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साइबर अपराध से निपटने के लिए कानूनी ढांचे की जरूरत

Last Updated- December 11, 2022 | 8:13 PM IST

केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को नए ‘गतिशील’ कानूनी ढांचे का आह्वान किया जो निजता और अभिव्यक्ति की आजादी के साथ संतुलित होने के साथ-साथ साइबर जगत के अनैतिक तत्वों की चुनौती से निपटने के लिए विनियमन की मांग को भी पूरी करे।
सीबीआई द्वारा साइबर अपराध जांच और डिजिटल फॉरेंसिक पर आयोजित दूसरे सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि गत सालों में प्रौद्योगिकी ने बहुत उत्पादकता, कुशलता और सहूलियत दी है लेकिन इसके साथ ही इसने लोगों की जिंदगी में अतिक्रमण भी किया है जो अधिकतर समय हानिकारक और फर्जीवाड़ा करने के लक्ष्य लिए होती है।
उन्होंने कहा कि इस समस्या से कानूनी रणनीति, प्रौद्योगिकी, संगठन, क्षमता निर्माण और आपसी सहयोग से निपटा जा सकता है। साइबर अपराध का मुकाबला करने के लिए कानूनी रणनीति के बारे में वैष्णव ने कहा कि देश को बड़े पैमाने पर कानूनी ढांचे में बदलाव करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘मैं नहीं मानता कि कोई क्रमिक बदलाव मददगार होगा। बदलाव पर्याप्त, महत्वपूर्ण, मौलिक और ढांचागत करना होगा।’
वैष्णव ने कहा कि पूरा संघर्ष दो पहलुओं के बीच है। पहला पहलु निजता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का है जबकि दूसरा पहलु विनियमन और नियंत्रण की मांग है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य ‘निजता और अभिव्यक्ति की स्वतंतत्रा की आड़ में फर्जीवाड़ा करने की गतिविधियों को रोकना है।’
मंत्री ने कहा कि समाज का एक धड़ा कहता है कि निजता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार अक्षुण्ण है और किसी को भी इसमें आने की अनुमति नहीं दी जा सकती जबकि दूसरा धड़ा नियमन और नियंत्रण की मांग कर रहा है और समाज के इन दोनों मांग में संतुलन होना चाहिए।

First Published - April 4, 2022 | 11:37 PM IST

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