facebookmetapixel
Advertisement
DSP Mutual Fund का नया AI-पावर्ड कैंपेन शुरू, MAAFs को लेकर दूर करेगा भ्रम, रिटर्न से आगे सोचने की सलाहधारावी पुनर्विकास से जुड़े हर सवाल का जवाब देगी धारावी दीदी, 24×7 उपलब्ध रहेगा AI असिस्टेंटBPCL Q1FY27 Results: पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाने का पड़ा असर, ₹3,962 करोड़ के घाटे में कंपनीदिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: गुजरात में वेदांता के ऑयल ब्लॉक का विस्तार रद्द, ONGC संभालेगी कमानपार्श्वनाथ मामले में सुप्रीम कोर्ट का अल्टीमेटम, 12% ब्याज के साथ पूरी रकम जमा करो, नहीं तो होगी जेलम्युचुअल फंड इंडस्ट्री में जल्द दस्तक देगी कार्नेलियन, SEBI से मिली मंजूरीखाद्य तेलों पर बढ़ सकती है आयात निर्भरता, तिलहन फसलों की बुवाई अब भी सामान्य से 26% कमEternal Q1FY27 Results: मुनाफा 268% बढ़कर ₹92 करोड़, रेवेन्यू भी 182% बढ़ाSBI फंड्स vs HDFC AMC vs ICICI प्रूडेंशियल AMC: निवेश के लिए कौन बेहतर?टोल प्लाजा से 20 किमी के दायरे में रहते हैं? अब RajmargYatra App से घर बैठे बनवाएं Local Pass; चेक करें ऑनलाइन प्रोसेस

ब्रॉडबैंड पर घटेगा लाइसेंस शुल्क

Advertisement
Last Updated- December 15, 2022 | 4:35 AM IST

केंद्रीय मंत्रिमंडल वायरलाइन ब्रॉडबैंड पर लाइसेंस शुल्क घटाकर समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) के 2.5 प्रतिशत से   एजीआर का 1 रुपये करने के प्रस्ताव पर फैसला कर सकता है। इस कदम का मकसद इन सेवाओं का प्रसार करना है। मंत्रिमंडल इस प्रस्ताव पर अलगे सप्ताह विचार कर सकता है।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि यह दूरसंचार क्षेत्र को दूरसंचार विभाग (डीओटी) की ओर से दिया गया राहत पैकेज होगा। विभाग को वित्त मंत्रालय ने काम सौंपा था कि वह दूरसंचार उद्योग को राहत देने के दमों का खाका तैयार करे, जो कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए की गई देशबंदी से प्रभावित हुआ है। माना जा रहा है कि इस प्रस्ताव से सेवा प्रदाताओं को 9,000 करोड़ रुपये की राहत मिल सकती है।
मामले से जुड़़े अधिकारी ने कहा, ‘इससे  ब्रॉडबैंड सेवाओं की पहुंच में सुधार होगा और कम लाइसेंस शुल्क से कंपनियों को फायदा पहुंचेगा। यह प्रस्ताव है कि इसे एजीआर के 2.5 प्रतिशत से घटाकर एजीआर का 1 रुपये किया जाए और अगले सप्ताह मंत्रिमंडल इस पर चर्चा कर सकता है।’ सरकार को उम्मीद है कि इससे ब्रॉडबैंड कनेक्शन की संख्या बढ़ेगी। इस प्रस्ताव को डिजिटल संचार आयोग (डीसीसी) ने मंजूरी दी ती, जो दूरसंचार क्षेत्र में निर्णय लेने वाला शीर्ष निकाय है। इस समय वायरलाइन ग्राहकों का देश में आधार बमुश्किल 2 प्रतिशत है और केंद्र सरकार के प्रस्ताव से इसमें तेज बढ़ोतरी होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या बढ़ाने पर ध्यान देता है तो इससे देश के  सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में बढ़ोतरी होगी। उदाहरण के लिए अगर टेली डेंसिटी 10 है तो जीडीपी 1 प्रतिशत है और हर टेली डेंसिटी में हर 10 प्रतिशत बढ़ोतरी पर जीडीपी में 1 प्रतिशत बढ़ोतरी होगी। सरकार को यह भी उम्मीद है कि बॉडबैंड नेटवर्क बेहतर होने का मतलब है कि देश में डिजिटल व्यापकता बढ़ेगी और इससे बढ़े हुए वस्तु एवं सेवा कर से खजाने में ज्यादा राजस्व आएगा। इन सेवाओं पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है।
अधिकारी ने कहा, ‘इसमें सरकार के लिए 2 राजस्व चैनल है। एक- लाइसेंस शुल्क और दूसरा जीएसटी।’ दूरसंचार बाजार कुल 2.5 लाख करोड़ रुपये का है, जिसमें से वायरलाइन और इंटरप्राइज कारोबार मिलाकर 1 लाख करोड़ रुपये का है और शेष हिस्सेदारी मोबाइल सेवाओं की है।

Advertisement
First Published - July 20, 2020 | 11:42 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement