरकर तीन माह के निचले स्तर 5.8 प्रतिशत पर आ गई। यह अगस्त में 10.3 प्रतिशत थी। यह जानकारी राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) ने दी जिसके आज जारी…

IIP Data: Industrial production at 6-month high in November, strong performance of manufacturing sector नवंबर में इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन 6 महीने के हाई पर, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का दमदार प्रदर्शन

IIP Data: Industrial production at 6-month high in November, strong performance of manufacturing sector

Last Updated: नवंबर 10, 2023 | 10:43 PM IST

IIP data : औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) की वृद्धि दर सितंबर में गिरकर तीन माह के निचले स्तर 5.8 प्रतिशत पर आ गई। यह अगस्त में 10.3 प्रतिशत थी। यह जानकारी राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) ने दी जिसके आज जारी आंकड़ों के मुताबिक विनिर्माण क्षेत्र में बीते महीने की तुलना में 4.5 प्रतिशत की गिरावट आई। इस अवधि में बिजली और खनन में बढ़कर क्रमश 9.9 प्रतिशत और 11.5 प्रतिशत हो गया। वैसे बीते साल सितंबर में आईआईपी 3.3 प्रतिशत था।

वित्त वर्ष 24 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) के दौरान आईआईपी की वृद्धि छह प्रतिशत रही जबकि बीते साल की इसी अवधि में यह 7.1 प्रतिशत थी। आईआईपी के 23 में से नौ क्षेत्रों जैसे खाद्य उत्पादों, तंबाकू, कपड़ा, कागज के उत्पादों, रिकार्डिड मीडिया, रसायन, कंप्यूटर और फर्नीचर की वृद्धि में गिरावट आई। हालांकि बीते महीने की तुलना में इस्तेमाल आधारित प्राथमिक और मध्यवर्ती सामानों में क्रमश 8 प्रतिशत और 5.8 प्रतिशत की गिरावट आई। अर्थव्यवस्था में उपभोग व मांग को उपभोक्ता वस्तुएं और गैर उपभोक्ता वस्तुओं की वृद्धि प्रदर्शित करती हैं। इस अवधि में उपभोक्ता वस्तु में एक प्रतिशत और गैर उपभोक्ता वस्तु में 2.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।

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इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि प्रतिकूल आधार, त्योहारी कैलेंडर में बदलाव और अत्यधिक बारिश के कारण आईपीपी के साल-दर-साल आंकड़ों पर प्रतिकूल असर पड़ा। ये आंकड़ें सितंबर में अनुमान के करीब आधे रहे। उन्होंने कहा, ‘सभी उपक्षेत्रों और इस्तेमाल आधारित श्रेणियों में व्यापाक तौर पर गिरावट रही।

रोजमर्रा के इस्तेमाल की टिकाऊ और गैर टिकाऊ वस्तुओं में विशेष तौर पर 1 फीसदी और 2.7 फीसदी की गिरावट हुई। इससे सितंबर में विनिर्माण क्षेत्र में गिरावट दर्ज हुई।’बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि तीसरी तिमाही में भी उपभोक्ताओं की कमजोर मांग की उम्मीद है। हालांकि इस अवधि में त्योहारी खरीदारी से कुछ गति मिलेगी। इस क्रम में खरीफ की फसल के कारण ग्रामीण मांग पर भी करीब नजर रखनी होगी।

उन्होंने कहा, ‘इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में वृद्धि छह फीसदी है और विनिर्माण की वृद्धि दर 5.7 फीसदी है। ये आंकड़ें संकेत देते हैं कि साल में स्थिर वृद्धि होगी और आने वाले कुछ महीनों में यह यथावत रहेगी या स्थितियां बेहतर हो सकती हैं। उपभोग के क्षेत्र में रिकवरी होने के कारण उद्योग सही रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।’

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