facebookmetapixel
Advertisement
Project Cheetah: भारत में चीता परिवार हुआ और बड़ा, कुनो नेशनल पार्क में तीन शावकों ने लिया जन्मGoogle सीईओ पिचाई ने ‘इंडिया-अमेरिका कनेक्ट इनिशिएटिव’ की घोषणा की, बोले- AI हमारे जीवनकाल का सबसे बड़ा बदलावBalanced Advantage Funds में बढ़ा इक्विटी दांव, गिरते वैल्यूएशन के बीच फंड मैनेजरों ने बदली रणनीतिभारत को AI इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाना होगा; टैक्स-छूट की घोषणा बड़ा अवसर: Nvidia‘वैश्विक AI खाई को पाटने की तुरंत जरूरत’: एआई समिट में माइक्रोसॉफ्ट प्रेसिडेंटBaroda BNP Paribas के ELSS फंड का कमाल, ₹10,000 की मंथली SIP से 20 साल में ₹1 करोड़; साथ में मिला टैक्स बेनेफिटदेश की आ​र्थिक सेहत के लिए सोने-चांदी का आयात बना चुनौती! ट्रेड डील से राहत की उम्मीदGovt Scheme: सड़क हादसे के बाद नहीं लगेगा एक भी रुपया! इस सरकारी योजना में मिलेगा 1.5 लाख तक फ्री इलाजStocks To Buy: रोड और इंफ्रा से जुड़े शेयरों में बन सकता है अच्छा मुनाफा, एक्सिस ने ₹275 से ₹1450 तक के दिए टारगेटAadhaar Update: बस एक ‘Hi’ भेजें और मोबाइल पर पाएं आधार कार्ड; जानें डाउनलोड करने का सबसे आसान तरीका

असंगठित क्षेत्र में घट रहा रोजगार सृजन

Advertisement

असंगठित क्षेत्र में रोजगार सृजन घटा, लेकिन प्रतिष्ठानों की संख्या बढ़कर 7.34 करोड़ पहुंची: NSO रिपोर्ट

Last Updated- December 24, 2024 | 10:47 PM IST
Unorganized sector

असंगठित क्षेत्र में अक्टूबर 2023 से सितंबर 2024 की अवधि के दौरान रोजगार सृजन की रफ्तार धीमी रही और इस दौरान अतिरिक्त रोजगार सृजन घटकर 1.09 करोड़ रह गया जबकि अक्टूबर 2022 से सितंबर 2023 की अवधि के दौरान रोजगार के 1.17 करोड़ मौके बने थे। इसके विपरीत असंगठित क्षेत्र में वर्ष 2023-24 की अवधि के दौरान ज्यादा प्रतिष्ठान जुड़े और इनकी तादाद 83.6 लाख थी जबकि वर्ष 2022-23 के दौरान 53.4 लाख नए प्रतिष्ठान असंगठित क्षेत्र से जुड़े थे।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा मंगलवार को ‘असंगठित क्षेत्र उद्यमों का सालाना सर्वेक्षण’ शीर्षक वाली रिपोर्ट जारी की गई जिससे इस बात का अंदाजा मिला है। असंगठित उद्यम वास्तव में ऐसी व्यावसायिक इकाइयां होती हैं जो कंपनी अधिनियम, 1956 या कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत एक अलग वैध इकाई के रूप में कानूनी तरीके से शामिल नहीं की गई हैं। इस तरह के उद्यमों में आमतौर पर छोटे कारोबार, एकल स्वामित्व वाले कारोबार, साझेदारी वाले कारोबार और अनौपचारिक क्षेत्र के कारोबार शामिल हैं।

सर्वेक्षण के आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर 2023 से सितंबर 2024 की अवधि के दौरान असंगठित प्रतिष्ठानों की कुल संख्या 7.34 करोड़ थी जो अक्टूबर 2022 से सितंबर 2023 की अवधि के दौरान 6.50 करोड़ प्रतिष्ठानों की तुलना में अधिक है। इसी तरह असंगठित क्षेत्र में काम पाने वाले कामगारों की कुल संख्या 12.06 करोड़ थी जो इससे पिछले वर्ष की समान अवधि के दौरान 10.96 करोड़ कामगारों की तुलना में अधिक है।

सर्वेक्षण के नतीजे जारी किए जाने के मौके पर मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही के बाद कोविड महामारी का प्रभाव खत्म होने के साथ ही वृद्धि में देखी गई तेजी के प्रभाव को ये आंकड़े दर्शाते हैं। उन्होंने कहा, ‘सरकार की कई पहल के चलते सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम स्तर के उद्यमों को महामारी के दौरान मदद मिली थी जिसके चलते उनके कारोबार में भी स्थिरता देखी गई और जब अर्थव्यवस्था में वृद्धि दिखनी शुरू हुई उसके बाद इन उद्यमों में भी उसी रफ्तार में तेजी देखी जाने लगी। ये सर्वेक्षण इसी बात को इंगित करता है।’

यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ के विजिटिंग प्रोफेसर संतोष मेहरोत्रा कहते हैं कि असंगठित क्षेत्र को अभी नोटबंदी, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और कोविड के कारण देश भर में लगे लॉकडाउन के प्रभाव से पूरी तरह उबरने में वक्त लगेगा। प्रतिष्ठानों की बढ़ती तादाद इसलिए दिख रही है क्योंकि कर्मचारियों की भर्ती कर काम कराने वाले उद्यमों की हिस्सेदारी की तुलना में स्वयं के खाते पर काम करने वाले उद्यमों की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी हुई है।

कर्मचारियों वाले उद्यम का अर्थ यह है कि उसमें नियमित रूप से कम से कम एक व्यक्ति की भर्ती भी काम करने के लिए की गई है। उन्होंने कहा, ‘अर्थव्यवस्था की स्थिति अब भी स्पष्ट रूप से चिंताजनक है क्योंकि जीडीपी वृद्धि दूसरी तिमाही में सपाट रही और ताजा सालाना पीएलएफएस आंकड़े दर्शाते हैं कि खेती से जुड़े लोगों की हिस्सेदारी में करीब 20 लाख की बढ़त देखी गई है। हताशा की स्थिति बनने की वजह से ही लोग अपनी आजीविका के लिए अपने उद्यम स्थापित कर रहे हैं जिसे गलत तरीके से उद्यमशीलता से जोड़ा जा रहा है।’

वर्ष 2023-24 में भर्ती किए गए कामगार के औसत वेतन में वर्ष 2022-23 की तुलना में 13 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई और यह 1,41,000 रुपये हो गया जिससे वेतन के स्तर में सुधार के संकेत मिलते हैं।

Advertisement
First Published - December 24, 2024 | 10:47 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement