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आईबीबीआई के सुझाए समूह से होगी समाधान पेशेवरों की नियुक्ति

Last Updated- December 11, 2022 | 11:06 PM IST

समाधान पेशेवरों की नियुक्ति में होने वाली देरी को टालने के लिए भारतीय ऋणशोधन अक्षमता और दिवालिया बोर्ड (आईबीबीआई)  निर्णय लेने वाले प्राधिकरण को योग्य पेशेवरों की सूची मुहैया कराने पर विचार कर रहा है। प्राधिकरण इनमें से पेशेवरों का चुनाव कर सकता है।
आईबीबीआई ने अपने नए दिशानिर्देशों में कहा है कि वह ऋणशोधन अक्षमता पेशवेरों (आईपी) का एक समूह तैयार करेगा जिसे  हर छह महीने पर अद्यतन किया जाएगा। बोर्ड ने आईपी को समूह में एक व्यवस्थित क्रम में रखने के लिए एक कलन विधि भी तैयार की है। चालू प्रक्रियाओं की न्यूनतम संख्या वाले आईपी को 100 अंक दिए जाएंगे और उन्हें समूह में शीर्ष पर रखा जाएगा। चालू प्रक्रियाओं की सर्वाधिक संख्या वाले आईपी को शून्य अंक दिया जाएगा।
राष्ट्रीय कंपनी कानून पंचाट और ऋण वसूली अधिकरण दोनों ही समूह से कॉर्पोरेट देनदारों से संबंधित सीआईआरपी, परिसमापन प्रक्रिया, दिवालिया समाधान या ऋणशोधन अक्षमता प्रक्रिया के लिए आईआरपी, परिसमापक, आरपी और कॉर्पोरेट देनदारों को व्यक्तिगत गारंटीदाताओं के लिए किसी भी नाम का चयन कर सकेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे अधिक संख्या में पेशेवरों को काम का अवसर मिलेगा और उनके लिए समान अवसर मुहैया होंगे। इकोनॉमिक लॉज प्रैक्टिस में वरिष्ठ पार्टनर शिवप्रकाशम बाबू ने कहा, ‘आईबीबीआई ने आईपी का समूह तैयार करने के लिए अच्छी तरह से सोच समझकर तरीका निकाला है। इसकी बहुत अधिक आवश्यकता थी। इससे निश्चित तौर पर सभी आरपी के लिए समान अवसर तैयार करने का रास्ता निकलेगा और समानता आएगी और साथ ही एक समय के बाद आरपी की एक गुणवत्तायुक्त समूह को विस्तार देने में मदद मिलेगी।’ संहिता की धारा 16(3)(ए) के तहत निर्णय लेने वाले प्राधिकरण को आईपी की सिफारिश के लिए बोर्ड को एक संदर्भ देना होता है। यह आईपी ऐसे मामलों में अंतरिम समाधान पेशेवर (आईआरपी) के तौर पर काम करता है जिनमें किसी परिचालित कर्जदार ने सीआईआरपी आवेदन किया है और किसी आईआरपी का प्रस्ताव नहीं दिया है।
इंडस लॉ में पार्टनर सुष्मिता गांधी ने कहा, ‘अधिसूचित नए दिशानिर्देशों के तहत निर्णय लेने वाले प्राधिकरण को आईबीबीआई द्वारा तैयार किए गए योग्य आईआरपी, आरपी और परिसमापकों के समूह में से नियुक्तियां करने के लिए सीधे तौर पर सशक्त किया गया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि इससे निर्णय लेने वाले प्राधिकरणों द्वारा आईआरपी/आरपी और परिसमापकों की नियुक्तियों में लगने वाले समय में कमी आएगी।’

First Published - December 2, 2021 | 11:47 PM IST

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