वेदांता लिमिटेड (Vedanta Limited) चालू वित्त वर्ष के अंत तक अपनी स्टील संपत्तियों की बिक्री पूरी कर लेगी। वेदांत के चेयरमैन अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) ने मंगलवार को ब्लूमबर्ग के साथ बातचीत में यह बात कही।
कंपनी ने अपने स्टील और स्टील कच्चे माल के कारोबार की समीक्षा शुरू कर दी है। यह कंपनी 2018 में 5,230 करोड़ रुपये में ईएसएल स्टील के अधिग्रहण के जरिये बनाई गई थी। ग्रुप अपने मुख्य माइनिंग बिजनेस पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कंपनी को बेचने की कोशिश कर रहा है।
अलग-अलग 6 कंपनी बनाएंगी वेदांत
वेदांता ने पिछले सप्ताह कहा था कि उसके बोर्ड ने एक प्यूर-प्ले, ऐसेट-ओनर बिजनेस मॉडल को मंजूरी दे दी है। इसके तहत छह अलग-अलग सूचीबद्ध कंपनियां बनाई जाएंगी। इस पुनर्गठन के अगले 12 से 15 महीनों में पूरा होने की उम्मीद है।
इसकी मूल कंपनी वेदांता रिसोर्सेज पर 6.4 अरब डॉलर के बकाया कर्ज को लेकर चिंता के कारण कंपनी की रेटिंग में गिरावट देखी गई।
प्रस्तावित योजना में वेदांता लिमिटेड के अलावा पांच नई सूचीबद्ध कंपनियां – वेदांता एल्युमीनियम, वेदांता ऑयल एंड गैस, वेदांता पावर, वेदांता स्टील एंड फेरस मटेरियल्स और वेदांता बेस मेटल्स शामिल हैं। अग्रवाल ने कहा, “हमारा मानना है कि डीमर्जर से प्रत्येक कार्यक्षेत्र में तेजी से विकास के लिए मूल्य और क्षमता का पता चलेगा।
सीएनबीसी-टीवी18 के साथ एक इंटरव्यू में अग्रवाल ने कहा कि स्टील और लौह कारोबार को मिली प्रतिक्रिया से कंपनी को कर्ज कम करने में मदद मिलेगी। वेदांता के स्टील कारोबार में घरेलू लौह अयस्क व्यवसाय, लाइबेरिया संपत्तियां और ईएसएल स्टील लिमिटेड शामिल होंगे।
वेदांत की धन जुटाने की कोशिश
बता दें कि वेदांता रिसोर्सेज रेटिंग में गिरावट और अपने ऋण दायित्वों को पूरा करने की चिंताओं के कारण धन जुटाने के लिए संघर्ष कर रही है। इससे पहले, कंपनी ने 2.98 अरब डॉलर के सौदे में हिंदुस्तान जिंक को मूल समूह की कुछ जिंक संपत्ति खरीदने के लिए समूह का कर्ज कम करने की कोशिश की थी। हिंदुस्तान जिंक वेदांता लिमिटेड की एक इकाई है।
हालांकि, इस योजना का केंद्र सरकार ने विरोध किया था। दरअसल सरकार की हिंदुस्तान जिंक में लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इस बीच वेदांत का शेयर मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स पर 3.7 प्रतिशत बढ़कर 230.8 रुपये पर बंद हुआ।