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कर्ज पुनर्गठन पैकेज मांग रहे वीडियोकॉन प्रवर्तक

Last Updated- December 15, 2022 | 2:43 AM IST

वीडियोकॉन को परिसमापन में जाने से रोकने की आखिरी कोशिश के तहत प्रवर्तकों ने ऋण पुनर्गठन पैकेज की मांग की है जिससे बैंकों को अगले कुछ वर्षों में कंपनी से 33,400 करोड़ रुपये वापस मिलेंगे। कंपनी को दिसंबर 2017 में कर्ज समाधान के लिए राष्ट्रीय कंपनी विधि पंचाट (एनसीएलटी) में भेजा गया था और उसका परिचालन लगभग पूरी तरह बंद हो गया।
लेनदारों की समिति (सीओसी) को बुधवार को प्रवर्तक से ताजा प्रस्ताव मिलने और अन्य विकल्पों पर विचार किए जाने की संभावना है। नया प्रस्ताव आईबीसी की धारा 12ए के तहत किया गया है। यह धारा आईबीसी प्रक्रिया वापस लेने और कंपनी को फिर से प्रवर्तक के हवाले करने (ज्यादातर ऋणदाताओं की सहमति के आधार पर) की अनुमति देती है। चूंकि बैंकों को किसी अन्य पक्ष से कंपनी के लिए व्यवहार्य पेशकश हासिल नहीं हुई है, इसलिए सीओसी गुरुवार को कंपनी के भाग्य पर बहस करेगी।
कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स का पूरा व्यवसाय संपूर्ण कर्ज के साथ नए खंड में स्थानांतरित किया जाएगा। प्रवर्तक वी एन धूत ने बैंकों को लिखे पत्र में कहा है कि जहां 15,000 करोड़ रुपये का कर्ज ब्याज बढ़ाएगा, वहीं बैंकों को 18,389 करोड़ रुपये के शेष कर्ज  पर ब्याज छोडऩा होगा।
करीब 10,000 करोड़ रुपये के मौजूदा कर्ज के साथ होम अप्लायंसेज व्यवसाय को नई कंज्यूमर ड्यूरेबल कंपनी में स्थानांतरित किया जाएगा।
रुपये के संदर्भ में 8,000 करोड़ रुपये के ऋण की मूल अदायगी नई कंपनी में पुनर्गठित की जाएगी और इसे 1 मार्च 2021 से 144 मासिक किस्तों में चुकाया जाएगाा।
इस ऋण पर ब्याज आखिरी भुगतान प्राप्ति तक मासिक आधार (2 प्रतिशत से लेकर 13.97 प्रतिशत सालाना के साथ अलग अलग) पर चुकाया जाएगा और बैंकों को करीब 9 प्रतिशत का प्रतिफल मिलेगा।
18,389 करोड़ रुपये के शेष कर्ज में से 4,757 करोड़ रुपये (तेल एवं गैस खंड से संबंधित) के गैर-ब्याज संबंधित बॉन्डों की योजना है। ये बॉन्ड पुनर्गठन पैकेज के लागू होने से 90 दिन के अंदर जारी किया जाएगा।
इसके अलावा कंपनी द्वारा इस साल मार्च तक गैर-भुगतान वाले ब्याज पर 4,032 करोड़ रुपये के जीरो कूपन बॉन्ड जारी किए जाएंगे। ये बॉन्ड वर्ष 2036 से भुनाए जाएंगे। आखिर में, अन्य चरण के तहत 2,100 करोड़ रुपये के जीरो कूपन बॉन्ड जारी किए जाएंगे। इन बॉन्डों को मार्च 2036 से भुनाया जाएगा। 31 अगस्त की इस पेशकश में कहा गया कि 2जी टेक्नोलॉजी आधारित दूरसंचार लाइसेंस रद्द करने के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से कंपनी प्रभावित हुई थी और इसकी वजह से उसे 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
इसके अलावा कैथॉड रे ट्यूब टीवी और रियल एस्टेट क्षेत्र में मांग घटने से भी नकदी प्रवाह प्रभावित हुआ।
इन सभी झटकों और नुकसान के बावजूद, वीडियोकॉन समूह का कहना है कि उसने निर्धारित समय के अंदर किसी रियायत के बगैर मई 2016 तक कर्ज चुकाया। मई 2016 के आसपास, वीडियोकॉन समूह के खातों को संयुक्त ऋणदाताओं के फोरम (जेएलएफ) द्वारा स्पेशल मेंशन अकाउंट (एसएमए-2) घोषित किया गया था। उसके बाद समयबद्घ तरीके से कदम उठाए जाने के लिए जेएलएफ के साथ बैठकें की गई थीं।

First Published - September 2, 2020 | 12:29 AM IST

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