एसकेएफ इंडिया की नई और अलग हुई औद्योगिक इकाई तेजी से वृद्धि का लक्ष्य लेकर चल रही है। कंपनी को उम्मीद है कि बड़ा निवेश चक्र पूरा करने और परिचालन लाभ को बढ़ावा देने के साथ ही वह पांच वर्षों के भीतर अपने राजस्व को लगभग दोगुना कर लेगी।
एसकेएफ इंडिया के 1 अक्टूबर से प्रभावी हुए सांविधिक विभाजन के बाद औद्योगिक कारोबार उसकी स्वतंत्र इकाई बन गया है और 5 दिसंबर को शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुआ है। न्यायालय से मंजूर अनुमोदित व्यवस्था योजना के तहत मौजूदा शेयरधारकों को एसकेएफ इंडिया लिमिटेड में रखे गए प्रत्येक शेयर के बदले एसकेएफ इंडिया (इंडस्ट्रियल) लिमिटेड का एक शेयर मिलेगा। इसके बाद कंपनी का परिचालन को दो केंद्रित कंपनियों एसकेएफ ऑटोमोटिव और एसकेएफ इंडिया (इंडस्ट्रियल) में विभाजित कर दिया गया। उसका घोषित उद्देश्य सेक्टर कीविशिष्ट रणनीतियों को और बेहतर बनाना और शेयरधारकों के लिए मूल्य बढ़ाना है।
एसकेएफ इंडिया (इंडस्ट्रियल) के अध्यक्ष (भारत और दक्षिण पूर्व एशिया) एवं प्रबंध निदेशक मुकुंद वासुदेवन ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि औद्योगिक कारोबार ने वित्त वर्ष 2025 में करीब 2,600 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया और आर्थिक वृद्धि तथा बाजार हिस्सेदारी में बढ़ोतरी के कारण अगले पांच वर्षों में यह बढ़कर करीब 4,500 करोड़ रुपये हो सकता है।
दशक के अंत तक वृद्धि को पूंजीगत व्यय से बल मिलेगा। औद्योगिक व्यवसाय की योजना 2030 तक 800 से 950 करोड़ रुपये निवेश करने की है, जिसमें से अधिकांश खर्च विनिर्माण क्षमता के विस्तार पर होगा।