facebookmetapixel
‘हमें अमेरिकी बनने का कोई शौक नहीं’, ग्रीनलैंड के नेताओं ने ट्रंप की बात को ठुकराया, कहा: हम सिर्फ ‘ग्रीनलैंडर’Bonus Issue Alert: अगले हफ्ते दो कंपनियां अपने निवेशकों को देंगी बोनस शेयर, रिकॉर्ड डेट फिक्सDMart Q3 Results: Q3 में मुनाफा 18.28% बढ़कर ₹855 करोड़ के पार, रेवेन्यू ₹18,100 करोड़ पर पहुंचाभारत पहुंचे US के नए राजदूत गोर,कहा: वापस आकर अच्छा लग रहा, दोनों देशों के सामने कमाल के मौकेCorporate Action: स्प्लिट-बोनस-डिविडेंड से बढ़ेगी हलचल, निवेशकों के लिए उत्साह भरा रहेगा अगला हफ्ताIran Protest: निर्वासित ईरानी शाहपुत्र पहलवी का नया संदेश- विरोध तेज करें, शहरों के केंद्रों पर कब्जे की तैयारी करें350% का तगड़ा डिविडेंड! 5 साल में 960% का रिटर्न देने वाली कंपनी का निवेशकों को जबरदस्त तोहफाSuzuki ने उतारा पहला इलेक्ट्रिक स्कूटर e-Access, बुकिंग हुई शुरू! जानें कीमत65 मौतें, 2311 गिरफ्तारी के बाद एक फोन कॉल से सरकार विरोधी प्रदर्शन और तेज….आखिर ईरान में हो क्या रहा है?US Visa: अमेरिकी वीजा सख्ती ने बदला रुख, भारतीय एग्जीक्यूटिव्स की भारत वापसी बढ़ी

टाटा पावर को विदेशी कोयले की दरकार

Last Updated- December 07, 2022 | 12:01 PM IST

भारत की निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी बिजली निर्माता कंपनी टाटा पावर लिमिटेड कोयले और कच्चे माल की कमी के दौर से निपटने के लिए इनकी आपूर्ति बरकरार रखने की जुगत भिड़ा रही है।


इसके लिए कंपनी  40 लाख टन कोयले की आपूर्ति के मद्देनजर विदेश में दो कोयला खदानों में निवेश कर सकती है। कंपनी के कार्यकारी निदेशक एस रामकृष्णन ने बताया कि टाटा पावर 2013 तक अपनी बिजली उत्पादन क्षमता 5 गुना कर देगी। इसके लिए उसे तकरीबन 80 लाख टन अतिरिक्त कोयले की जरूरत होगी।

लगभग 40 लाख टन कोयले की आपूर्ति उसे ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया या मोजांबिक की खदानों से होने की उम्मीद है। टाटा पावर ने पिछले साल इंडोनेशिया की दो खदानों में लगभग 1.2 अरब डॉलर का निवेश किया था। कोयले की कीमत बढ़ने के साथ ही जेएसडब्ल्यू एनर्जी लिमिटेड और अदानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड जैसी कंपनियों ने भी विदेशी कोयला खदानों में निवेश किया है। रामकृष्णन ने बताया, ‘कोयले की कीमतों से तो पूरी दुनिया परेशान है, इसलिए हम दो कोयला खदानों के मालिक होने के बाद भी लंबी अवधि के लिए सौदे करने में ही यकीन रख रहे हैं।

अगर यही हालत बरकरार रहती है, तो हमें आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कुछ खदानों में हिस्सेदारी खरीदनी पड़ेगी।’ उन्होंने कहा कि कोयले की कीमतें अगले तीन साल तो रिकॉर्ड स्तर पर ही बने रहने की संभावना है। आयातित कोयले से कंपनी को अपनी क्षमता पांच गुनी यानी लगभग 12,861 मेगावाट तक करने में पूरी मदद मिलेगी। भारत और चीन में ऊर्जा की मांग बेहद तेजी के साथ बढ़ रही है। दरअसल यहां की अर्थव्यववस्थाएं जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही हैं, उसकी वजह से औद्योगिक गतिविधियां भी काफी तेज हैं और उनकी जरूरत पूरी करने के लिए भारी मात्रा में बिजली की दरकार है।

First Published - July 18, 2008 | 12:36 AM IST

संबंधित पोस्ट