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एजीआर पर पीएसयू को राहत

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Last Updated- December 15, 2022 | 1:21 PM IST

ऑयल इंडिया, गेल और पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन सहित सार्वजनिक उपक्रमों को उच्चतम न्यायालय के निर्देश से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) से समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) भुगतान की मांग पर दूरसंचार विभाग को पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है। दूरसंचार विभाग ने 24 अक्टूबर, 2019 के अदालत के आदेश के अनुसार इन पीएसयू को लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क का बकाया न केवल दूरसंचार संबंधित राजस्व के आधार पर बल्कि कुल राजस्व के हिसाब से चुकाने को कहा था।
विभाग ने गेल से 1.83 लाख करोड़ रुपये और ऑयल इंडिया से 48,489 करोड़ रुपये की मांग की थी। बकाया राशि की गणना में उनके तेल एवं गैस कारोबार से होने वाले राजस्व को भी शामिल किया गया है। इसी तरह पावर ग्रिड को 21,953.65 करोड़ रुपये का भुगतान करने को कहा गया और गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर ऐंड केमिकल्स को 15,019.97 करोड़ रुपये देनदारी का नोटिस भेजा गया था। रेल टेल और दिल्ली मेट्रो से भी इसी तरह की मांग की गई थी।
शीर्ष अदालत ने दूरसंचार विभाग को आज कहा कि वे पीएसयू से बकाया मांग पर पुनर्विचार करे। अदालत ने विभाग से पूछा कि पीएसयू से किस आधार पर बकाया मांगा गया है जबकि हमारा आदेश पीएसयू से संबंधित ही नहीं था।
अदालत ने सख्त लहजे में कहा, ‘हमारे आदेश में सार्वजनिक उपक्रमों के बारे में कुछ नहीं कहा गया था। ऐसे में पीएसयू से मांग करने का किसने अधिकारी दिया? हमारे आदेश के नाम पर यह सब क्या हो रहा है…पीएसयू से मांग को वापस लिया जाना चाहिए। जब हमारे आदेश में उस पर चर्चा ही नहीं हुई तब भी उनसे बकाया कैसे मांगा जा सकता है। सरकार को यह बताना चाहिए कि हमारे आदेश का इस मकसद में कैसे इस्तेमाल किया गया। यह आदेश का दुरुपयोग है।’
दूरसंचार विभाग ने गेल और अन्य गैर-दूरसंचार पीएसयू से कुल 2.7 लाख करोड़ रुपये का एजीआर मांगा है। 4 मार्च को अदालत ने एजीआर पर अपने आदेश से पीएसयू को अलग कर दिया था और उन्हें समुचित मंच पर राहत की मांग करने का निर्देश दिया था। दूरसंचार कंपनियों – भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को के लिए अदालत ने भुगतान का खाका प्रस्तुत करने को कहा था। इसके जवाब में दोनों कंपनियों ने कहा कि उन्हें एजीआर बकाया भुगतान के लिए कुछ समय दिया गया है और अगर भुगतान नहीं हो पाता है तो सरकार उनके दूरसंचार लाइसेंस को रद्द कर सकती है। इस पर अदालत ने कहा, ‘अगले 20 साल किसी ने नहीं देखे हैं, केवल वादे के आधार पर मोहलत नहीं दी जा सकती।’ भारती एयरटेल ने कहा कि उसने 18,000 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है।
वोडाफोन आइडिया पर 53,000 करोड़ रुपये की देनदारी है। उसने कहा कि उसके पास भुगतान करने के लिए पैसे नहीं हैं और उसे कुछ समय दिया जाना चाहिए। उसने यह भी कहा कि अगर भुगतान करने में कंपनी विफल रहती है तो लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
शीर्ष अदालत ने पीएसयू से एजीआर बकाया मांगने पर दूरसंचार विभाग के निर्णय पर सवाल खड़े किए। केंद्र सरकार ने दूरसंचार कंपनियों और सार्वजनिक उपक्रमों के बीच लाइसेंस में अंतर होने की बात स्वीकार की।
न्यायालय ने दूरसंचार विभाग को आदेश के तीन दिनों के भीतर मांग रखने पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा। न्यायालय ने दूरसंचार कंपनियों से पूछा कि क्या वे लाइसेंस रद्द होने की स्थिति में बैंक गारंटी जमा करने के लिए तैयार हैं। न्यायालय में अब एजीआर मामले की सुनवाई 18 जून को होगी।

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First Published - June 11, 2020 | 10:44 PM IST

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