facebookmetapixel
Advertisement
बढ़ती मांग के बीच उत्पादन बढ़ाएगी टाटा मोटर्स, Sierra EV लॉन्च के बाद सप्लाई पर फोकसHUL AGM: पश्चिम एशिया युद्ध से बढ़ी कच्चे माल की लागत, पहली तिमाही में कारोबार पर पड़ा असरशांति समझौते से कम हुआ जोखिम, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों व AI शेयरों के हाई वैल्यूएशन पर रहेगी नजर: RBIAdani Vizhinjam Port Deal: MSC की सहयोगी कंपनी खरीदेगी 49% हिस्सेदारी, करेगी 1.4 अरब डॉलर का निवेशघरेलू ऋण बाजार में बहार, शेयरों से मुंह मोड़ भारतीय सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेशकों ने लगाए ₹55,518 करोड़मौसम विभाग की चेतावनी: जुलाई में सामान्य से कम बरसेंगे बादल, देश के कई हिस्सों में बढ़ सकता है जल संकट!वाराणसी में ₹50,000 करोड़ का निवेश, एरोसिटी और तीन नई टाउनशिप से रियल एस्टेट में आएगी बड़ी छलांग!मंदिर अर्थव्यवस्था का चमत्कार: अकेले वाराणसी में पर्यटकों से हर साल पैदा हो रही ₹1.25 लाख करोड़ की इकोनॉमी!वेस्ट टू वेल्थ से चमकेगी यूपी की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि कचरा अब बनेगा कमाई का बड़ा जरियाUbharta Purvanchal: एक्सप्रेसवे और MSME के दम पर UP को $1 ट्रिलियन इकोनॉमी बनाएगा पूर्वांचल!

अनुबंधों की होड़ के बीच कड़ी शर्तें स्वीकार रहा आईटी सेक्टर

Advertisement

245 अरब डॉलर के इस क्षेत्र को वै​श्विक महामारी की वजह से डिजिटल सेवाओं में आई उछाल से काफी फायदा हुआ है।

Last Updated- December 19, 2023 | 10:35 PM IST
IT sector

भारत की सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियां ग्राहकों से बड़े सौदे हासिल करने के लिए अनुबंध की कड़ी शर्तें स्वीकार कर रही हैं क्योंकि उन्हें अनिश्चित वैश्विक आ​र्थिक हालात में ऑर्डर की कमी के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है। उद्योग के अंदरूनी सूत्रों और विश्लेषकों ने यह जानकारी दी है।

245 अरब डॉलर के इस क्षेत्र को वै​श्विक महामारी की वजह से डिजिटल सेवाओं में आई उछाल से काफी फायदा हुआ है। इस क्षेत्र को हाल की तिमाहियों के दौरान संघर्ष करना पड़ा है क्योंकि ग्राहकों ने महंगाई के दबाव और मंदी की आशंकाओं के बीच वैक​ल्पिक परियोजनाओं पर खर्च कम कर दिया है। इससे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस और एचसीएलटेक जैसी कंपनियों को अनुबंध की शर्तें स्वीकार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इनमें न्यूनतम लागत बचत की गारंटी, कुछ लक्ष्य हासिल होने पर ही ग्राहक को बिल देना और लागत वृद्धि की समीक्षा करने जैसी शर्तें शामिल हैं।

इन्फोसिस के पूर्व सीएफओ वी बालाकृष्णन ने कहा ‘जब कभी आर्थिक चुनौतियां दिखती हैं और मांग कम हो जाती है, तो यह खरीदार का बाजार बन जाता है। ग्राहक मूल्य निर्धारण सीमित करने और परिणाम-आधारित सौदों की मांग करने जैसी अधिक शर्तों पर जोर देने की कोशिश करते हैं।’

उन्होंने कहा कि साल 2008 के दौरान ऐसा देखा गया था, जब वैश्विक वित्तीय संकट आया था और साल 2001 के दौरान जब डॉट-कॉम धराशायी हुआ था।

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और इन्फोसिस ने रॉयटर्स के टिप्पणी के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया। एचसीएलटेक ने विशिष्ट सौदे की शर्तों के संबंध में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

आईटी अनुसंधान फर्म एवरेस्ट ग्रुप के आंकड़ों से पता चलता है कि साल 2023 में जिन 1,600 से अधिक आईटी और कारोबार क्रियान्वयन प्रबंधन सौदों पर निगाह रखी गई थी, उनमें से 80 प्रतिशत से अधिक में वचन-बचत की शर्त का कोई न कोई रूप शामिल था, जबकि साल 2019 में यह प्रतिशत लगभग 65 था।

Advertisement
First Published - December 19, 2023 | 10:35 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement