facebookmetapixel
Advertisement
तेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौतीपश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, रणनीतिक तेल भंडार विस्तार प्रक्रिया तेजGST कटौती से बढ़ी मांग, ऑटो और ट्रैक्टर बिक्री में उछाल: सीतारमणसरकार का बड़ा फैसला: पीएनजी नेटवर्क वाले इलाकों में नहीं मिलेगा एलपीजी सिलिंडर

रिलायंस इंडस्ट्रीज को 2.81 अरब डॉलर का नोटिस

Advertisement

यह डिमांड नोटिस 14 फरवरी के दिल्ली उच्च न्यायालय के हालिया आदेश के बाद दिया गया

Last Updated- March 04, 2025 | 10:31 PM IST
Reliance Industries Limited

मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) ने मंगलवार को एक्सचेंजों को बताया कि उसे केजी-डी6 परिचालन से जुड़े अरसे से लंबित गैस विवाद पर तेल मंत्रालय से 2.81 अरब डॉलर का नोटिस मिला है। स्टॉक एक्सचेंज को दी गई एक अन्य घोषणा में आरआईएल ने यह भी कहा कि उसकी नई ऊर्जा कारोबार वाली पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी को भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) से पत्र मिला है, जो बैटरी परियोजना से संबंधित क्षतिपूर्ति के बारे में है।

गैस विवाद पर आरआईएल ने कहा कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने प्रोक्डशन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट (पीएससी) ठेकेदारों – आरआईएल, बीपी एक्सप्लोरेशन (अल्फा) लिमिटेड और निको (एनईसीओ) लिमिटेड से 2.81 अरब अमेरिकी डॉलर की मांग की है। आरआईएल ने कहा कि उसे इस संबंध में सोमवार को पत्र मिला।

यह डिमांड नोटिस 14 फरवरी को दिल्ली उच्च न्यायालय के एक हालिया आदेश के बाद जारी किया गया है जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय के खंडपीठ ने मई 2023 में पारित दिल्ली उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश के आदेश को उलट दिया था। मई, 2023 के आदेश में पिछले मध्यस्थता फैसले को चुनौती देने वाली भारत सरकार की अपील को खारिज कर दिया गया था। आरआईएल ने मंगलवार को कहा कि कंपनी को ‘कानूनी तौर पर सलाह दी गई है कि डिवीजन बेंच का फैसला और यह मांग अस्थायी है।’

जुलाई 2018 में, आरआईएल ने ओएनजीसी के ब्लॉकों से कथित गैस आपूर्ति के कारण केजी-डी6 कंसोर्टियम पर भारत सरकार के दावे के खिलाफ लगभग 1.55 अरब अमेरिकी डॉलर की राशि के लिए मध्यस्थता मामला जीता था। आरआईएल ने कहा कि वह दिल्ली उच्च न्यायालय के खंडपीठ के निर्णय को चुनौती देने के लिए कदम उठा रही है। आरआईएल ने कहा, ‘कंपनी को इस मामले में किसी तरह की देनदारी की उम्मीद नहीं है।’

चैंबर्स ऑफ श्रेणिक गांधी के मैनेजिंग पार्टनर श्रेणिक गांधी ने कहा, ‘यह काफी दिलचस्प है कि आरआईएल के कंसोर्टियम के खिलाफ दावे किए जा रहे हैं जबकि वास्तव में ऐसा प्रतीत होता है कि भारत सरकार के पक्ष में कोई आदेश नहीं है और आरआईएल के कंसोर्टियम के खिलाफ दावा करने के लिए किसी भी कानून की अदालत द्वारा इस आदेश को बरकरार रखा गया है।’

एक अलग अधिसूचना में आरआईएल ने एक्सचेंजों को यह भी बताया कि कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी रिलायंस न्यू एनर्जी बैटरी स्टोरेज लिमिटेड (आरएनईबीएसएल) को सोमवार को भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) से एक पत्र मिला।मंगलवार को, आरआईएल का शेयर लगातार दूसरे दिन गिरावट के साथ बंद हुआ। यह शेयर अपने पिछले बंद भाव से 0.8 फीसदी गिरकर 1,161.70 रुपये पर बंद हुआ। सोमवार को आरआईएल के शेयर में 2.4 फीसदी की गिरावट आई थी।

Advertisement
First Published - March 4, 2025 | 10:31 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement