facebookmetapixel
Advertisement
क्या बिना PAN के अटक रहा है ITR? मिनटों में बनाएं और डाउनलोड करें डिजिटल e-PANनंदन नीलेकणी से एस. सोमनाथ तक… जानिए परीक्षा सुधार पैनल के 6 विशेषज्ञों की पूरी प्रोफाइलJuniper Green Energy IPO: रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी ला रही ₹1,800 करोड़ का इश्यू, प्राइस बैंड हुआ तय; जानें कब खुलेगामहंगा कच्चा माल… फिर भी रिकॉर्ड कमाई! आखिर कंपनियां कर क्या रही हैं?Gold, Silver Price Today: सोना ₹757 चढ़ा, चांदी ₹2266 चमकी; क्रूड की नरमी ने दिया सपोर्टएक के बाद एक संकट झेलने वाली Gopal Snacks की वापसी? ब्रोकरेज को दिखी 64% तेजीजुलाई में IPO की बरसात, ₹9,275 करोड़ का Manipal Health इश्यू आखिरी बड़ा दांवGIFT City में पड़े लावारिस पैसों के लिए बनेगा खास फंड, जानिए किसे मिलेगा पैसाTCS-Infosys से Wipro तक… 5 दिग्गज IT कंपनियों की रिपोर्ट ने बढ़ाई निवेशकों की चिंताIndiGo का राजस्व 19% बढ़ा, फिर भी ₹240 करोड़ का नुकसान क्यों हुआ?

निर्यातकों को सस्ता कर्ज, लोगों को घर

Advertisement
Last Updated- December 08, 2022 | 6:47 AM IST

देश की विकास दर की रफ्तार को बढ़ाने के मकसद से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में मंत्रियों की उच्च स्तरीय कमिटी की बैठक मंगलवार देर शाम बुलाई गई।


इसमें निर्यातकों को सस्ते और आसान ऋण मुहैया कराने, कम लागत वाले मकान निर्माण और आधारभूत क्षेत्रों के लिए 50,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त फंड की व्यवस्था करने पर विचार किया गया। इस कवायद का मकसद विकास दर को पटरी पर लाना है।

सूत्रों ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि इस बैठक में वित्त सचिव अरुण रामानाथन ने मंत्रियों को अपने सुझाव भी सौंपे। इस प्रस्ताव में आधारभूत क्षेत्रों के लिए 50,000 करोड़ रुपये के फंड की व्यवस्था करना भी शामिल है। इस फंड का संचालन आईआईएफसीएल की ओर से करने की बात कही गई।

हवाई अड्डा, सड़क, बिजली और अन्य आधारभूत परियोजनाएं फंड की किल्लत के चलते अधर में न लटक जाएं, इसलिए इस तरह के फंड की व्यवस्था को जरूरी बताया गया।

इसके साथ ही श्रम आधारित क्षेत्रों- कपड़ा, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, हस्तशिल्प आदि के निर्यातकों को सस्ते और आसान ऋण मुहैया कराने पर भी विचार किया गया।

मौजूदा पोस्ट शिपमेंट क्रेडिट को 90 दिन से बढ़ाकर 180 दिन करने पर भी चर्चा की गई। इस कदम से इस क्षेत्र से जुड़े निर्यातकों को राहत मिलेगी, साथ ही वे चीन, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों के निर्यातकों से मुकाबला कर सकेंगे।

सरकार को यह कदम उठाना इसलिए भी जरूरी लग रहा है, क्योंकि सात साल में पहली बार निर्यात आंकड़ों में गिरावट आई है। हालांकि यह गिरावट डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी की वजह से आई है, लेकिन इसका कारण यूरोपीय देशों और अमेरिका में मांग घटना भी है।

इसके साथ ही सरकार को यह प्रस्ताव भी दिया गया कि सस्ता आवास ऋण उपलब्ध कराने पर जोर देना चाहिए। इससे कंस्ट्रक्शन में काम आने वाले कच्चे माल की भी खपत बढ़ेगी, जिससे अन्य क्षेत्रों का भी विकास होगा।

Advertisement
First Published - December 3, 2008 | 12:00 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement