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लगता है सबसे बुरा वक्त गुजर गया: टाटा स्टील

टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी टीवी नरेंद्रन तथा कार्यकारी निदेशक और मुख्य वित्तीय अधिकारी कौशिक चटर्जी ने भविष्य के योजनाओं पर बात की।

Last Updated- May 13, 2025 | 10:34 PM IST
Tata Steel
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

टाटा स्टील द्वारा वित्त वर्ष 25 की चौथी तिमाही में अपना समेकित शुद्ध लाभ दोगुना होने की जानकारी देने के एक दिन बाद प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी टीवी नरेंद्रन तथा कार्यकारी निदेशक और मुख्य वित्तीय अधिकारी कौशिक चटर्जी ने ईशिता आयान दत्त के साथ प्रदर्शन से लेकर ऋण में कमी और पूंजीगत व्यय तक कई मुद्दों पर चर्चा की। प्रमुख अंश ..

वित्त वर्ष 25 की चौथी तिमाही में टाटा स्टील के शुद्ध लाभ में पिछले साल की तुलना में 112.7 प्रतिशत की उछाल आई। प्रदर्शन के क्या कारण रहे?

नरेंद्रन : यूरोप में पिछली कुछ तिमाहियों के दौरान नीदरलैंड का एबिटा ऋणात्मक से धनात्मक हो गया। एबिटा के लिहाज ब्रिटेन में बहुत सुधार नहीं हुआ है, लेकिन सुधार शुरू हो जाएगा। हमें लागत में कमी के सभी असर दिखेंगे। हमने मार्जिन तथा स्प्रेड को स्थिर होते और थोड़ा सुधरते देखा है क्योंकि पिछली तिमाही में कोकिंग कोल की कीमतें कम हो गई थीं। भारत में सुरक्षा शुल्क के कारण स्टील की कीमतें स्थिर हो गईं और बढ़ने लगीं। कुल मिलाकर वॉल्यूम में इजाफा हुआ है। नीदरलैंड में पिछले साल के मुकाबले वॉल्यूम में खासा इजाफा हुआ है। भारत में कलिंगनगर के कारण वॉल्यूम बढ़ा है।

ब्रिटेन में एबिटा घाटा आपका भारी खर्च वाला परिचालन बंद होने के बावजूद सालाना और तिमाही दोनों आधार पर बढ़ा है। आप कब तक घाटे से निकल कर लाभ में आ जाएंगे?

नरेंद्रन : हम पिछले वर्ष 20 करोड़ पाउंड से ज्यादा की स्थायी लागत कम कर चुके हैं। हम इस वर्ष 20 करोड़ पाउंड और कम करेंगे। लेकिन पिछले वर्ष के अधिकांश समय में हमारे ब्लास्ट फर्नेस चल रहे थे। स्थायी लागत कम करने का असर अब दिखेगा। लेकिन हमें उम्मीद है कि स्थिति बदलेगी और हम उम्मीद करते हैं कि इस साल के दौरान ब्रिटेन का एबिटा तटस्थ या एबिटा धनात्मक रहेगा।

चटर्जी : अगर हम वित्त वर्ष 24 की चौथी तिमाही की तुलना वित्त वर्ष 25 की चौथी तिमाही से से करें तो कीमतों में करीब 4,200 रुपये प्रति टन की गिरावट आई है। यह ब्रिटेन के दृष्टिकोण से बड़ा बदलाव है। वित्त वर्ष 24 के दौरान ब्रिटेन में स्थायी लागत तकरीबन 95.5 करोड़ पाउंड थी और वित्त वर्ष 25 में यह करीब 75 करोड़ पाउंड है। इस तरह लागत में भारी कमी आई है।

आंतरिक लागत परिवर्तन कार्यक्रम के कारण वित्त वर्ष 25 में करीब 6,600 करोड़ रुपये की बचत हुई। वित्त वर्ष 26 में किस तरह की बचत की उम्मीद है?

चटर्जी : तीन क्षेत्रों – भारत, ब्रिटेन और नीदरलैंड में लागत में 6,600 करोड़ रुपये की कमी की गई है। अगले 12 से 18 महीनों के दौरान 11,000 करोड़ रुपये से अधिक का लक्ष्य है।

भारत में सुरक्षा शुल्क की वजह से स्टील की कीमतें बढ़ी हैं। यूरोप में भी बढ़ी हैं। क्या फिर मजबूती आ रही है?

नरेंद्रन : यूरोप में दो कारणों से स्प्रेड में कुछ सुधार हुआ है। पहला, यूरोपीय संघ ने कोटा सख्त कर दिया है ताकि अमेरिकी कार्रवाई के कारण आयात में बाढ़ न आए। इससे मनोबल स्थिर करने में मदद मिली है। दूसरा, स्प्रेड में सुधार हुआ है क्योंकि कोयले (कोकिंग) की कीमतें कमी हुई है। तीसरा मध्य से लंबी अवधि का प्रभाव है। अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच टकराव के कारण यूरोपीय संघ अपने स्वयं के रक्षा उद्योग, विनिर्माण, बुनियादी ढांचे के निर्माण पर बहुत अधिक खर्च करने जा रहा है और यह यूरोप में स्टील की खपत के लिए सकारात्मक है। इसका इस साल हम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है, लेकिन कुल मिलाकर हमें लगता है कि बुरा वक्त गुजर चुका है।

सकल ऋण दिसंबर 2024 के आखिर में 98,919 करोड़ रुपये था, इसकी तुलना में यह मार्च 2025 के आखिर में घटकर 94,804 रुपये हो गया है। वित्त वर्ष 26 में आप इसे किस स्तर पर देखते हैं?

चटर्जी : हम यह लक्ष्य रखेंगे कि सकल ऋण 90,000 करोड़ रुपये से नीचे आ जाए। सितंबर में शुद्ध ऋण का चरम स्तर करीब 88,000 करोड़ रुपये था जबकि हमने वर्ष का समापन तकरीबन 82,000 करोड़ रुपये से किया। इसलिए पिछले छह महीनों में हम शुद्ध ऋण के नजरिये से करीब 6,000 करोड़ रुपये कम कर चुके हैं। यह सफर जारी रहेगा।

First Published - May 13, 2025 | 10:26 PM IST

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