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किराये पर फिल्म दिखाकर कमाने की जुगत

Last Updated- December 11, 2022 | 6:40 PM IST

एस एस राजमौलि की फिल्म ‘आरआरआर’ का हिंदी संस्करण साल में सबसे ज्यादा हिट होने वाली फिल्मों में शामिल है और इसका प्रसारण बुकमाईशो के ट्रांसैक्शनल वीडियो ऑन डिमांड (टीवीओडी) या मंच के प्रति व्यू के हिसाब से किए गए भुगतान के आधार पर पिछले सप्ताह शुक्रवार से शुरू हुआ। ओवर दि टॉप (ओटीटी) रिलीज के बाद टीवीओडी विंडो विशेषतौर पर लगभग दो हफ्ते तक चलेगा।
टीवीओडी का रुझान देश में बढ़ रहा है क्योंकि फिल्म निर्माता अपनी सामग्री से कमाई करने के नए तरीके ढूंढ रहे हैं, वहीं उपभोक्ता भी मीडिया कंपनियों से अधिक मांग कर रहे हैं। इस महीने की शुरुआत में एमेजॉन प्राइम वीडियो का कहना है कि यह प्रति व्यू के हिसाब से भुगतान लेने वाले विकल्प की पेशकश करना चाहता है जिसके लिए एक बार में 69 रुपये और 499 रुपये तक का भुगतान करना पड़ सकता है और यह कीमत टाइटल पर निर्भर होगी।
बुकमाईशो स्ट्रीम ने आलिया भट्ट अभिनीत फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ का प्रसारण इस महीने की शुरुआत में टीवीओडी मंच पर किया। ‘आरआरआर’ देखने के लिए दर्शकों ने इस सेवा का इस्तेमाल करते हुए 349 रुपये चुकाए जिससे अंदाजा मिला कि प्रीमियम सामग्री से कीमत का टैग जुड़ा हुआ है। बुकमाईशोज के मुख्य परिचालन अधिकारी (सिनेमाज) आशिष सक्सेना का कहना है, ‘आरआरआर फिल्म को लेकर दिलचस्पी बनी हुई है और यह रुझान बुकिंग से पहले भी देखा जा रहा था। आरआरआर और गंगूबाई जैसी फिल्मों ने टीवीओडी मंचों जैसे कि बुकमाईशो स्ट्रीम तक अपना रास्ता बनाया है ऐसे में हमें इस बात पर पूरा भरोसा है कि प्रमुख भारतीय स्टूडियो और निर्माता इस मॉडल को अपनाएंगे।’
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी पहुंच संपन्न घरों तक ही सीमित होगी क्योंकि प्रीमियम और लोकप्रिय सामग्री की लागत टीवीओडी मंचों पर अधिक है। सबस्क्रिप्शन आधारित वीडियो ऑन डिमांड (एसवीओडी) सेवा या सबस्क्रिप्शन आधारित ओटीटी हाल के महीने में अपनी पहुंच में सुधार करने के लिए कीमतें घटा रहे हैं। मिसाल के तौर पर केवल मोबाइल वाली योजना मसलन नेटफ्लिक्स की लागत अब 199 रुपये प्रति माह के मुकाबले 149 रुपये प्रति माह हो गई है। बेसिक प्लान के तहत एक उपकरण पर सभी सामग्री तक पहुंच बनाने की अनुमति होती है जिसकी लागत 499 रुपये प्रति माह के मुकाबले अब 199 रुपये हो गई है।
मुंबई की ब्रोकिंग कंपनी इलारा कैपिटल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) करण तौरानी का कहना है, ‘टीवीओडी के लिए डायरेक्ट-टू-होम मंच मसलन टाटा प्ले (पहले टाटा स्काई) के साथ कोशिश की गई थी। लेकिन यह कारगर नहीं रहा क्योंकि व्यापक केबल और डीटीएच खुद ही किफायती कीमतों पर दर्शकों को सामग्री की पेशकश करते हैं। ऐसे में टीवीओडी जैसी विशेष सेवाएं लेने का क्या मतलब है? यही बात ओटीटी के खिलाडिय़ों पर भी लागू होती है जो प्रति व्यू भुगतान करने के लिए इस क्षेत्र में आए हैं।’
विशेषज्ञों का कहना है कि पहुंच में सुधार के लिए ही 2020 में ज़ी5 पर प्रति व्यू भुगतान वाली सेवा ज़ी प्लेक्स अपनी शुरुआत के बाद से ही उनके पास उपलब्ध फिल्में देखने के लिए 99 रुपये का शुल्क ले रहे है। वहीं इसके विपरीत मीडिया शेमारू ने इस मॉडल को बंद करने और इसके बजाय सबस्क्रिप्शन आधारित ओटीटी सेवाओं को बनाए रखने का फैसला किया जिसने 2020 में प्रति व्यू सेवाओं के साथ प्रयोग किया था।
शेमारू एंटरटेनमेंट के मुख्य कार्याधिकारी हिरेन गड्डा का कहना है कि ओटीटी बाजार के लिए कुल वृद्धि संभावनाओं और भारत में क्षेत्रीय दर्शकों की वृद्धि को देखते हुए कंपनी ने टीवीओडी मंच के मुकाबले अपना एसवीओडी सेवाओं पर जोर देने का फैसला कर लिया। उन्होंने बताया, ‘किफायती डेटा शुल्क, मोबाइल नेटवर्क का दायरा बढऩे, किफायती स्मार्टफोन की संख्या बढऩे की वजह से क्षेत्रीय दर्शकों की तादाद में वृद्धि होने की उम्मीद है। हम इस रुझान पर जोर देना चाहते हैं और अपने मंच को मनोरंजन की सभी जरूरतें पूरी करने वाले माध्यम के तौर पर बनाना चाहते हैं।’
डेलॉयट इंडिया के अधिकारी और प्रमुख (मीडिया और मनोरंजन) जेहिल ठक्कर का कहना है कि ऐसी सामग्री पाना बेहद कठिन काम होगा जिससे दर्शकों की सबस्क्रिप्शन लेने की इच्छा बढ़ जाए। वह कहते हैं, ‘बुनियादी समस्या यह है कि दर्शकों को सामग्री में दिलचस्पी होनी चाहिए। अगर टीवीओडी पर ब्लॉकबस्टर फिल्मों (जैसे कि आरआरआर) को दर्शक मिल सकते हैं लेकिन सिनेमाघरों में जिन फिल्मों को दर्शक नहीं मिलते हैं उन्हें टीवीओडी पर भी दर्शक नहीं मिलते हैं।’ हालांकि बुकमाईशो जैसे मंचों ने हार नहीं मानी है बल्कि यह फिल्मों के टीवीओडी रिलीज के लिए अधिक निर्माता और निर्देशकों से बात कर रहा है।
सक्सेना का कहना है कि फिल्म निर्माता अपने विकल्प पर नजर रख रहे हैं। उनका कहना है, ‘यह बस थोड़े वक्त की बात है क्योंकि टीवीओडी को जल्द ही सिनेमा देखने के एक अहम माध्यम के रूप में देखा जा सकता है।’ निश्चित रूप से फिल्म निर्माता भी ब्लॉकबस्टर फिल्मों की रिलीज को प्रति  व्यू भुगतान के आधार पर भुनाने का विकल्प देखेंगे।

First Published - May 28, 2022 | 12:12 AM IST

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