facebookmetapixel
Advertisement
BS Manthan 2026: ITC प्रमुख संजीव पुरी ने कहा- आयकर और GST में कटौती से बढ़ी बाजार में खपतBS Manthan 2026: टेलीकॉम उपकरणों के लिए डिक्सन की नजर मध्य प्रदेश परVision 2047: प्रो. एस. महेंद्र देव ने ‘मंथन’ में बताया विकसित भारत का रास्ता; विकास, समावेश और स्थिरता पर जोरBS Manthan में सुमन बेरी ने कहा: उत्पादकता में चीन से काफी पीछे है भारत, पूंजी बढ़ाने की है सख्त जरूरतBS Manthan में बोले कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान: खाद सब्सिडी सीधे किसानों को देने पर चर्चा होBS Manthan 2026: AI के बढ़ते उपयोग के बीच एक्सपर्ट्स ने की ‘राष्ट्रीय ग्रीन डेटा सेंटर नीति’ की मांगBS Manthan 2026: एथर एनर्जी के CEO तरुण मेहता ने PLI स्कीम के नियमों में सुधार की उठाई मांगचीन से निवेश और तकनीक आकर्षित करने के लिए नियमों की समीक्षा को तैयार है भारत: गोयलBS Manthan 2026: एआई से कितनी कमाई, सवाल उठा सकते हैं अमेरिकी बाजारBS Manthan में गडकरी का बड़ा ऐलान: राजमार्ग निर्माण में अब BOT मॉडल को मिलेगी सर्वोच्च प्राथमिकता

अनलिस्टेड कंपनियों का उभार: ₹8.9 लाख करोड़ का रेवेन्यू; रिलायंस रिटेल टॉप पर

Advertisement

जेएम फाइनैंशियल और हुरुन इंडिया द्वारा जारी ‘अनलिस्टेड जेम्स 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, देश की शीर्ष निजी कंपनियों ने FY25 में मिलकर ₹8.9 लाख करोड़ का राजस्व हासिल किया

Last Updated- February 24, 2026 | 10:56 PM IST
Reliance Retail

राजस्व के मामले में रिलायंस रिटेल को देश की सबसे बड़ी गैर-सूचीबद्ध कंपनी आंका गया है। दूसरे स्थान पर फ्लिपकार्ट रही, जिसका राजस्व 83,000 करोड़ रुपये है, जबकि मालाबार गोल्ड ऐंड डायमंड 66,000 करोड़ रुपये के राजस्व के साथ तीसरे स्थान पर रही।

जेएम फाइनैंशियल और हुरुन इंडिया द्वारा जारी ‘अनलिस्टेड जेम्स 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, देश की शीर्ष निजी कंपनियों ने वर्ष 2025 में मिलकर 8.9 लाख करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया। इस सूची में 100 प्रमुख निजी कंपनियां शामिल हैं जिनका वार्षिक राजस्व 1,000 करोड़ रुपये से अधिक है। यह भारत के गैर सूचीबद्ध कॉरपोरेट क्षेत्र के बढ़ते आकार और मुनाफे को दर्शाता है और भविष्य में संभावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की मजबूत संभावना के संकेत देता है।

राजस्व वृद्धि के मामले में सबसे तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स शीर्ष पर रही, जिसने 3,173 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि दर दर्ज की। इसके बाद टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ने 904 फीसदी और जेएसडब्ल्यू वन प्लेटफॉर्म्स ने 522 फीसदी की वृद्धि दर्ज की। इन कंपनियों की तेज वृद्धि से यह स्पष्ट होता है कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) और डिजिटल बी2बी कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है।

मुनाफे के मामले में भी रिलायंस रिटेल सबसे आगे रही। कंपनी ने 22,573 करोड़ रुपये का सबसे अधिक एबिटा दर्ज किया। इसके बाद अदाणी प्रॉपर्टीज 11,332 करोड़ रुपये और जेरोधा ब्रोकिंग 5,664 करोड़ रुपये के एबिटा के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। इन 100 कंपनियों ने मिलकर कुल 1.03 लाख करोड़ रुपये का संयुक्त एबिटा अर्जित किया।

जेएम फाइनैंशियल के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक विशाल कंपानी ने कहा कि यह सूची भारत की विकास गाथा में शक्तिशाली लेकिन अक्सर कम आंके गए क्षेत्र के महत्त्व को दर्शाती है।

उन्होंने कहा, ‘ये 100 गैर-सूचीबद्ध कंपनियां भारतीय उद्यमिता की उत्कृष्ट मिसाल हैं। इन्होंने अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में गहराई और अनुशासन के साथ काम करते हुए आकार, मजबूती और मूल्य निर्माण का परिचय दिया है। सामूहिक रूप से ये भारत के संस्थागत व्यापारिक ढांचे की बढ़ती ताकत और परिपक्वता को दर्शाती हैं।’

रिपोर्ट पर हुई चर्चा के दौरान जेएम फाइनैंशियल और हुरुन इंडिया के प्रतिनिधियों ने कहा कि भारत की अगली पीढ़ी की आईपीओ उम्मीदवार कंपनियों को सार्वजनिक बाजार में आने से पहले राजस्व की स्थिरता, मुनाफे की स्पष्टता और तिमाही नतीजों की जांच-परख झेलने की क्षमता दिखानी होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि निजी से सार्वजनिक स्वामित्व में बदलाव केवल बेहतर मूल्यांकन पाने का अवसर नहीं है बल्कि इसके लिए पूरी तैयारी और मजबूत बुनियाद की आवश्यकता होती है।

विशाल कंपानी ने कहा, ‘जब आप शेयर बाजार में सूचीबद्ध होते हैं तब इसमें तैयारी सबसे महत्वपूर्ण कारक होती है। निजी कंपनी में आप केवल बोर्ड के सदस्यों और कुछ निवेशकों को ही मार्गदर्शन देते हैं। अगर रणनीति में बदलाव करना हो तब वह सिर्फ एक बोर्ड मीटिंग का मामला होता है। लेकिन जब आप सार्वजनिक कंपनी होते हैं और दिशानिर्देश देते हैं तब वह पूरे सार्वजनिक निवेशक समुदाय के लिए होता है।’

उन्होंने कहा कि कंपनियों को तभी सूचीबद्धता के बारे में सोचना चाहिए जब उनके राजस्व चक्र स्थिर हो जाएं और वे या तो मुनाफे में हों या मुनाफे के करीब पहुंच चुकी हों। आकार भी बेहद महत्वपूर्ण है। कंपानी के अनुसार, ‘मुख्य बोर्ड आईपीओ के लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये का राजस्व ‘न्यूनतम’ सीमा माना जाता है।’

छोटी कंपनियां आमतौर पर पूंजी जुटाने के लिए निजी बाजारों या एसएमई एक्सचेंज का सहारा लेती हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन 100 कंपनियों का कुल शुद्ध लाभ वर्ष 2023 के लगभग 13,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025 में 35,900 करोड़ रुपये हो गया। यह बेहतर परिचालन दक्षता और मांग में तेजी के संकेत देता है। इन कंपनियों का संयुक्त मूल्यांकन 28.5 लाख करोड़ रुपये है और ये लगभग 12 लाख लोगों को रोजगार देती हैं जो अर्थव्यवस्था में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।

अधिकांश कंपनियों की बैलेंसशीट भी मजबूत बनी हुई है। करीब 65 फीसदी कंपनियों का ऋण-इक्विटी अनुपात 1 गुना से कम है। हालांकि, कुछ ज्यादा कर्ज वाली कंपनियों के कारण कुल औसत अनुपात थोड़ा अधिक दिखाई देता है। इस सूची में तेजी से बढ़ रहे स्टार्टअप और डिजिटल-फर्स्ट कारोबार जैसे ‘डेहाट’ भी शामिल हैं। यह दर्शाता है कि पारंपरिक और नई अर्थव्यवस्था की कंपनियां बड़े स्तर तक पहुंचते हुए भी निजी बनी हुई हैं।

Advertisement
First Published - February 24, 2026 | 10:53 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement