facebookmetapixel
Advertisement
सरकार का बड़ा ऐलान! लॉन्च की ₹62500 करोड़ की मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम, 5% तक इंसेंटिव भी मिलेगाSAT ने डैनी गायकवाड़ की अपील खारिज की, नए ऑफर का रास्ता खुलालॉन्ग टर्म के लिए करना है फ्लैक्सी कैप फंड में निवेश? क्वांटम म्युचुअल फंड दे रहा मौका, ₹500 से करें शुरुआतगोल्ड ईटीएफ की रफ्तार धीमी पड़ी, जुलाई में निवेश 55% घटा; खरीदें, बेचें या होल्ड करें?इथेनॉल उत्पादन और नीति पर उठ रहे सवाल! क्या चीनी और चावल की बढ़ती कीमतें बनी वजह?लगातार टूट रहे स्टॉक में बना निवेश का मौका? ब्रोकरेज हुए बुलिश, 62% तक का रिटर्न संभवFPIs ने शेयर बाजार में लगाए ₹16,621 करोड़, टेलीकॉम-रियल्टी से खींचा पैसा, कंजम्पशन पर बढ़ाया दांवIPO: लुमिनो ने ₹78-82 तय किया प्राइस बैंड, ₹700 करोड़ जुटाने का प्लान; एटमबर्ग भी बाजार में उतरने को तैयारत्योहारी सीजन से पहले रिकॉर्ड स्तरों पर पहुंचा चीनी का भाव, एक्शन में सरकार! कब गिरेंगे दाम?IPO की डेडलाइन पर अनिश्चितता के बीच Flipkart में बढ़ी हलचल, कई आला अफसर बाहर

साइबर अपराध से निपटने के लिए कानूनी ढांचे की जरूरत

Advertisement
Last Updated- December 11, 2022 | 8:13 PM IST

केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को नए ‘गतिशील’ कानूनी ढांचे का आह्वान किया जो निजता और अभिव्यक्ति की आजादी के साथ संतुलित होने के साथ-साथ साइबर जगत के अनैतिक तत्वों की चुनौती से निपटने के लिए विनियमन की मांग को भी पूरी करे।
सीबीआई द्वारा साइबर अपराध जांच और डिजिटल फॉरेंसिक पर आयोजित दूसरे सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि गत सालों में प्रौद्योगिकी ने बहुत उत्पादकता, कुशलता और सहूलियत दी है लेकिन इसके साथ ही इसने लोगों की जिंदगी में अतिक्रमण भी किया है जो अधिकतर समय हानिकारक और फर्जीवाड़ा करने के लक्ष्य लिए होती है।
उन्होंने कहा कि इस समस्या से कानूनी रणनीति, प्रौद्योगिकी, संगठन, क्षमता निर्माण और आपसी सहयोग से निपटा जा सकता है। साइबर अपराध का मुकाबला करने के लिए कानूनी रणनीति के बारे में वैष्णव ने कहा कि देश को बड़े पैमाने पर कानूनी ढांचे में बदलाव करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘मैं नहीं मानता कि कोई क्रमिक बदलाव मददगार होगा। बदलाव पर्याप्त, महत्वपूर्ण, मौलिक और ढांचागत करना होगा।’
वैष्णव ने कहा कि पूरा संघर्ष दो पहलुओं के बीच है। पहला पहलु निजता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का है जबकि दूसरा पहलु विनियमन और नियंत्रण की मांग है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य ‘निजता और अभिव्यक्ति की स्वतंतत्रा की आड़ में फर्जीवाड़ा करने की गतिविधियों को रोकना है।’
मंत्री ने कहा कि समाज का एक धड़ा कहता है कि निजता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार अक्षुण्ण है और किसी को भी इसमें आने की अनुमति नहीं दी जा सकती जबकि दूसरा धड़ा नियमन और नियंत्रण की मांग कर रहा है और समाज के इन दोनों मांग में संतुलन होना चाहिए।

Advertisement
First Published - April 4, 2022 | 11:37 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement