facebookmetapixel
सेना दिवस: भैरव बटालियन ने जीता लोगों का दिल, ब्रह्मोस मिसाइल ने दिखाई अपनी ताकतX ने AI चैटबॉट ग्रोक से महिलाओं और बच्चों की अश्लील तस्वीरों पर लगाया बैन, पेड यूजर्स तक सीमित किया कंटेंट क्रिएशनI-PAC दफ्तर की तलाशी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: ED की याचिका पर बंगाल सरकार से जवाब, FIR पर रोकवै​श्विक वृद्धि के लिए हमारी रणनीति को रफ्तार दे रहा भारत, 2026 में IPO और M&A बाजार रहेगा मजबूत27 जनवरी को भारत-ईयू एफटीए पर बड़ा ऐलान संभव, दिल्ली शिखर सम्मेलन में तय होगी समझौते की रूपरेखासुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: टाइगर ग्लोबल को टैक्स में राहत नहीं, मॉरीशस स्ट्रक्चर फेलएशिया प्राइवेट क्रेडिट स्ट्रैटिजी के लिए KKR ने जुटाए 2.5 अरब डॉलर, निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ीचीन के कदम से देसी प्लास्टिक पाइप कंपनियों को दम, पिछले एक साल में शेयर 23% टूटेसेबी लाएगा म्युचुअल फंड वर्गीकरण में बड़ा बदलाव, पोर्टफोलियो ओवरलैप पर कसेगी लगामRIL Q3FY26 results preview: रिटेल की सुस्ती की भरपाई करेगा एनर्जी बिजनेस, जियो बनेगा कमाई का मजबूत सहारा

सरकार और ट्विटर को अदालत का नोटिस

Last Updated- December 12, 2022 | 8:22 AM IST

उच्चतम न्यायालय ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता विनीत गोयनका की ओर से दायर जनहित याचिका पर सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों खासकर ट्विटर को शुक्रवार को नोटिस जारी किया। अदालत ने नोटिस में कहा है कि सरकार फर्जी खबरों की जांच करने और सोशल मीडिया पर भड़काने वाले संदेशों और विज्ञापनों पर नजर रखने के लिए एक व्यवस्था बनाए। याचिका में कहा गया है कि किसी प्रणाली या कानून के अभाव में ट्विटर इंक या ट्विटर कम्युनिकेशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और इसी तरह के अन्य सोशल मीडिया मंचों को विज्ञापन के रूप में वैसी सामग्री को प्रसारित करने या बढ़ावा देने से रोका नहीं जा रहा है जो अलगाववादी एजेंडा, देशद्रोही सामग्री का प्रसार करने के साथ समुदायों के बीच नफरत बढ़ाने, बड़े पैमाने पर समाज के खिलाफ  विभाजनकारी और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं तथा देश की संघीय भावना के खिलाफ  हैं। शुक्रवार को याची की तरफ  से वकील अश्विनी कुमार दुबे पेश हुए।
गोयनका ने यह जनहित याचिका पिछले साल मई में दायर की थी। याचिका में कहा गया है कि ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया का इस्तेमाल सरकारी अधिकारियों और विभागों द्वारा सार्वजनिक कामों को करने के लिए किया जाता है इसलिए ये मंच सार्वजनिक कर्तव्यों को भी निभा रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही ये मंच फर्जी और देशद्रोही संदेशों को फैलाने, प्रकाशित करने और बढ़ावा देने में भी लिप्त रहते हैं और उन्हें ऐसा करने से रोकने के लिए कोई कानून नहीं है। गोयनका ने यह याचिका तब दायर की जब उन्होंने 2019 में एक ‘प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन’ का पोस्ट देखा जो उनके ट्विटर टाइमलाइन पर एक पेड सामग्री के तौर पर दिख रहा था। याचिका में कहा गया है, ‘ट्विटर और सोशल मीडिया कंपनियां लाभ कमाने वाली कंपनियां हैं और उनसे यह उम्मीद करना महत्त्वपूर्ण है कि सोशल मीडिया सुरक्षित रहे और वे सुरक्षा उपायों पर गौर करें।’ यह नोटिस ऐसे वक्त में आया है जब सरकार और ट्विटर के बीच कुछ सामग्री हटाने को लेकर गतिरोध की स्थिति बनी है। इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ट्विटर से कुछ खातों को ब्लॉक करने के साथ ही कथित विवादास्पद सामग्री हटाने का निवेदन भी किया था।

First Published - February 12, 2021 | 11:29 PM IST

संबंधित पोस्ट