facebookmetapixel
Advertisement
EPF Scheme 2026: PF के 74 साल पुराने नियम बदले, जानिए आपकी सैलरी और ब्याज पर क्या होगा असरBlaBlaCar से सफर करना कानूनी है या गैरकानूनी? जानिए भारत में Carpooling का पूरा सचव्हाट्सएप के नए ‘यूजरनेम’ फीचर पर सरकार सख्त, मेटा अधिकारियों और IT मंत्रालय के बीच हुई बड़ी बैठकजमीन-मकान खरीदने वाले दें ध्यान! सिर्फ प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री ही काफी नहीं, जानें म्यूटेशन भी क्यों है जरूरी?गिफ्ट सिटी से अब सोने में निवेश का मौका, लॉन्च हुआ पहला फिजिकल कमोडिटी गोल्ड फंडसेना की बढ़ेगी ताकत: सरकार ने ₹52,000 करोड़ के रक्षा सौदे को दी मंजूरी, मिलेंगे घातक हथियारUS में ब्याज दरों पर सेंटीमेंट बदला, क्या सोना ₹1.5 लाख और चांदी ₹2.5 लाख के पार जाएंगे?Explainer: अगर कंपनी दिवालिया हो जाए, तो क्या डूब जाएगा PF, पेंशन और ग्रेच्युटी? जानें कानूनी अधिकारचीन पर बदला भारत का रुख? 4 कंपनियों को सरकारी टेंडर में बोली लगाने की मिली इजाजतHCLTech को मिला 10,830 करोड़ रुपये का बड़ा AI कॉन्ट्रैक्ट, शेयर 4% से ज्यादा उछला

एटी एंड सी के घाटे की भरपाई का लक्ष्य अवास्तविक :योजना आयोग

Advertisement
Last Updated- December 05, 2022 | 4:23 PM IST

संशोधित त्वरित विद्युत विकास और सुधार कार्यक्रम योजना (एपीडीआरपी)के तहत शहरी क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता में हुए 15 प्रतिशत के कुल तकनीक और व्यावसायिक(एटी एंड सी)घाटे को कम करने के लक्ष्य को योजना आयोग ने अवास्तविक करार दिया है। उनका मानना है कि यह घाटा 12,000 करोड रुपये का है और इसकी भरपाई करने में 15 साल लगेंगे।                                                               एपीडीआरपी 2003 से क्रियान्वित है और इसके तहत इस घाटे को 5 सालों में भरने का लक्ष्य रखा गया था। इस योजना के तहत अभी तक कोई वांछित सफलता हासिल नहीं हो सकी है। बहुत सारे मूल्यांकनों के आधार पर भी यह स्पष्ट हुआ है कि इस योजना के तहत अवास्तविक परिणाम आए और वे सारे परिणाम बेतरतीब ढंग से बनाए गए थे।
जबकि इस योजना के नए अवतार, एपीडीआरपी 2, के तहत भी फिर से इस 15 प्रतिशत के घाटे को पाटने के लिए वही पुरानी कवायद जारी है। इस प्रस्ताव के मुताबिक यह योजना केंद्र के अधीन होगी, जबकि इससे पहले की योजना को केवल केंद्र से सहायता मिलती थी। इस संदर्भ में ऊर्जा मंत्रालय ने हाल में एक व्यय वित्त आयोग (ईएफसी) नोट प्रसारित किया है।
योजना आयोग ने कहा है कि इस घाटे की भरपाई करने के लिए एक लोड मिक्स और जनसांख्यिकीय के बीच एक बेहतर तालमेल बनाकर ध्यान केंद्रित करना होगा। आयोग ने बिजली मंत्रालय के इस मांग का भी विरोध किया है, जिसमें लोन सहायता का आग्रह किया गया था। इसके पीछे मंत्रालय का तर्क है कि अगर यह लोन दे दिया जाए तो एपीडीआरपी 2 की मूल विशेषताएं खत्म हो जाएगी, जिसके तहत वितरण में इंसेंटिव निवेश का लक्ष्य था। ऊर्जा मंत्रालय का मानना है कि इस संदर्भ में 50 प्रतिशत लोन केंद्र सरकार को देना चाहिए, लेकिन आयोग मानती है कि अगर ये लोन संस्थागत तौर पर नहीं दिए गए, तो इससे अपेक्षित सफलता नहीं मिलेगी। आयोग पैनल का यह भी मानना है कि 11 किलोवाट से कम के वितरण पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है, क्योंकि इसी तंत्र में घाटा होता है।



 

Advertisement
First Published - February 27, 2008 | 11:36 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement