facebookmetapixel
IT शेयरों में कोहराम: AI के बढ़ते प्रभाव से हिला निवेशकों का भरोसा, एक हफ्ते में डूबे ₹6.4 लाख करोड़NBFCs के लिए RBI की बड़ी राहत: ₹1000 करोड़ से कम संपत्ति वाली कंपनियों को पंजीकरण से मिलेगी छूटRBI Monetary Policy: रीपो रेट 5.25% पर बरकरार, नई GDP सीरीज आने तक ‘तटस्थ’ रहेगा रुखट्रंप ने फिर किया दावा: मैंने रुकवाया भारत-पाकिस्तान के बीच ‘परमाणु युद्ध’, एक दिन में दो बार दोहरायाइस्लामाबाद में बड़ा आत्मघाती हमला: नमाज के दौरान शिया मस्जिद में विस्फोट, 31 की मौतखरगे का तीखा हमला: पीएम के 97 मिनट के भाषण में कोई तथ्य नहीं, सवालों से भाग रही है सरकारलोक सभा में गतिरोध बरकरार: चीन का मुद्दा व सांसदों के निलंबन पर अड़ा विपक्ष, बजट चर्चा में भी बाधाडिजिटल धोखाधड़ी पर RBI का ऐतिहासिक फैसला: अब पीड़ितों को मिलेगा ₹25,000 तक का मुआवजाPariksha Pe Charcha 2026: PM मोदी ने छात्रों को दी सलाह- नंबर नहीं, स्किल व बेहतर जीवन पर दें ध्याननागालैंड में क्षेत्रीय प्राधिकरण के गठन को मिली त्रिपक्षीय मंजूरी, PM मोदी ने बताया ‘ऐतिहासिक’

कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं, FMCG सेक्टर पर लागत बढ़ने का संकट; उपभोक्ता उत्पादों की कीमतें बढ़ने के आसार

कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से एफएमसीजी कंपनियों की पैकेजिंग और माल ढुलाई लागत में इजाफा संभव, लेकिन कीमतें बढ़ाने को लेकर कंपनियां कर रही हैं इंतजार।

Last Updated- June 17, 2025 | 10:19 PM IST
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

दैनिक उपभोक्ता वस्तु (एफएमसीजी) बनाने वाली कंपनियों को कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण कुछ असर पड़ने के आसार नजर आ रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इसका मांग पर पूरा असर पड़ सकता है।

हालांकि पैकेजिंग और माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है, लेकिन कंपनियां बिस्कुट से लेकर साबुन तक की कीमतें बढ़ाने से पहले अब भी भी प्रतीक्षा और समीक्षा वाले अंदाज में हैं, जहां कच्चे तेल के उत्पादों का इस्तेमाल किया जाता है।

एफएमसीजी कंपनियों की लागत में आम तौर पर माल ढुलाई और पैकेजिंग की लागत की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत तक होती है। उपभोक्ता वस्तु बनाने वाली कंपनियां कमोडिटी के आधार पर तीन से छह महीने की अवधि के लिए कच्चे माल के लिए अपनी स्थिति की हेजिंग भी करती हैं।

जून में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 19.5 प्रतिशत तक बढ़कर प्रति बैरल 74.63 डॉलर हो चुकी है।

दैनिक उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र की एक कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के असर का इंतजाम करना और रणनीति बनाए रखना तथा यह सुनिश्चित करना कि उत्पाद अब भी उपभोक्ता के लिए प्रासंगिक हैं, उनकी टीम के लिए चुनौती है।

उन्होंने बताया, ‘हमें स्थिति का सामना करना होगा और समस्या का समाधान खोजना होगा। ये ऐसी चुनौतियां हैं, जिनका हम सामना करते रहेंगे, लेकिन हम इन चुनौतियों का सामना करेंगे और आगे बढ़ेंगे।’

अपने पारले जी बिस्कुट के लिए प्रसिद्ध पारले प्रोडक्ट्स का कहना है कि कीमतों में वृद्धि के बारे में फैसला करना अभी जल्दबाजी होगी। पारले प्रोडक्ट्स के उपाध्यक्ष मयंक शाह ने कहा, ‘हमें देखना होगा कि स्थिति कैसी रहती है। अगर हम यह देखते हैं कि कच्चे तेल की कीमतों में खासा इजाफा हो रहा है, तो हम कीमतें बढ़ा सकते हैं। कच्चे तेल की

अधिक कीमतों के असर का बड़ा भाग माल ढुलाई और पैकेजिंग की लागत में देखा जाता है।’

कच्चे तेल की कीमतों में यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है, जब कंपनियों को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में मांग बढ़ेगी, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक साल 2025 की शुरुआत से ब्याज दरों में कटौती कर रहा है, साथ ही सरकार ने आयकर में राहत की घोषणा की है और अच्छे मॉननसून की भी उम्मीद है।

First Published - June 17, 2025 | 10:08 PM IST

संबंधित पोस्ट