Fiscal Deficit: वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) के पहले पांच महीनों में भारत का फिस्कल डेफिसिट (Fiscal deficit) 6.42 लाख करोड़ रुपये रहा। यह पूरे साल के लक्ष्य 17.87 लाख करोड़ रुपये का 36 प्रतिशत है। लेखा महानियंत्रक की तरफ से शुक्रवार को जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली।
पिछले वित्त वर्ष यानी FY23 की इसी अवधि के दौरान फिस्कल डेफिसिट पूरे साल के लक्ष्य का 32.6 फीसदी था। देश का लक्ष्य चालू वित्त वर्ष के अंत तक अपने फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के 5.9 प्रतिशत तक सीमित करना है। यह पिछले साल 6.4 प्रतिशत था।
इसके अलावा प्राथमिक घाटा इस अवधि में 2.75 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पूरे साल के लक्ष्य 7.06 लाख करोड़ रुपये का 38.9 प्रतिशत है। पिछले साल अप्रैल से अगस्त के बीच यह बजटीय अनुमान का 28.2 फीसदी था। प्राथमिक घाटा ब्याज भुगतान के बिना राजकोषीय घाटे को दर्शाता है।
कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शंस बढ़ा
वहीं, 2.84 लाख करोड़ रुपये का राजस्व घाटा पूरे साल के अनुमान 8.70 लाख करोड़ रुपये का 32.7 प्रतिशत रहा। आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-अगस्त की अवधि में नेट टैक्स रेवेन्यू 8.04 लाख करोड़ रुपये या वार्षिक अनुमान का 34.5 प्रतिशत था। यह पिछले साल की समान अवधि के 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
आंकड़ों के मुताबिक, कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शंस सालाना आधार पर 15 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 2.39 लाख करोड़ रुपये हो गया। साथ ही इस दौरान सरकार का कुल खर्च 16.72 लाख करोड़ रुपये रहा। यह वार्षिक लक्ष्य का 37.1 प्रतिशत था, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 13.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में सरकार का कैपिटल एक्सपेंडिचर या बिल्डिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर खर्च 3.74 लाख करोड़ रुपये रहा। यह वार्षिक लक्ष्य का 37.4 प्रतिशत है, जो एक साल पहले इसी अवधि में 2.52 लाख करोड़ रुपये से अधिक था।