सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र की कंपनियां हरियाणा सरकार के नए कानून को न्यायालय में चुनौती दे सकती हैं, जिसके मुताबिक निजी क्षेत्र में स्थानीय लोगों के लिए 75 प्रतिशत आरक्षण अनिवार्य किया गया है।
आईएमटी इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महासचिव मनोज त्यागी ने कहा, ‘हम इस कानूून के खिलाफ पहले भी उच्च न्यायालय गए थे, लेकिन न्यायालय ने कहा था कि हम कानून अधिसूचित होने के बाद इस मसले पर सुनवाई करेंगे।’
उद्योगों और उनसे जुड़े संगठनों का मानना है कि इस कानून से राज्य को कोई फायदा नहीं होगा और एमएसएमई पर इसका बुरा असर पड़ेगा, जो पहले ही कोविड-19 के लॉकडाउन की बंदी के असर से जूझ रहे हैं।
हरियाणा बड़े पैमाने पर औद्योगिक राज्य है, जहां बड़ा ऑटोमोबाइल केंद्र है और मारुति सुजूकी जैसी बड़ी कंपनियों को आपूर्ति के लिए विनिर्माता तमाम छोटे कल पुर्जे बनाते हैं।
हालांकि एमएसएमई के विपरीत मारुति जैसी ऑटो दिग्जग कंपनी पर इस कानून का कम असर होगा क्योंकि राज्य सरकार ने कहा है कि यह कोटा सिर्फ उन पर लागू होगा, जिनका सकल मासिक वेतन 30,000 रुपये से कम है। मसौदा विधेयक में वेतन की सीमा 50,000 रुपये महीने तय की गई थी।
मारुति सुजूकी के चेयरमैन आरसी भार्गव ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘इस तरह प्रतिबंधात्मक नीतियां स्वागत योग्य नहीं हैं। बहरहाल हमारी बातचीत के बाद वेतन की सीमा घटाकर 30,000 रुपये कर दी गई है, इसलिए हम खुश हैं कि बातचीत का कुछ परिणाम निकला है। हम आगे बढ़ेंगे और नई जमीन के को अंतिम रूप देंगे, जहां हम कैलेंडर वर्ष 2021 में ही जाएंगे।’
भार्गव ने कहा कि हरियाणा में संयंत्र लगाने की बडी वजह यह हथी कि मारुति के वेंडर यहां मौजूद हैं और उन्हें दूसरी जगह ले जाना कठिन है।
हरियाणा राज्य स्थानीय अभ्यर्थी रोजगार अधिनियम, 2020 में कहा गया है कि राज्य में स्थित निजी कंपनियों, सोसाइटियों, ट्रस्टों, साझेदारी फर्मों, जिनमें 10 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं और वह 30,000 रुपये या इससे कम वेतन देते हैं, में 75 प्रतिशत नौकरियां स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित होंगी। यह कानून पिछले सप्ताह अधिसूचित किया गया है और 15 जनवरी, 2022 से लागू होगा।
ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एसीएमए) के अध्यक्ष और वाहन कल पुर्जों की दिग्गज कंपनी सोना कॉम्स्टार के चेयरमैन संजय कपूर ने कहा कि वाहन के कल पुर्जों की कंपनियां इससे बहुत ज्यादा प्रभावित होंगी। उन्होंने कहा कि 30,000 रुपये वेतन की सीमा होने के कारण प्राथमिक रूप से एमएसएमई पर असर होगा, जो अभी महामारी के झटकों से उबरने की कवायद में लगी हैं। उन्होंने कहा, ‘इस प्रतिबंधात्मक गतिविधि से कुशल कर्मचारियों और बेहतर लोगों की भर्तियों में चुनौती आएगी। यह अन्य राज्यों के सामने भी गलत नजीर पेश करेगा। सरकार को रोजगार व आजीविका बढ़ाने के लिए अन्य साधनों पर विचार करना चाहिए।’
उन्होंने कहा कि एसीएमए के 800 सेज्यादा सदस्य अभी महामारी से बाहर निकलने की कवायद कर रहे हैं और यह कानून उनके ऊपर गंभीर असर डालेगा।