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प्रयासों के बावजूद निवेश में वृद्धि 4 तिमाही के निचले स्तर पर

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अर्थव्यवस्था में खपत मांग के तौर पर देखे जाने वाला निजी अंतिम खपत व्यय (पीएफसीई) चौथी तिमाही में मामूली रूप से घटकर 3.98 प्रतिशत हो गया जो दिसंबर की तिमाही में 4.03 प्रतिशत था

Last Updated- May 31, 2024 | 9:55 PM IST
Capital expenditure necessary for strong growth

केंद्र सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय (Capital expenditure) बढ़ाने के जोरदार प्रयासों के बावजूद, सकल स्थायी पूंजी निर्माण (GFCF) चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में चार तिमाहियों के निचले स्तर पर आ गया है। जीएफसीएफ को अर्थव्यवस्था में निवेश की मांग के तौर पर देखा जाता है। वहीं मार्च तिमाही में भारत की निजी खपत मांग में भी कमजोरी देखी गई।

शुक्रवार को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी ताजा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकड़े के मुताबिक जीएफसीएफ चौथी तिमाही में घटकर 6.46 फीसदी हो गया जो तीसरी तिमाही में 9.7 फीसदी था। इससे पहले वित्त वर्ष 2023 की चौथी तिमाही में जीएफसीएफ में 3.75 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।

अर्थव्यवस्था में खपत मांग के तौर पर देखे जाने वाला निजी अंतिम खपत व्यय (पीएफसीई) चौथी तिमाही में मामूली रूप से घटकर 3.98 प्रतिशत हो गया जो दिसंबर की तिमाही में 4.03 प्रतिशत था।

हालांकि सरकारी खर्च को दर्शाने वाला सरकारी अंतिम खपत व्यय (जीएफसीई) में मार्च की तिमाही में (0.89 फीसदी) मामूली वृद्धि देखी गई जबकि इससे पिछली तिमाही में 3.22 फीसदी की गिरावट देखी गई थी।

केयर रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा का कहना है कि मुख्य रूप से सरकार के पूंजीगत खर्च के चलते उम्मीद के अनुरूप व्यय में वृद्धि हुई। उनका कहना है, ‘हमें उम्मीद है कि खपत के रुझान में और सुधार दिख सकता है क्योंकि मॉनसून के सामान्य रहने पर ग्रामीण खपत में भी सुधार होगा। खपत के रुझान में व्यापक सुधार के लिए खाद्य मुद्रास्फीति में नरमी भी महत्वपूर्ण होगी।’

इक्रा रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर भी इस बात से इत्तफाक रखती हैं और उनका कहना है कि जीडीपी वृद्धि में क्रमिक मंदी मुख्यतौर पर निवेश गतिविधि के चलते है भले ही निजी खपत की वृद्धि सामान्य रहने के साथ ही सरकारी खपत व्यय में कमी के बाद मामूली वृद्धि हुई है।

मार्च की तिमाही में नामिनल जीडीपी में पीएफसीई का योगदान 57.9 फीसदी रहा जो एक वर्ष पूर्व समान तिमाही के दौरान 58.2 फीसदी था। इसी तरह जीएफसीएफ की हिस्सेदारी भी घटकर 31.5 फीसदी हो गई जो पिछले साल की समान अवधि के दौरान 32.3 फीसदी थी।

जीडीपी में निवेश की हिस्सेदारी 30 फीसदी से अधिक है जिसे आर्थिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसकी तुलना में इसी तिमाही के दौरान नॉमिनल जीडीपी में जीएफसीएफ की 12.2 फीसदी हिस्सेदारी थी जो एक वर्ष पूर्व समान अवधि के दौरान 12.8 फीसदी थी।

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First Published - May 31, 2024 | 9:49 PM IST

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