facebookmetapixel
Advertisement
अगर युद्ध एक महीने और जारी रहा तो दुनिया में खाद्य संकट संभव: मैट सिम्पसनहोर्मुज स्ट्रेट खुला लेकिन समुद्री बीमा प्रीमियम महंगा, शिपिंग लागत और जोखिम बढ़ेपश्चिम एशिया युद्ध का भारत पर गहरा असर, रियल्टी और बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव मेंगर्मी का सीजन शुरू: ट्रैवल और होटल कंपनियों के ऑफर की बाढ़, यात्रियों को मिल रही भारी छूटबाजार में उतार-चढ़ाव से बदला फंडरेजिंग ट्रेंड, राइट्स इश्यू रिकॉर्ड स्तर पर, QIP में भारी गिरावटपश्चिम एशिया संकट: MSME को कर्ज भुगतान में राहत पर विचार, RBI से मॉरेटोरियम की मांग तेजRCB की बिक्री से शेयरहोल्डर्स की बल्ले-बल्ले! USL दे सकती है ₹196 तक का स्पेशल डिविडेंडतेल में बढ़त से शेयर और बॉन्ड में गिरावट; ईरान का अमेरिका के साथ बातचीत से इनकारगोल्डमैन सैक्स ने देसी शेयरों को किया डाउनग्रेड, निफ्टी का टारगेट भी घटायाकिधर जाएगा निफ्टीः 19,900 या 27,500; तेल और भू-राजनीति तनाव से तय होगा रुख

नए लेबर कोड से IT इंडस्ट्री में हलचल: वेतन लागत में 10% तक होगा उछाल, बढ़ेगा आर्थिक दबाव

Advertisement

विशेषज्ञों ने बताया कि 40 साल से अ​धिक आयु वाले सभी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य मुफ्त स्वास्थ्य-जांच भी मुख्य खर्च होगी, जो पहले की संहिता में कानूनी रूप से जरूरी नहीं थी

Last Updated- November 23, 2025 | 9:45 PM IST
IT Companies outlook
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

पिछले सप्ताह श्रम संहिता लागू होने के बाद देश की आईटी सेवा क्षेत्र की कंपनियों की वेतन लागत 10 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। विशेषज्ञों ने यह अनुमान जताया है। हालांकि कई लोग इस बात से सहमत हैं कि यह नई संरचना इस क्षेत्र में कुछ कमियों को दूर करने में मदद करेगी, जिसे पिछले कुछ दशकों के दौरान काफी हद तक सामान्य रूप दिया जा चुका है।

भारतीय आईटी/आईटी सेवा क्षेत्र सबसे ज्यादा रोजगार पैदा करने वाले क्षेत्रों में से एक है। अनअर्थइनसाइट्स के अनुसार वित्त वर्ष 26 के दौरान उद्योग में 58 लाख कर्मचारी होने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों ने बताया कि 40 साल से अ​धिक आयु वाले सभी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य मुफ्त स्वास्थ्य-जांच भी मुख्य खर्च होगी, जो पहले की संहिता में कानूनी रूप से जरूरी नहीं थी। टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएल में अच्छी-खासी  संख्या में कर्मचारी मझोले स्तर वाले प्रबंधक हैं, जो उस वि​शिष्ट सीमा से ऊपर के हैं तथा सालाना चिकित्सा जांच से निश्चित रूप से खर्च बढ़ेगा। अलबत्ता अभी यह देखा जाना बाकी है कि कंपनियां उस जांच के तहत किन चीजों को शामिल करना चाहती हैं और क्या कुछ ऐसी भी जांच हैं जिनका खर्च वे कर्मचारियों से उठवाना चाहती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह नई श्रम संहिता देश के आईटी और आईटी सेवा क्षेत्र के लिए अहम बदलाव हैं, क्योंकि ऐसा पहली बार है कि ये कंपनियां केंद्र सरकार की ओएसएच ​संहिता के साथ-साथ राज्य के दुकान एवं प्रतिष्ठान नियमों से चलेंगी और काम के घंटे, ओवरटाइम, कल्याण और वैधानिक दस्तावेजों के संबंध में कड़े नियम लाए जा रहे हैं।

ईवाई इंडिया के ग्लोबल कंप्लायंस प्रैक्टिस लीडर जिग्नेश ठक्कर ने कहा, ‘वेतन की इस विस्तारित परिभाषा से प्रोविडेंट फंड (पीएफ), ग्रेच्युटी और लीव बेनिफिट खर्च बढ़ जाएगा, जिससे भारत में पेरोल लागत अनुमानित रूत से 5 से 10 प्रतिशत बढ़ जाएगी।’

ये संहिताएं बड़े स्तर पर नौकरी से निकालने पर भी रोक लगाती हैं और नए कौशल सीखाने के फंड में योगदान जैसी जिम्मेदारियां भी पेश करती हैं। बड़े नियोक्ता भी स्टैंडिंग ऑर्डर्स, शिकायत प्र​क्रिया और डिजिटल-कंडक्ट नियमों के जरिये सामान्य श्रम-संबंध संरचना के तहत आएंगे।

स्पेशलिस्ट स्टाफिंग कंपनी एक्सफेनो के मुख्य कार्य अ​धिकारी कमल कारंत का कहना है कि बेसिक पे को कंपनी की कुल लागत (सीटीसी) का कम से कम आधा करने की वजह से रिटायरमेंट के पीएफ और ग्रेच्युटी जैसे फायदे, जो बेसिक से जुड़े होते हैं, बढ़ जाएंगे। उन्होंने काह, ‘जहां टेक होम कम होगा, वहीं रिटायरल ज्यादा होगा जिससे आईटी कंपनियों की लागत बढ़ेगी।’

इस लागत से आईटी कंपनियों की चिंता बढ़ जाएगी, जो कई कारणों से पिछले कुछ सालों से अनिश्चित और अस्थिर व्यापक आ​र्थिक माहौल से गुजर रही हैं। उनमें से कई कंपनियां अपना तिमाही मार्जिन बरकरार रखने के लिए वेतन वृद्धि टालती आ रही हैं, ऐसे समय में जब राजस्व वृद्धि पर लगातार दबाव है और इससे भी ज्यादा आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस के असर की वजह से है।

Advertisement
First Published - November 23, 2025 | 9:45 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement